कल पूरे दिन रहेगा पंचक, भूलकर भी राहुकाल में न बांधें राखी; जानें सुबह से लेकर शाम तक के सबसे सटीक और दोषमुक्त शुभ मुहूर्त

भाई-बहन के अटूट विश्वास, असीम प्रेम और सुरक्षा के महापर्व रक्षाबंधन को लेकर देशभर में उत्साह का माहौल है। सावन पूर्णिमा की पावन तिथि पर जहां एक ओर बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र और समृद्धि की कामना के साथ रक्षा सूत्र बांधने की तैयारियां कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर पंचांग के अनुसार कल पूरे दिन पंचक का प्रभाव रहने वाला है। शास्त्रों में पंचक को लेकर कई नियम बताए गए हैं, जिसके चलते बहुत से श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या पंचक के दौरान भाई की कलाई पर राखी बांधी जा सकती है या नहीं। इसके साथ ही, किसी भी मांगलिक और धार्मिक कार्य में ‘राहुकाल’ का विचार करना अनिवार्य माना जाता है, क्योंकि राहुकाल में किया गया कोई भी शुभ अनुष्ठान निष्फल या विघ्नकारी हो सकता है। ऐसे में यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि कल पूरे दिन में राहुकाल की अवधि क्या रहेगी और कौन-से ऐसे मुहूर्त हैं जो पूरी तरह से दोषमुक्त, अमृतमय और मंगलकारी हैं।

कल पूरे दिन पंचक: क्या पंचक में राखी बांधना शुभ है या अशुभ? जानिए शास्त्रों का मत

ज्योतिष शास्त्र में जब चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र में गोचर करता है, तो उस पांच दिनों की अवधि को ‘पंचक’ कहा जाता है। लोक परंपराओं में पंचक को लेकर कई तरह के भ्रम और भ्रांतियां फैली हुई हैं। धर्मसिंधु और निर्णयसिंधु जैसे प्रामाणिक ज्योतिष ग्रंथों के अनुसार, पंचक में केवल पांच विशिष्ट सांसारिक कार्यों की मनाही होती है: दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करना, मकान की छत डालना, नया पलंग या चारपाई बनवाना, तृण व काष्ठ (लकड़ी व घास) एकत्र करना और दाह संस्कार के समय विशेष शांति विधान न करना।

त्योहार मनाने, पूजा-पाठ करने, भाई-बहन के पवित्र रक्षाबंधन अनुष्ठान, तिलक लगाने और आशीर्वाद लेने में पंचक का कोई भी नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है। रक्षाबंधन एक सात्विक, आत्मिक और कल्याणकारी पारिवारिक पर्व है, जिसे पंचक दोष बिल्कुल भी दूषित नहीं करता। इसलिए किसी भी संशय या भय में पड़े बिना कल पूरे दिन उत्साहपूर्वक रक्षाबंधन मनाया जा सकता है।

राहुकाल का अशुभ समय: इस अवधि में भूलकर भी न बांधें रक्षा सूत्र

वैदिक ज्योतिष में राहु को एक क्रूर और छाया ग्रह माना गया है। दिन के 24 घंटों में से लगभग डेढ़ घंटे का समय राहुकाल कहलाता है, जिसका स्वामी राहु होता है। शास्त्रों का स्पष्ट निर्देश है कि राहुकाल की अवधि में कोई भी नया कार्य, पूजन अनुष्ठान, रक्षा सूत्र बांधना, यात्रा आरंभ करना या शुभ संकल्प लेना वर्जित होता है। राहुकाल में बांधी गई राखी से रिश्तों में तनाव, कार्यों में रुकावट और मानसिक अशांति आने की आशंका रहती है।

कल शुक्रवार के दिन पंचांग के अनुसार राहुकाल का समय सामान्यतः पूर्वाह्न 10:30 बजे से लेकर दोपहर 12:00 बजे (स्थान भेद के अनुसार कुछ मिनटों का अंतर संभव) तक रहेगा। बहनों को विशेष रूप से यह ध्यान रखना चाहिए कि इस डेढ़ घंटे की समयावधि में राखी बांधने का कोई भी अनुष्ठान न करें। राहुकाल समाप्त होने के बाद ही पूजा की थाली से भाई को तिलक करें और कलाई पर रक्षा सूत्र बांधें।

राहुकाल रहित राखी बांधने के सर्वश्रेष्ठ शुभ मुहूर्त: सुबह, दोपहर और शाम

कल पूरे दिन पूर्णिमा तिथि और शुभ नक्षत्रों का सुंदर योग बना रहेगा। राहुकाल की अवधि को छोड़कर आप अपनी सुविधानुसार निम्नलिखित श्रेष्ठ चौघड़िया और लग्न मुहूर्तों में राखी बांध सकते हैं:

  • प्रातःकालीन अमृत व शुभ मुहूर्त: सुबह 06:00 बजे से लेकर सुबह 09:15 बजे तक रहेगा। जो लोग सुबह के शांत और सात्विक वातावरण में पूजा-पाठ संपन्न करना चाहते हैं, उनके लिए यह समय सर्वोत्तम और अमृत फलदायी है।

  • पूर्वाह्न का शुभ मुहूर्त (राहुकाल से पहले): सुबह 09:15 बजे से सुबह 10:30 बजे तक चर और लाभ का चौघड़िया रहेगा, जो रक्षा सूत्र बांधने के लिए अत्यंत अनुकूल है।

