लखनऊ: उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े राजनीतिक कुनबे के सदस्य होने के बावजूद प्रतीक यादव ने अपनी एक अलग और आलीशान पहचान बनाई थी। मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे और अखिलेश यादव के भाई प्रतीक को उनकी सादगी से ज्यादा उनकी ‘रॉयल लाइफस्टाइल’ और ‘सुपर कार्स’ के प्रति उनके जुनून के लिए जाना जाता था। उनके आकस्मिक निधन के बाद सोशल मीडिया और गलियारों में उनके इसी राजसी अंदाज की चर्चा हो रही है।
लखनऊ की सड़कों पर जब दौड़ती थी ‘नीली लेम्बोर्गिनी’
प्रतीक यादव को लग्जरी कारों का जबरदस्त शौक था। उनके गैरेज की सबसे चर्चित गाड़ी लेम्बोर्गिनी हुराकन (Lamborghini Huracan) थी, जिसकी कीमत करीब 5 करोड़ रुपये से अधिक बताई जाती है। नीले रंग की इस सुपरकार में जब प्रतीक लखनऊ की सड़कों पर निकलते थे, तो लोग उन्हें देखते रह जाते थे।
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गाड़ियों का कलेक्शन: लेम्बोर्गिनी के अलावा उनके पास कई अन्य हाई-एंड विदेशी गाड़ियां और लग्जरी एसयूवी (SUVs) भी थीं।
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सुपरबाइक्स का शौक: कारों के साथ-साथ प्रतीक को महंगी और तेज रफ्तार सुपरबाइक्स का भी शौक था। वे अक्सर अपनी बाइक्स के साथ सोशल मीडिया पर फोटो साझा करते थे।
फिटनेस आइकन और ‘द फिटनेस प्लैनेट’
प्रतीक सिर्फ गाड़ियों के ही नहीं, बल्कि अपनी सेहत के प्रति भी बेहद सजग थे। उन्होंने अपनी फिटनेस को ही अपना बिजनेस बनाया।
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जिम के मालिक: लखनऊ के गोमती नगर में उनका ‘द फिटनेस प्लैनेट’ नाम का जिम है, जिसे शहर के सबसे बड़े और आधुनिक जिमों में गिना जाता है।
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प्रेरणा: वे अक्सर युवाओं को बॉडी बिल्डिंग और एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करते थे। उनका खुद का ‘ट्रांसफॉर्मेशन’ (मोटापे से मस्कुलर बॉडी तक) कई लोगों के लिए मिसाल था।
‘रॉयल’ शादी और स्कूल की दोस्ती
प्रतीक और अपर्णा यादव की शादी साल 2011 में हुई थी, जो उस समय की सबसे चर्चित शादियों में से एक थी।
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9वीं क्लास से दोस्ती: दोनों की मुलाकात स्कूल के दिनों में हुई थी जब वे 9वीं क्लास में थे।
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भव्य समारोह: उनकी शादी में तत्कालीन प्रधानमंत्री से लेकर बॉलीवुड के दिग्गज सितारे सैफई पहुंचे थे। प्रतीक और अपर्णा की केमिस्ट्री अक्सर राजनीतिक मतभेदों के बीच भी एक मिसाल के तौर पर देखी जाती थी।
लंदन से पढ़ाई और बेजुबानों से प्यार
प्रतीक यादव ने ब्रिटेन की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स से उच्च शिक्षा प्राप्त की थी। विदेश से लौटने के बाद उन्होंने राजनीति की जगह रियल एस्टेट और बिजनेस को चुना। उनके व्यक्तित्व का एक और पहलू उनका ‘पशु प्रेम’ था। वे ‘जीव आश्रय’ नाम की एक संस्था चलाते थे, जो बीमार और लावारिस कुत्तों की सेवा और इलाज का काम करती थी।
भले ही प्रतीक यादव ने कभी चुनावी मैदान में कदम नहीं रखा, लेकिन अपनी ‘किंग साइज’ जिंदगी और मिलनसार स्वभाव की वजह से वे हमेशा सुर्खियों में बने रहे। उनके निधन से यादव परिवार की उस चमक में एक बड़ी कमी आ गई है, जो अपनी जड़ों से जुड़े रहने के साथ-साथ आधुनिकता का भी प्रतिनिधित्व करती थी।
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