सरदार पटेल ने कैसे जोड़ीं 562 रियासतें? अमित शाह ने बताया एकीकरण का इतिहास

भारत के प्रथम उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ‘लोह पुरुष’ सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के शुभ अवसर पर पूरा देश उन्हें शत-शत नमन कर रहा है। गुजरात के केवड़िया में स्थित दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के प्रांगण से ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्वतंत्र भारत के एकीकरण की उस महान ऐतिहासिक गाथा को बयां किया, जिसने आधुनिक भारत की नींव रखी। अमित शाह ने अपने तथ्यपरक भाषण में विस्तार से बताया कि कैसे आजादी के समय 562 से अधिक बिखरी हुई रियासतों को एक झंडे और एक संविधान के नीचे लाकर सरदार पटेल ने एक अखंड भारत का निर्माण किया। इसके साथ ही उन्होंने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सरदार पटेल की इस अद्वितीय और ऐतिहासिक उपलब्धि को दशकों तक दबाने और देश की जनता से छुपाने का काम किया गया, ताकि एक विशेष राजनीतिक परिवार की महत्ता बनी रहे।

अमित शाह ने अपने ऐतिहासिक संबोधन में कहा कि 15 अगस्त 1947 को जब देश आजाद हुआ, तो अंग्रेजों ने भारत को केवल विभाजित ही नहीं किया था, बल्कि देश के भीतर 562 से अधिक आजाद रियासतों का एक बहुत बड़ा टाइम बम भी फिट कर दिया था। ब्रिटिश हुकूमत ने राजा-रजवाड़ों को यह छूट दी थी कि वे चाहें तो भारत या पाकिस्तान में शामिल हों या खुद को पूरी तरह स्वतंत्र देश घोषित कर लें। ऐसे विकट और चुनौतीपूर्ण माहौल में सरदार पटेल ने कमान संभाली और अदम्य इच्छाशक्ति, बेहतरीन कूटनीति तथा जरूरत पड़ने पर कठोर फैसले लेकर सभी रियासतों को भारत संघ में शामिल कराया। त्रावणकोर, भोपाल, जोधपुर और उदयपुर जैसे रजवाड़ों को समझा-बुझाकर साथ लाने का काम बेहद नाजुक था। अमित शाह ने स्पष्ट किया कि सरदार पटेल की दूरदर्शिता ही थी कि भारत के टुकड़े-टुकड़े होने का अंग्रेजों का नापाक मंसूबा कभी कामयाब नहीं हो सका।

रियासतों के एकीकरण का जिक्र करते हुए गृह मंत्री ने जूनागढ़ और हैदराबाद (ऑपरेशन पोलो) के सैन्य अभियानों की कहानी भी देश के सामने रखी। जूनागढ़ का नवाब पाकिस्तान में शामिल होना चाहता था और हैदराबाद का निजाम अपनी अलग सत्ता का सपना देख रहा था। लेकिन सरदार पटेल ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और त्वरित सैन्य कार्रवाई (Police Action) के जरिए दोनों रियासतों को भारत का अभिन्न हिस्सा बना दिया। अमित शाह ने कहा कि जूनागढ़ में जनता के जनमत संग्रह और हैदराबाद में सेना के शौर्य के जरिए पटेल ने भारत की संप्रभुता को अक्षुण्ण रखा। इसी क्रम में उन्होंने कहा कि अगर कश्मीर के मुद्दे पर भी सरदार पटेल को पूरी आजादी दी गई होती और तत्कालीन सरकार द्वारा इस मामले को संयुक्त राष्ट्र (UN) में ले जाकर अटकाया न गया होता, तो आज जम्मू-कश्मीर की समस्या दशकों पहले ही खत्म हो चुकी होती।

अपने भाषण के दौरान अमित शाह ने मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि आजादी के बाद देश पर शासन करने वाली कांग्रेस सरकारों ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत सरदार पटेल के अतुलनीय योगदान को इतिहास की किताबों से गायब करने का प्रयास किया। गृह मंत्री ने कहा कि सरदार पटेल को भारत रत्न देने में दशकों की देरी की गई और उनके स्मारकों तथा विचारों को मुख्यधारा से दूर रखा गया। शाह ने दावा किया कि 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद ही सरदार पटेल को वह वास्तविक और सम्मानजनक स्थान वापस मिला जिसके वे हकदार थे। गुजरात के केवड़िया में स्थापित ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ आज न केवल विश्व का सबसे बड़ा पर्यटन और सांस्कृतिक केंद्र बन चुका है, बल्कि यह सरदार पटेल के प्रति पूरे देश की असीम कृतज्ञता का प्रतीक है।

अमित शाह ने कहा कि आज का मजबूत, सुरक्षित और तेजी से उभरता हुआ भारत सरदार पटेल के सपनों का ही भारत है। पटेल न केवल देश के भूगोल को जोड़ने वाले महापुरुष थे, बल्कि उन्होंने भारत की प्रशासनिक सेवा (IAS/IPS) का ढांचा तैयार कर देश को आंतरिक रूप से मजबूत बनाया। गृह मंत्री ने देश के युवाओं से आह्वान किया कि वे ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ पर केवल इतिहास को याद न करें, बल्कि भारत की एकता, अखंडता और आंतरिक सुरक्षा को बनाए रखने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि आज जब भारत 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनने के लक्ष्य की ओर अग्रसर है, तब सरदार पटेल के विचार और उनका दिखाया हुआ एकीकरण का मार्ग हर देशवासी के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा और प्रकाश पुंज का काम कर रहा है।

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