
लखनऊ/रामपुर: उत्तर प्रदेश की सियासत में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एक बड़ी कार्रवाई के बाद सियासी पारा अचानक सातवें आसमान पर पहुंच गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के कद्दावर नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान से जुड़े 10 से अधिक ठिकानों पर बुधवार सुबह केंद्रीय जांच एजेंसी ने एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू की। रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी, मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और आजम खान के करीबियों के परिसरों में चल रही इस जांच पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बेहद तल्ख तेवर अपनाए हैं। अखिलेश यादव ने इस छापेमारी को पूरी तरह से बदले की भावना से प्रेरित बताते हुए दावा किया कि सरकार केवल अपने एक से दो प्रतिशत संकीर्ण सोच वाले समर्थकों को संतुष्ट करने के लिए विपक्ष को निशाना बना रही है।
आजम खान के 10 ठिकानों पर ED की ताबड़तोड़ छापेमारी: क्या है पूरा मामला?
प्रवर्तन निदेशालय की अलग-अलग टीमों ने बुधवार तड़के दिल्ली, रामपुर और सहारनपुर समेत करीब 10 ठिकानों पर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया। ईडी की यह जांच मुख्य रूप से जौहर ट्रस्ट और विश्वविद्यालय निर्माण में संदिग्ध फंडिंग, बेनामी संपत्ति और धन के अवैध डायवर्जन से जुड़ी हुई है।
जांच अधिकारियों की टीम जौहर विश्वविद्यालय परिसर के प्रशासनिक भवनों, अकाउंट्स कार्यालयों और ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों के आवासों पर डिजिटल साक्ष्य, कंप्यूटर हार्ड डिस्क, बही-खाते और वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड खंगाल रही है। जौहर ट्रस्ट द्वारा विश्वविद्यालय निर्माण के लिए जुटाए गए करीब ₹494 करोड़ से अधिक के फंड का संतोषजनक ब्योरा न दे पाने और मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका के चलते यह व्यापक कार्रवाई की जा रही है।
‘2 परसेंट समर्थकों को खुश करने का सियासी खेल’ — अखिलेश यादव का बीजेपी पर सीधा हमला
आजम खान और उनकी यूनिवर्सिटी पर केंद्रीय एजेंसी की कार्रवाई की खबर मिलते ही सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक लंबा और आक्रामक बयान जारी किया। अखिलेश यादव ने सत्ता पक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि शिक्षा, शिक्षक और शिक्षार्थियों के विरोधी तथा स्कूल बंद करवाने वाले लोग आज एक शानदार यूनिवर्सिटी बनाने वाले नेता के खिलाफ सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग कर रहे हैं।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि राज्य और केंद्र की सत्ता में बैठे लोग वास्तविक भ्रष्टाचार पर पर्दा डालते हैं और केवल राजनीतिक प्रतिशोध के तहत विरोधी नेताओं को प्रताड़ित करते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के पास जनहित के मुद्दों पर बात करने के लिए कुछ नहीं बचा है, इसलिए वह अपने बचे हुए एक-दो प्रतिशत सांप्रदायिक, संकीर्ण सोच वाले और कुतर्की समर्थकों को खुश रखने के लिए इस तरह की कार्यवाहियां करवा रही है। सपा प्रमुख ने कहा कि यूनिवर्सिटी जैसे उच्च शिक्षण संस्थानों को बर्बाद करने की यह मानसिकता प्रदेश के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
सपा प्रमुख ने जारी की कथित घोटालों की लंबी सूची: एक्सप्रेसवे, महाकुंभ और स्मार्ट सिटी पर सवाल
अखिलेश यादव ने सिर्फ आजम खान के बचाव तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्होंने मौजूदा सरकार के कार्यकाल में हुए कई कथित घोटालों और खामियों की फेहरिस्त भी सार्वजनिक कर दी। अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि जब बात भ्रष्टाचार पर कार्रवाई की होती है, तो सत्ता संरक्षित आरोपियों पर बुलडोजर या जांच एजेंसियां क्यों खामोश हो जाती हैं?
