
हम में से लगभग हर इंसान ने कभी न कभी सिर दर्द, दांत दर्द, कमर के खिंचाव या पैर में लगी चोट से राहत पाने के लिए पेन किलर (Painkiller) की गोली जरूर खाई होगी। पानी के साथ एक छोटी सी गोली गले से नीचे उतरती है और अगले 20 से 30 मिनट के भीतर उस विशेष हिस्से की असहनीय टीस गायब हो जाती है। यह प्रक्रिया देखने में जितनी सामान्य लगती है, इंसानी दिमाग में उतना ही गहरा कौतूहल पैदा करती है कि आखिर पेट में गई इस बेजान गोली को यह कैसे पता चल जाता है कि दर्द अंगूठे में हो रहा है, कमर में या फिर सिर की नसों में? क्या पेन किलर के भीतर कोई आंतरिक रडार, जीपीएस (GPS) या खुफिया सेंसर लगा होता है जो सीधे चोट वाली जगह पर जाकर हमला करता है? चिकित्सा विज्ञान और फार्माकोलॉजी (औषध विज्ञान) के अनुसार, इसका उत्तर बेहद दिलचस्प और पूरी तरह से मानव शरीर के जटिल रासायनिक तंत्र पर आधारित है। सच्चाई यह है कि पेन किलर को बिल्कुल नहीं पता होता कि दर्द कहां है, बल्कि वह पूरे शरीर में एक साथ काम करती है।
दर्द का अलार्म: शरीर में कैसे पैदा होता है दर्द का सिग्नल?
पेन किलर के काम करने के तरीके को समझने से पहले यह जानना जरूरी है कि इंसानी शरीर में दर्द वास्तव में पैदा कैसे होता है। जब भी शरीर के किसी हिस्से में चोट लगती है, कट लगता है, सूजन आती है या मांसपेशियों में खिंचाव होता है, तो उस हिस्से की क्षतिग्रस्त कोशिकाएं (Damaged Cells) तुरंत एक विशेष रासायनिक प्रक्रिया शुरू कर देती हैं।
क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की झिल्ली से ‘एराकिडोनिक एसिड’ (Arachidonic Acid) नामक फैटी एसिड निकलता है। इस एसिड को हमारे शरीर में मौजूद विशेष एंजाइम—जिन्हें साइक्लोऑक्सीजिनेज-1 और साइक्लोऑक्सीजिनेज-2 (COX-1 और COX-2) कहा जाता है—’प्रोस्टाग्लैंडिन्स’ (Prostaglandins) नामक हार्मोन जैसे रसायनों में बदल देते हैं। यह प्रोस्टाग्लैंडिन ही दर्द का असली संदेशवाहक होता है। यह उस चोटिल जगह पर मौजूद दर्द संवेदी तंत्रिकाओं (Nociceptors) को उत्तेजित कर देता है। ये नसें तुरंत रीढ़ की हड्डी के रास्ते दिमाग (ब्रेन) तक विद्युत संकेत (इलेक्ट्रिकल सिग्नल्स) भेजती हैं। जब दिमाग इन संकेतों को पढ़ता है, तब हमें उस खास जगह पर ‘दर्द’ और जलन का अहसास होता है।
क्या दवा में कोई जीपीएस होता है? जानिए पेट से खून तक का सफर
आम धारणा के विपरीत, जब आप पेन किलर की गोली निगलते हैं, तो वह सीधे आपके दर्द वाले हिस्से की ओर दौड़ नहीं लगाती। गोली सबसे पहले आपके आमाशय (Stomach) और फिर छोटी आंत (Small Intestine) में पहुंचती है।
वहां पेट के पाचक रस और एसिड उस गोली को तोड़कर घोल देते हैं। इसके बाद आंतों की दीवारों में मौजूद सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं (Blood Capillaries) के जरिए दवा के सक्रिय तत्व अवशोषित होकर लीवर (यकृत) से गुजरते हुए पूरे रक्त परिसंचरण तंत्र (Systemic Blood Circulation) में मिल जाते हैं। एक बार जब दवा खून में घुल जाती है, तो दिल उसे पंप करके पूरे शरीर के हर एक हिस्से—सिर के बालों की जड़ों से लेकर पैर के नाखूनों तक, हर जीवित कोशिका तक पहुंचा देता है। यानी दवा केवल दर्द वाली जगह पर नहीं, बल्कि आपके पूरे शरीर में एक साथ समान रूप से तैर रही होती है।
