उत्तर प्रदेश की राजनीति में निषाद वोट बैंक पर कब्जे को लेकर अब ‘सन ऑफ मल्लाह’ और ‘डॉक्टर साहब’ के बीच सीधी जंग छिड़ गई है। बिहार की राजनीति में अपनी धमक दिखाने वाले विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के मुखिया मुकेश सहनी ने उत्तर प्रदेश में दस्तक दे दी है। मिर्जापुर पहुंचे सहनी ने योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें समाज का ‘गद्दार’ और ‘परिवारवादी’ करार दिया। इस सियासी हमले ने यूपी के पूर्वांचल से लेकर पश्चिम तक निषाद राजनीति में उबाल ला दिया है।
सत्ता की मलाई और मंदिर-मस्जिद में उलझे संजय निषाद: सहनी का वार
प्रेस वार्ता के दौरान मुकेश सहनी ने अपने पुराने साथी डॉ. संजय निषाद पर तीखे बाण छोड़े। सहनी ने कहा, “कभी हम और संजय एक साथ निषाद आरक्षण के लिए लड़ते थे, लेकिन सत्ता मिलते ही डॉक्टर साहब अपने रास्ते से भटक गए हैं। आज वे समाज की समस्याओं को छोड़कर मंदिर-मस्जिद के विवादों में उलझे हुए हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि संजय निषाद को अब केवल अपने बेटे के राजनीतिक भविष्य और सत्ता की मलाई की चिंता है, जबकि समाज आज भी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।
25 जुलाई से 101 दिनों की ‘संकल्प यात्रा’: गांव-गांव गूंजेगा नया नारा
मुकेश सहनी ने यूपी की सियासत में अपनी पैठ जमाने के लिए एक बड़ा मास्टरप्लान तैयार किया है। उन्होंने घोषणा की है कि आगामी 25 जुलाई को वीरांगना फूलन देवी के शहादत दिवस पर वे पूरे उत्तर प्रदेश में 101 दिनों की ‘संकल्प यात्रा’ शुरू करेंगे। सहनी ने एक नया और आक्रामक नारा दिया है: “आरक्षण नहीं तो गठबंधन नहीं, और गठबंधन नहीं तो भाजपा को वोट नहीं।” इस यात्रा के जरिए वे निषाद बहुल क्षेत्रों में जाकर समाज को भाजपा के खिलाफ लामबंद करने की तैयारी में हैं।
संजय निषाद को 6 महीने का अल्टीमेटम और इंडिया गठबंधन का ऑफर
बिहार के पूर्व मंत्री ने डॉ. संजय निषाद को खुली चेतावनी देते हुए 6 महीने का वक्त दिया है। सहनी ने कहा, “अगर संजय निषाद इस अवधि में समाज को आरक्षण दिला देते हैं, तो हम उनके साथ खड़े होंगे। लेकिन अगर वे विफल रहते हैं, तो उन्हें तुरंत भाजपा का साथ छोड़कर ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन में शामिल हो जाना चाहिए।” उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उनका एकमात्र लक्ष्य केंद्र की मोदी सरकार और यूपी की योगी सरकार को सत्ता से बेदखल करना है।
मिशन-2027 का शंखनाद: क्या बदलेगा निषाद वोटों का समीकरण?
सहनी ने स्पष्ट कर दिया है कि वे यूपी में सीटों या टिकटों की सौदेबाजी करने नहीं, बल्कि संगठन को मजबूत करने आए हैं। उन्होंने भाजपा शासित राज्यों में विकास की कमी का आरोप लगाते हुए 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अभी से बिगुल फूंक दिया है। हालांकि, 2022 के चुनाव में मुकेश सहनी को यूपी में कोई खास कामयाबी नहीं मिली थी और उल्टा बिहार में उनके विधायक भाजपा में शामिल हो गए थे, जिसके बाद उन्हें नीतीश कैबिनेट से बाहर होना पड़ा था। अब देखना यह है कि क्या 2026-27 के दौर में सहनी यूपी के निषाद वोट बैंक में सेंध लगा पाएंगे या संजय निषाद अपना किला बचाने में कामयाब रहेंगे।
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