अमित शाह और राहुल गांधी की स्पीकर से मुलाकात भी रही बेनतीजा, जानिए आखिर क्यों नहीं चल पा रही लोकसभा?

नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र 2026 में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच ठनी रार खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही एक बार फिर हंगामे की भेंट चढ़ गई। हालांकि, गतिरोध सुलझाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला से अलग-अलग मुलाकात की, लेकिन नतीजा सिफर रहा। जहाँ राज्यसभा में बजट पर चर्चा सुचारू रूप से शुरू हो गई है, वहीं लोकसभा में ‘पेच’ बुरी तरह फंसा हुआ है।

राहुल गांधी का भाषण और ‘नरवणे’ की किताब का डर

सरकार और विपक्ष के बीच सबसे बड़ा टकराव राहुल गांधी के बोलने के अधिकार और उनके कंटेंट को लेकर है। राहुल गांधी विपक्ष के नेता (LoP) के तौर पर सदन में अपनी बात रखना चाहते हैं, लेकिन सरकार के मन में एक बड़ी दुविधा है।

सरकार को डर है कि यदि राहुल गांधी को बोलने दिया गया, तो वे एक बार फिर पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की किताब का जिक्र करेंगे। राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान भी इसी मुद्दे पर सदन में भारी बवाल हुआ था। सरकार का तर्क है कि ऐसी सामग्री जो आधिकारिक रूप से प्रमाणित नहीं है, उसे सदन के पटल पर लाना संसदीय मर्यादा के खिलाफ है।

स्पीकर के खिलाफ ‘अविश्वास प्रस्ताव’ की तैयारी

विपक्ष ने अब सरकार पर दबाव बनाने के लिए एक बड़ा दांव चला है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि इसकी प्रक्रिया लंबी है, लेकिन विपक्ष इसे एक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।

इस मुद्दे पर विपक्षी एकजुटता भी देखने को मिल रही है। हाल ही में महिला सांसदों पर प्रधानमंत्री का रास्ता रोकने के मामले में स्पीकर के आए बयान ने बिखरे हुए विपक्ष को एक प्लेटफॉर्म पर ला दिया है। विपक्ष अब निलंबित सांसदों की बहाली और बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे पर कार्रवाई की मांग पर अड़ा है।

विपक्ष में ‘महाभियोग’ बनाम ‘अविश्वास’ का तालमेल

भले ही विपक्ष एकजुट दिख रहा हो, लेकिन रणनीतियों में थोड़ा अंतर है। जहाँ कांग्रेस स्पीकर को निशाने पर ले रही है, वहीं ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव लाने के पक्ष में है। हालांकि, बजट पर चर्चा को लेकर तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के सांसद भी उत्सुक हैं ताकि वे अपने राज्यों के मुद्दे उठा सकें।

कब तक चलेगा बजट सत्र?

संसद के इस महत्वपूर्ण सत्र का शिड्यूल काफी व्यस्त है, लेकिन हंगामे के कारण कीमती समय बर्बाद हो रहा है:

  • पहला चरण: 13 फरवरी 2026 तक।

  • दूसरा चरण: 9 मार्च से 2 अप्रैल 2026 तक।

अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार राहुल गांधी को बोलने की अनुमति देकर इस गतिरोध को खत्म करेगी या फिर 13 फरवरी तक लोकसभा इसी तरह शोर-शराबे की भेंट चढ़ती रहेगी।

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