प्रोस्टाग्लैंडिन्स का उत्पादन रोकना: दवा का सटीक वार
जब खून के जरिए दवा पूरे शरीर में घूमती है, तो वह उन सभी जगहों पर पहुंचती है जहां COX-1 और COX-2 एंजाइम मौजूद होते हैं। अधिकांश सामान्य दर्द निवारक दवाएं, जिन्हें नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (NSAIDs) कहा जाता है—जैसे इबुप्रोफेन (Ibuprofen), डिक्लोफेनाक (Diclofenac), एस्पिरिन (Aspirin) और नेप्रोक्सन (Naproxen)—इन COX एंजाइमों की रासायनिक गतिविधि को सीधे ब्लॉक (अवरुद्ध) कर देती हैं।
इसे एक ताले और चाबी के उदाहरण से समझा जा सकता है। COX एंजाइम वह ताला है जो प्रोस्टाग्लैंडिन रूपी दर्द का दरवाजा खोलता है। पेन किलर के अणु उस ताले में जाकर फंस जाते हैं, जिससे एंजाइम काम करना बंद कर देता है। जब COX एंजाइम ब्लॉक हो जाता है, तो चोट वाली जगह पर प्रोस्टाग्लैंडिन का नया उत्पादन तुरंत रुक जाता है। जैसे ही प्रोस्टाग्लैंडिन बनना बंद होता है, वहां की नसों को मिलने वाली उत्तेजना शांत हो जाती है। जब नसें दिमाग को ‘दर्द’ का सिग्नल भेजना बंद कर देती हैं, तो दिमाग को लगता है कि दर्द खत्म हो गया है। दवा ने चोट को ठीक नहीं किया, बल्कि उसने केवल दिमाग तक पहुंचने वाले अलार्म के तार को अस्थाई रूप से काट दिया।
अलग-अलग प्रकार के पेन किलर और उनके काम करने का अनोखा अंदाज
चिकित्सा जगत में उपयोग किए जाने वाले दर्द निवारक केवल एक ही तरीके से काम नहीं करते, बल्कि उनकी श्रेणियां और क्रियाविधि अलग-अलग होती हैं:
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NSAIDs (आईबुप्रोफेन, डिक्लोफेनाक आदि): ये दवाएं सीधे तौर पर चोटिल ऊतकों में सूजन, लाली और प्रोस्टाग्लैंडिन उत्पादन को कम करके परिधीय स्तर (Peripheral Level) पर काम करती हैं।
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पैरासिटामोल (एसिटामिनोफेन): यह दुनिया में सबसे ज्यादा खाई जाने वाली दवा है। यह चोट वाली जगह पर सूजन कम नहीं करती, बल्कि यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (दिमाग और रीढ़ की हड्डी) में जाकर दर्द और बुखार को नियंत्रित करने वाले सिग्नल्स को दबाती है। यह दिमाग में दर्द के प्रति संवेदनशीलता की सीमा (Pain Threshold) को बढ़ा देती है।
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ओपिओइड्स (Opioids जैसे ट्रामाडोल, मॉर्फिन, कोडीन): ये बेहद तीव्र और असहनीय दर्द (जैसे सर्जरी या कैंसर के दर्द) में दी जाने वाली भारी दवाएं हैं। ये दिमाग और स्पाइनल कॉर्ड में मौजूद ‘ओपिओइड रिसेप्टर्स’ से चिपक जाती हैं और दिमाग को दर्द महसूस करने से पूरी तरह सुन्न कर देती हैं, जिससे मरीज को एक शांत और दर्द-मुक्त अवस्था का अहसास होता है।
पूरे शरीर में जाती है दवा, तो असर सिर्फ दर्द वाली जगह ही क्यों?