सपा अध्यक्ष ने अपने बयान में अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे की खस्ताहाली, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के गड्ढों, ग्रीन कॉरिडोर में आई दरारों, ढहते पुलों और गिरती पानी की टंकियों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। इसके साथ ही उन्होंने महाकुंभ आयोजन में कथित तौर पर ठेकेदारों द्वारा भारी कमीशन डकारने और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स के नाम पर अरबों-खरबों रुपये के खेल का सीधा आरोप लगाया। अखिलेश ने यह भी दावा किया कि सत्ता से जुड़े अधिकारी आपत्तिजनक बयानों और आक्रामक प्रचार की आड़ में करीब ₹7,000 करोड़ के बंदरबांट में लगे हुए हैं।
जौहर ट्रस्ट और विदेशी फंडिंग का एंगल: क्यों लगातार बढ़ रही हैं आजम खान की मुश्किलें?
सीतापुर जेल में बंद रहे और कई कानूनी मुकदमों का सामना कर रहे आजम खान के लिए जौहर यूनिवर्सिटी का मामला लंबे समय से कानूनी सिरदर्द बना हुआ है। सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे, शत्रु संपत्ति को ट्रस्ट में मिलाने और विभिन्न स्रोतों से आए डोनेशन के दुरुपयोग को लेकर राज्य सरकार पहले ही कई एफआईआर दर्ज करा चुकी है।
प्रवर्तन निदेशालय की जांच मुख्य रूप से यह पता लगाने पर केंद्रित है कि यूनिवर्सिटी निर्माण के दौरान हवाला या मुखौटा (शेल) कंपनियों के माध्यम से किस तरह का लेन-देन हुआ था। एजेंसी के अधिकारियों का मानना है कि निर्माण कार्यों के लिए मिले सरकारी और गैर-सरकारी फंड का एक बड़ा हिस्सा निजी ट्रस्टों में भेजा गया। हालांकि, समाजवादी पार्टी का तर्क है कि आजम खान ने रामपुर जैसे पिछड़े इलाके में अल्पसंख्यक और वंचित वर्ग के बच्चों को आधुनिक शिक्षा देने के लिए एक विश्वस्तरीय संस्थान खड़ा किया था, जिसे राजनीतिक द्वेष के चलते नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है।
यूपी की सियासत में गरमाया ध्रुवीकरण: कोर वोटबैंक पर दबाव बनाने की रणनीति?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में आजम खान का कद हमेशा से मुस्लिम सियासत और समाजवादी पार्टी के कोर जनाधार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और रुहेलखंड में उनका सियासी प्रभाव जगजाहिर है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव का यह कड़ा और तत्काल सामने आया बयान न केवल आजम खान के प्रति सपा की एकजुटता को दर्शाता है, बल्कि अपने अल्पसंख्यक और पिछड़ा वर्ग (PDA) वोटबैंक को यह संदेश देने की कोशिश भी है कि पार्टी अपने नेताओं के साथ हर परिस्थिति में खड़ी है।
दूसरी तरफ, बीजेपी प्रवक्ताओं का कहना है कि जांच एजेंसियां न्यायालय और कानून के दायरे में स्वतंत्र रूप से अपना काम कर रही हैं। बीजेपी का तर्क है कि यदि किसी संस्थान या ट्रस्ट के निर्माण में जनता के पैसे का गबन हुआ है या काले धन का इस्तेमाल किया गया है, तो उसकी जांच होना स्वाभाविक है और इसे किसी जाति या समुदाय से जोड़ना पूरी तरह गलत है।
सियासी आरोप-प्रत्यारोप के बीच कानूनी प्रक्रिया जारी
रामपुर से लेकर लखनऊ तक फैली इस छापेमारी ने साफ कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में विपक्षी दलों और सत्ता पक्ष के बीच की सियासी जंग अब सीधे तौर पर जांच एजेंसियों के एक्शन और बयानों के टकराव के इर्द-गिर्द सिमट चुकी है। जहां जांच एजेंसियां अपनी कार्रवाई को वित्तीय अनियमितताओं की वैधानिक जांच बता रही हैं, वहीं समाजवादी पार्टी इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला और विपक्षी आवाजों को दबाने का जरिया करार दे रही है। इस तीखी बयानबाजी के बीच यह तय है कि आजम खान और जौहर यूनिवर्सिटी का मुद्दा आने वाले दिनों में यूपी की राजनीति को और अधिक गरमाएगा।
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