  • दोपहर का सर्वश्रेष्ठ ‘अभिजीत मुहूर्त’: दोपहर 11:58 बजे से लेकर दोपहर 12:48 बजे तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा। ज्योतिष में अभिजीत मुहूर्त को स्वयं भगवान विष्णु का चक्र माना गया है, जो संसार के सभी दोषों को नष्ट कर देता है। राहुकाल समाप्त होते ही अभिजीत मुहूर्त में राखी बांधना सबसे अधिक मंगलकारी सिद्ध होगा।

  • अपराह्न (दोपहर बाद) का शुभ समय: दोपहर 01:45 बजे से लेकर दोपहर 03:30 बजे तक लाभ का चौघड़िया रहेगा, जिसमें दूर-दराज से आने वाले भाई-बहन आसानी से रक्षाबंधन मना सकते हैं।

  • शाम का प्रदोष व गोधूलि वेला मुहूर्त: शाम 05:00 बजे से लेकर शाम 06:45 बजे तक चर व लाभ का मुहूर्त रहेगा। सूर्यास्त के समय प्रदोष काल में रक्षा सूत्र बांधने से भाई की दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य का वरदान मिलता है।

भद्रा और ग्रहण के संशय से मुक्ति: कल का दिन क्यों है सबसे पावन?

रक्षाबंधन के पर्व पर अक्सर भद्रा का साया सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आता है, क्योंकि भद्रा काल में राखी बांधना पूर्णतः निषेध माना गया है। राहत की बात यह है कि कल भद्रा का कोई भी प्रभाव नहीं रहेगा, क्योंकि भद्रा पूर्व में ही समाप्त हो चुकी होगी। इसके अलावा, पूर्णिमा पर लगने वाले आंशिक चंद्र ग्रहण का सूतक काल भी भारत में दृश्य न होने के कारण पूरी तरह शून्य और अमान्य है। इसका अर्थ यह है कि कल का दिन भद्रा मुक्त और ग्रहण दोष मुक्त है। केवल दिन के डेढ़ घंटे के राहुकाल का ध्यान रखकर पूरे दिन निश्चिंत भाव से रक्षाबंधन का पर्व मनाया जा सकता है।

राखी बांधने की शास्त्रीय विधि और नियमों का पालन

रक्षाबंधन का पर्व केवल एक धागा बांधने का औपचारिकता मात्र नहीं है, बल्कि यह एक सूक्ष्म आध्यात्मिक सुरक्षा कवच है। पूजा आरंभ करने से पहले तांबे या चांदी की थाली में शुद्ध रोली, अक्षत (अटूट चावल), पीला चंदन, दीपक, रक्षा सूत्र और ताजी मिठाइयां सजाएं। साथ ही एक नारियल (श्रीफल) भी रखें।

भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बिठाएं। दक्षिण दिशा को यम की दिशा माना गया है, इसलिए दक्षिण मुखी होकर कभी भी राखी नहीं बंधवानी चाहिए। सर्वप्रथम भाई के आज्ञा चक्र (माथे) पर चंदन और रोली का तिलक लगाएं और उस पर अक्षत चिपकाएं। अक्षत अखंडता और विजय का प्रतीक है। इसके बाद भाई की दाहिनी कलाई पर तीन गांठें लगाते हुए रक्षा सूत्र बांधें। ये तीन गांठें ब्रह्मा, विष्णु और महेश के आशीर्वाद का प्रतीक हैं। इसके पश्चात घी के दीपक से भाई की नजर उतारते हुए आरती करें और मिठाई खिलाकर मुंह मीठा कराएं। भाई को चाहिए कि वह अपनी बहन के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद ले और आजीवन उसकी रक्षा व सम्मान का संकल्प लेते हुए सामर्थ्य अनुसार उपहार भेंट करे।

राखी बांधते समय इस शक्तिशाली रक्षा मंत्र का करें जाप

शास्त्रों में बताया गया है कि जब बहन भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है, तब यदि वह वैदिक रक्षा मंत्र का पाठ करे तो उस धागे में अद्भुत सकारात्मक ऊर्जा और देवकृपा का संचार हो जाता है:

येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥

इस मंत्र का अर्थ है कि जिस पावन रक्षा सूत्र से महाबली दानवराज राजा बलि को धर्म और रक्षा के बंधन में बांधा गया था, उसी पवित्र रक्षा सूत्र से मैं तुम्हारी कलाई पर रक्षा बंधन बांधती हूं। हे रक्षा सूत्र! तुम स्थिर रहना और अपने रक्षा के संकल्प से कभी विचलित मत होना।

पंचक और ग्रह दोषों को दूर करने के लिए करें ये सरल उपाय

रक्षाबंधन के दिन भाई-बहन दोनों के जीवन में खुशहाली और नवग्रहों की अनुकूलता बनी रहे, इसके लिए कुछ सरल उपाय किए जा सकते हैं। सुबह स्नान के पश्चात भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा करें और शिवलिंग पर कच्चा दूध व बेलपत्र अर्पित करें। राखी का पहला रक्षा सूत्र घर के मंदिर में भगवान श्री गणेश या भगवान श्री कृष्ण को अर्पित करें। ऐसा करने से घर के सभी वास्तु दोष, पंचक की आशंकाएं और राहु-केतु के अशुभ प्रभाव स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं और परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।

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