
सनातन परंपरा में भाई-बहन के अटूट स्नेह और सुरक्षा के संकल्प का महापर्व रक्षाबंधन हर वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2026 में रक्षाबंधन का यह पावन पर्व एक अत्यंत दुर्लभ और शक्तिशाली खगोलीय घटना के साए में आ रहा है, जब आकाश में चंद्र ग्रहण घटित होने जा रहा है। आमतौर पर ग्रहण के नाम से लोगों के मन में भय, अनिष्ट और सूतक काल को लेकर तमाम आशंकाएं पैदा हो जाती हैं। हालांकि, देश की जानी-मानी रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण का यह संयोग किसी अशुभ प्रभाव का नहीं, बल्कि भाई-बहन के भावनात्मक संबंधों को नई मजबूती देने और पुरानी कड़वाहट को हमेशा के लिए समाप्त करने का एक अलौकिक अवसर है।
डॉ. जय मदान का मानना है कि ब्रह्मांड में जब भी सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में आते हैं, तो ऊर्जा का प्रवाह असाधारण रूप से बढ़ जाता है। रक्षाबंधन के दिन इस ऊर्जा का सही उपयोग करके बिखरे हुए रिश्तों को फिर से जोड़ा जा सकता है और परिवार में सुख-शांति की पुनर्स्थापना की जा सकती है।
चंद्रमा, मन और रिश्तों का गहरा ज्योतिषीय नाता
वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को ‘मन सो जातः’ कहा गया है, जिसका सीधा अर्थ है कि चंद्रमा मनुष्य के मन, संवेदनाओं, भावनाओं, मानसिक शांति और माता-बहन के साथ संबंधों का प्रमुख कारक ग्रह है। जब पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं में होता है और उस पर ग्रहण की छाया पड़ती है, तो पृथ्वी पर रहने वाले सभी प्राणियों के अंतर्मन में छिपा भावनात्मक ज्वार सतह पर आ जाता है।
डॉ. जय मदान बताती हैं कि रक्षाबंधन केवल एक रेशमी धागा बांधने की रस्म नहीं है, बल्कि यह दो आत्माओं के बीच की ऊर्जा का आदान-प्रदान है। ग्रहण के समय चंद्रमा की ऊर्जा संवेदनशील होती है। यदि इस समय मन में प्रेम, करुणा, क्षमा और सुरक्षा की भावना रखी जाए, तो रिश्तों पर पड़ा नकारात्मक प्रभाव या वर्षों पुराना अहंकार स्वतः ही पिघल जाता है। यह संयोग भाई और बहन के बीच के उस अदृश्य बंधन को रीसेट और हील (उपचार) करने का एक ब्रह्मांडीय मौका प्रदान करता है।
सालों पुराने मनमुटाव और दूरियां मिटाने का स्वर्णिम अवसर
अक्सर देखा जाता है कि पारिवारिक व्यस्तताओं, संपत्ति के विवादों या छोटी-मोटी गलतफहमियों की वजह से सगे भाई-बहनों के बीच दूरियां आ जाती हैं। बातचीत बंद हो जाती है और त्योहारों पर भी केवल औपचारिकता रह जाती है। डॉ. जय मदान के अनुसार, रक्षाबंधन पर पड़ रहा चंद्र ग्रहण ऐसे सभी मनमुटावों को जड़ से खत्म करने के लिए सबसे प्रभावी दिन है।
ग्रहण के प्रभाव से जब भावनाएं अत्यधिक सक्रिय होती हैं, तब यदि बहन अपने भाई की कलाई पर प्रेमपूर्वक रक्षासूत्र बांधे और भाई अपनी बहन को सुरक्षा व सम्मान का वास्तविक भरोसा दे, तो दोनों के मन में बैठी कड़वाहट समाप्त हो जाती है। यह दिन क्षमा मांगने और क्षमा करने के लिए सर्वोत्तम माना गया है। यदि आपका भाई या बहन आपसे नाराज हैं, तो इस दिन केवल एक पहल आपके रिश्ते को पहले से भी अधिक गहरा और मधुर बना सकती है।
क्या ग्रहण के कारण बदलेगा राखी बांधने का समय? जानिए सूतक का सच
रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण की खबर सुनते ही हर किसी के मन में यह सवाल उठता है कि क्या राखी बांधने का समय बदलना पड़ेगा और क्या भारत में सूतक काल के नियम लागू होंगे।
ज्योतिषीय गणना और धर्मशास्त्रों के नियमों का हवाला देते हुए डॉ. जय मदान ने स्पष्ट किया है कि कोई भी ग्रहण धार्मिक रूप से तभी प्रभावी माना जाता है, जब वह संबंधित भौगोलिक क्षेत्र में नंगी आंखों से दिखाई दे। चूंकि 28 अगस्त 2026 को लगने वाला यह चंद्र ग्रहण भारत के आकाश में दृश्यमान नहीं है और यह उस समय घटित हो रहा है जब देश में दिन का उजाला रहेगा, इसलिए भारत में सूतक काल के कोई भी कड़े नियम लागू नहीं होंगे।
इसका अर्थ यह है कि:
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बहनों को किसी भी तरह के असमंजस या भय में रहने की आवश्यकता नहीं है।
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भारत में मंदिरों के कपाट बंद नहीं होंगे और दैनिक पूजा-अर्चना सामान्य रूप से जारी रहेगी।
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पूरे दिन में भद्रा काल को छोड़कर किसी भी शुभ चौघड़िया या स्थिर लग्न में राखी बांधी जा सकती है।
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ग्रहण की अदृश्यता के कारण भोजन बनाने, खाने या सामान्य दिनचर्या पर कोई शास्त्रीय प्रतिबंध नहीं रहेगा।