यह सवाल लाजिमी है कि जब दवा पूरे शरीर के हर अंग में पहुंचती है, तो हमें केवल दर्द वाली जगह पर ही आराम क्यों महसूस होता है? इसका जवाब यह है कि शरीर के जो हिस्से पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित हैं, वहां पहले से कोई रासायनिक गड़बड़ी या प्रोस्टाग्लैंडिन का निर्माण नहीं हो रहा होता है।
स्वस्थ अंगों की नसें दिमाग को दर्द का कोई सिग्नल नहीं भेज रही होती हैं, इसलिए वहां दवा के पहुंचने से कोई खास बदलाव महसूस नहीं होता। लेकिन जिस जगह पर ऊतक क्षतिग्रस्त हैं और प्रोस्टाग्लैंडिन की भारी मात्रा नसों को उत्तेजित कर रही है, वहां जैसे ही दवा उत्पादन को रोकती है, उसका राहत भरा प्रभाव तुरंत स्पष्ट रूप से सामने आ जाता है।
सिस्टमिक फैलाव के साइड इफेक्ट्स: अंधाधुंध पेन किलर खाने के खतरे
क्योंकि पेन किलर केवल दर्द वाली जगह पर नहीं रुकती बल्कि पूरे शरीर में फैलती है, यही इसकी सबसे बड़ी कमजोरी और खतरे की वजह भी बनती है। COX-1 एंजाइम केवल दर्द पैदा करने के लिए नहीं होता, बल्कि यह हमारे पेट की आंतरिक परत (म्यूकोसा) को एसिड से बचाने और किडनी में रक्त प्रवाह को सुचारू रखने के लिए बेहद जरूरी प्रोस्टाग्लैंडिन्स भी बनाता है।
जब कोई व्यक्ति बिना डॉक्टर की सलाह के लगातार या लंबे समय तक तेज पेन किलर खाता है, तो शरीर में पेट की सुरक्षा करने वाले प्रोस्टाग्लैंडिन्स भी नष्ट हो जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप पेट में गंभीर गैस, एसिडिटी, पेट के छाले (गैस्ट्रिक अल्सर), आंतों से आंतरिक रक्तस्राव (ब्लडिंग) और लंबे समय में गुर्दे की खराबी (किडनी फेलियर) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसी तरह, लीवर पैरासिटामोल के अत्यधिक ओवरडोज से स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो सकता है।
दर्द निवारक दवाओं के सुरक्षित उपयोग के लिए डॉक्टरों की जरूरी सलाह
दर्द शरीर का एक रक्षात्मक संकेत है जो यह बताता है कि भीतर कुछ गलत हुआ है। दर्द के मूल कारण का इलाज किए बिना केवल पेन किलर खाकर उसे दबाना खतरनाक हो सकता है। सुरक्षित स्वास्थ्य के लिए इन नियमों का पालन करना अनिवार्य है:
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खाली पेट पेन किलर न लें: हमेशा भोजन या हल्के नाश्ते के बाद ही दर्द निवारक दवा का सेवन करें ताकि पेट की परत पर सीधा बुरा असर न पड़े।
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स्वयं डॉक्टर न बनें (नो सेल्फ-मेडिकेशन): हल्के दर्द में तुरंत हैवी पेन किलर खाने से बचें। डॉक्टर की लिखित सलाह के बिना 3 दिन से अधिक समय तक लगातार दवा न लें।
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पर्याप्त पानी पिएं: दवा लेने के दौरान भरपूर पानी पिएं ताकि दवा के अवशेष किडनी के जरिए आसानी से बाहर निकल सकें।
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शराब के साथ कभी न लें: पेन किलर या पैरासिटामोल के साथ शराब का सेवन लीवर और आंतों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
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