अमेरिका-ईरान डील का क्रेडिट लूटने चले पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय फजीहत! ट्रंप ने ऑनलाइन साइन कर शहबाज-मुनीर के PR स्टंट की निकाली हवा

पेरिस/इस्लामाबाद: अमेरिका और इस्लामी गणराज्य ईरान के बीच पिछले 107 दिनों से चले आ रहे भीषण युद्ध को समाप्त करने वाले ऐतिहासिक समझौते (MoU) पर आखिरकार मुहर लग गई है। इस शांति समझौते से जहां पूरी दुनिया ने राहत की सांस ली है, वहीं इस डील का पूरा क्रेडिट बटोरने की जल्दबाजी में पड़ोसी देश पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भयंकर कूटनीतिक शर्मिंदगी (Diplomatic Embarrassment) का सामना करना पड़ा है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और वहां के सैन्य प्रमुख (आर्मी चीफ) फील्ड मार्शल सैयद असीम मुनीर ने जिस भव्य ‘जिनेवा समारोह’ का ढिंढोरा पीटा था, ईरान और अमेरिका ने डिजिटल साइन (इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर) के जरिए उस पीआर (PR) स्टंट की हवा निकाल दी है।

बड़बोलापन पड़ा भारी: संसद में खड़े होकर शहबाज ने किया था भव्य मेजबानी का दावा

इस शांति वार्ता में मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभाने वाले पाकिस्तान ने इसे अपनी सदी की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत की तरह पेश करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बकायदा पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में खड़े होकर सीना ठोकते हुए एलान किया था कि आगामी 19 जून, 2026 को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर हस्ताक्षर के लिए एक भव्य अंतरराष्ट्रीय समारोह आयोजित होगा, जिसकी “मेजबानी” खुद पाकिस्तान करेगा। शहबाज शरीफ ने इसका पूरा सेहरा आर्मी चीफ असीम मुनीर के “असाधारण प्रयासों” के सिर बांध दिया था।

ईरान का करारा पलटवार: सरेआम खारिज किया पाकिस्तान का दावा

पाकिस्तान के इस घरेलू राजनीतिक प्रोपेगैंडा की पोल तब खुल गई, जब ईरान ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट कर दिया कि स्विट्जरलैंड या जिनेवा में ऐसा कोई भी औपचारिक या भव्य समारोह आयोजित नहीं होने जा रहा है। ईरान द्वारा सरेआम अपने दावों को खारिज किए जाने के बाद पाकिस्तान कूटनीतिक हलकों में अलग-थलग पड़ गया।

धूल झोंकने की कोशिश इस कदर नाकाम रही कि 18 जून यानी आज खुद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को सोशल मीडिया मंच ‘X’ पर आकर बेहद लाचारगी में सफाई देनी पड़ी कि ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ पर दोनों पक्षों ने इलेक्ट्रॉनिक (डिजिटल) रूप से हस्ताक्षर कर दिए हैं और यह तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

वर्साय महल में डिनर के दौरान ट्रंप ने किए दस्तखत, वीडियो वायरल

अंतरराष्ट्रीय मीडिया के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने सप्ताहांत में ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जे. डी. वेंस द्वारा इस समझौते पर डिजिटल हस्ताक्षर किए जाने की पुष्टि कर दी थी, लेकिन इसे बेहद गोपनीय रखा गया था।

  • कागजी प्रति पर भी हस्ताक्षर: फ्रांस में आयोजित जी7 (G7) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ वर्साय महल (Palace of Versailles) में रात्रिभोज के दौरान इस समझौते की कागजी प्रति पर भी आधिकारिक हस्ताक्षर कर दिए।

  • वीडियो आया सामने: व्हाइट हाउस के एक सहयोगी द्वारा ऑनलाइन साझा किए गए वीडियो में डोनाल्ड ट्रंप मैक्रों के बगल में बैठकर मुस्कुराते हुए साइन करते नजर आ रहे हैं। इसके बाद उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को वह ऐतिहासिक दस्तावेज और कलम सौंप दी। हस्ताक्षर करने के ठीक पहले ट्रंप ने कहा, “यह (समझौता कराना) बिल्कुल भी आसान नहीं था।”

  • ईरान के राष्ट्रपति की गंभीर मुद्रा: दूसरी तरफ, ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ‘आईआरएनए’ (IRNA) ने तेहरान से राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की तस्वीरें जारी कीं, जिसमें वे बेहद गंभीर मुद्रा में बैठकर इस समझौते पर हस्ताक्षर करते दिख रहे हैं।

क्या है इस ऐतिहासिक समझौते की असलियत और शर्तें?

भले ही आधिकारिक पाठ को कई दिनों तक बेहद गोपनीय रखा गया हो, लेकिन अमेरिकी और ईरानी मीडिया द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, इस समझौते के तहत युद्ध से पहले की यथास्थिति बहाल की जाएगी:

  • परमाणु कार्यक्रम पर रोक: तेहरान (ईरान) अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम (Highly Enriched Uranium) के वर्तमान भंडार को तेजी से कम करने पर सहमत हुआ है। वह अंतिम समझौते तक अपने परमाणु कार्यक्रम को वर्तमान स्तर पर ही फ्रीज रखेगा।

  • तेल निर्यात और प्रतिबंधों में छूट: इसके बदले में अमेरिका ईरान को अपने कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों को दुनिया भर में बिना किसी रोक-टोक के बेचने के लिए पूर्ण बैंकिंग और परिवहन छूट (Waivers) देगा।

  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का खुलना: वैश्विक व्यापार और ऊर्जा संकट को दूर करने के लिए दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) दोबारा वाणिज्यिक जहाजों के लिए खोल दिया जाएगा।

  • 60 दिनों की डेडलाइन: इस प्रारंभिक समझौते के लागू होने के साथ ही दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम के भविष्य को लेकर एक स्थायी और व्यापक अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए 60 दिनों की आधिकारिक वार्ता अवधि शुरू हो गई है।

अमेरिका में विरोध और इजराइल के पीएम नेतन्याहू को बड़ा झटका

इस समझौते को लेकर अमेरिका के भीतर ही डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा विरोध होने की पूरी संभावना जताई रही है, क्योंकि आलोचकों का मानना है कि अमेरिका ने ईरान को शुरुआत में ही बहुत ज्यादा रियायतें दे दी हैं, जबकि बदले में उसे बहुत कम हासिल हुआ है।

इसके अलावा, यह समझौता इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) के लिए एक बहुत बड़ा अंतरराष्ट्रीय झटका साबित हुआ है। नेतन्याहू का ईरान को पूरी तरह तबाह करने का सपना टूट गया है, जिसके चलते उन्हें अब इजराइली मीडिया, विपक्ष और अपने खुद के राजनीतिक सहयोगियों की भारी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

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