डॉ. जय मदान के 5 चमत्कारी उपाय: रिश्तों और भाग्य को चमकाएंगे ये टोटके
रक्षाबंधन के इस पावन अवसर पर ग्रहों की अनुकूलता और जीवन में सकारात्मकता लाने के लिए डॉ. जय मदान ने 5 विशेष ज्योतिषीय उपाय सुझाए हैं:
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1. चांदी के रक्षासूत्र या चांदी के सिक्के का प्रयोग: चंद्रमा का मुख्य धातु चांदी है। यदि बहन अपने भाई को चांदी का रक्षासूत्र बांधे या राखी के साथ चांदी का एक छोटा सा टुकड़ा/सिक्का भाई के हाथ में रखे, तो इससे भाई की कुंडली में चंद्र दोष शांत होता है और उसे मानसिक शांति व निर्णय लेने की सही क्षमता मिलती है।
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2. अक्षत और केसर का तिलक: राखी बांधते समय रोली में थोड़ा सा केसर और साबुत (अखंडित) अक्षत मिलाकर भाई के माथे पर तिलक लगाएं। केसर गुरु ग्रह का प्रतीक है और रोली सूर्य व मंगल का। यह तिलक भाई के पराक्रम, यश और मान-सम्मान में चार चांद लगाता है।
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3. सफेद मिठाई और जल का सेवन: राखी बांधने के तुरंत बाद भाई को मावे, रसगुल्ले या दूध से बनी सफेद मिठाई खिलाएं और उसे एक घूंट शुद्ध जल पिलाएं। यह उपाय दोनों के रिश्ते से कड़वाहट को दूर कर प्रेम रस घोलने का काम करता है।
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4. नजर उतारने की रस्म: चंद्र ग्रहण के दिन नकारात्मक ऊर्जा से बचाव के लिए राखी बांधने के बाद भाई के सिर से सात बार सूखा नारियल (गोला) या एक कपूर का टुकड़ा वारकर घर के बाहर दक्षिण दिशा में जला दें। इससे भाई पर आने वाले सभी संकट और नजर दोष दूर हो जाते हैं।
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5. बहन को हरे या पीले रंग के उपहार दें: भाई अपनी बहनों को उपहार देते समय काले या गहरे नीले रंग के वस्त्र देने से बचें। बहन को हरे (बुध ग्रह – बुद्धि व व्यापार) या पीले (गुरु ग्रह – ज्ञान व सौभाग्य) रंग के वस्त्र, आभूषण या पुस्तकें भेंट करें। ऐसा करने से भाई के व्यापार और नौकरी में तेजी से तरक्की होती है।
राशियों के अनुसार रक्षासूत्र का रंग: ग्रहों को मिलेगा महाबल
डॉ. जय मदान के अनुसार, यदि बहनें अपने भाई की राशि के अनुकूल रंग की राखी का चयन करें, तो ग्रहण के प्रभाव से भाई का भाग्य कई गुना चमक सकता है:
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मेष और वृश्चिक राशि: लाल, मैरून या नारंगी रंग का रक्षासूत्र बांधें। यह मंगल को बलवान बनाकर आत्मविश्वास बढ़ाता है।
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वृषभ और तुला राशि: रेशमी सफेद, सिल्वर या हल्के गुलाबी रंग की राखी बांधें। यह शुक्र और चंद्रमा को मजबूत कर ऐश्वर्य देता है।
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मिथुन और कन्या राशि: हरे रंग की या दूर्वा घास से सजी राखी बांधें। इससे कार्यक्षेत्र में बौद्धिक सफलता प्राप्त होगी।
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कर्क राशि: मोतियों वाली या शुद्ध सफेद व क्रीम रंग की राखी सर्वोत्तम रहेगी। यह मानसिक स्थिरता प्रदान करेगी।
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सिंह राशि: पीले, सुनहरे या केसरिया रंग की राखी बांधें। इससे समाज में नेतृत्व क्षमता और मान-सम्मान बढ़ेगा।
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धनु और मीन राशि: शुद्ध हल्दी के रंग वाली या गहरे पीले रंग की रेशमी राखी बांधें। यह गुरु ग्रह के आशीर्वाद से धन लाभ कराएगी।
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मकर और कुंभ राशि: नीले या जामुनी धागे वाली राखी बांधें, जिसमें थोड़ी रुद्राक्ष की माला या मोती पिरोया हो।
सकारात्मक संकल्प और वैदिक मंत्र के साथ बांधें रक्षासूत्र
रक्षाबंधन के दिन बहनों को पूरी श्रद्धा के साथ पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए और भाई का मुख उत्तर या ईशान कोण की तरफ होना चाहिए। रक्षासूत्र बांधते समय मन ही मन भगवान विष्णु और भगवान शिव का ध्यान करते हुए इस प्रसिद्ध वैदिक मंत्र का उच्चारण अवश्य करना चाहिए:
येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वां प्रतिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥
डॉ. जय मदान का कहना है कि जब आप पूरे भाव, विश्वास और सकारात्मक संकल्प के साथ यह रक्षासूत्र बांधते हैं, तो वह केवल एक धागा नहीं रहता, बल्कि एक आध्यात्मिक रक्षा कवच बन जाता है जो पूरे वर्ष आपके भाई को हर संकट, बीमारी और नकारात्मकता से सुरक्षित रखता है।
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