
क्रिकेट के मैदान पर दशकों तक भारत और पाकिस्तान के बीच कट्टर प्रतिद्वंद्विता के साक्षी रहे 1983 विश्व कप विजेता कप्तान कपिल देव और महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने सीमाओं और राजनीतिक तनावों से परे जाकर एक मिसाल पेश की है। रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और 1992 विश्व कप विजेता कप्तान इमरान खान की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कानूनी अधिकारों को लेकर भारतीय क्रिकेट के इन दोनों पुरोधाओं ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के समक्ष अपनी गहरी चिंता दर्ज कराई है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत के अन्य दिग्गज कप्तानों के साथ मिलकर हस्ताक्षरित एक संयुक्त अपील में गावस्कर और कपिल देव ने स्पष्ट किया है कि भले ही राजनीतिक परिस्थितियां कुछ भी हों, लेकिन एक वैश्विक खेल नायक, पूर्व राष्ट्राध्यक्ष और साथी खिलाड़ी के बुनियादी मानवाधिकारों व गरिमा से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
इमरान खान की सलामती के लिए भारतीय दिग्गजों की आवाज: क्या है पूरा मामला?
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान पिछले काफी समय से कई राजनीतिक व कानूनी मामलों के चलते जेल में बंद हैं। हाल के हफ्तों में उनके परिवार, वकीलों और पार्टी नेताओं द्वारा यह दावा किया गया कि जेल प्रशासन द्वारा उन्हें एकांत कारावास में रखा जा रहा है, बुनियादी मानवीय सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है और उनके स्वास्थ्य की नियमित जांच नहीं हो पा रही है।
जब यह मामला अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आया, तो विश्व भर के पूर्व क्रिकेटरों और खेल हस्तियों ने एकजुटता दिखाते हुए एक साझा मंच तैयार किया। भारत की ओर से ‘लिटिल मास्टर’ सुनील गावस्कर और ‘हरियाणा हरिकेन’ कपिल देव ने इस पत्र पर हस्ताक्षर कर यह संदेश दिया कि खेल की दुनिया अपने नायकों को कभी बेसहारा नहीं छोड़ती। यह पहली बार है जब भारत के दो सबसे बड़े जीवित क्रिकेट लीजेंड्स ने पाकिस्तान के आंतरिक राजनीतिक परिदृश्य में मानवीय आधार पर इतना स्पष्ट और साहसिक हस्तक्षेप किया है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से की गई 3 प्रमुख मांगें
सुनील गावस्कर, कपिल देव और अंतरराष्ट्रीय खेल दिग्गजों द्वारा पाकिस्तान के मौजूदा प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को भेजे गए आधिकारिक पत्र में मुख्य रूप से 3 अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण मांगें रखी गई हैं:
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उचित चिकित्सा सुविधा और निजी डॉक्टरों तक पहुंच: पत्र में सबसे पहली और अहम मांग यह उठाई गई है कि 70 पार कर चुके इमरान खान को जेल के भीतर चौबीसों घंटे विशेषज्ञ चिकित्सा निगरानी प्रदान की जाए। इसके साथ ही उनके पारिवारिक चिकित्सकों और स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड को उनकी नियमित जांच और इलाज की अनुमति दी जानी चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की चिकित्सीय लापरवाही न हो सके।
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पारदर्शी कानूनी प्रक्रिया और मानवाधिकारों की रक्षा: दूसरी मांग के तहत अपील की गई है कि इमरान खान के खिलाफ चल रहे सभी कानूनी मामलों में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप निष्पक्ष, पारदर्शी और त्वरित न्यायिक प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए। राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से परे हटकर उनके साथ अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संधियों और पाकिस्तानी संविधान के तहत एक पूर्व प्रधानमंत्री के अनुरूप मानवीय व्यवहार किया जाए।
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परिवार और कानूनी सलाहकारों से नियमित व सुरक्षित मुलाकात: तीसरी प्रमुख मांग में यह रेखांकित किया गया है कि इमरान खान को एकांत कारावास (Solitary Confinement) के मानसिक तनाव से दूर रखा जाए और उनके परिवार के सदस्यों, करीबी रिश्तेदारों तथा कानूनी सलाहकारों से मिलने के बुनियादी अधिकारों पर लगी अघोषित पाबंदियों को तत्काल हटाया जाए।
1980 के दशक की प्रतिद्वंद्विता और मैदान की सच्ची दोस्ती
सुनील गावस्कर, कपिल देव और इमरान खान का संबंध 1970 और 1980 के दशक के उस दौर से है जब भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मुकाबला दुनिया का सबसे बड़ा खेल उत्सव माना जाता था। मैदान पर इमरान खान की आक्रामक इनस्विंग यॉर्कर्स के सामने गावस्कर का अभेद्य डिफेंस और कपिल देव के साथ इमरान की ऑलराउंडर श्रेष्ठता की होड़ ने क्रिकेट इतिहास के सबसे स्वर्णिम अध्याय लिखे।
1987 में जब सुनील गावस्कर ने संन्यास लेने का मन बनाया था, तो यह इमरान खान ही थे जिन्होंने गावस्कर को व्यक्तिगत रूप से फोन कर भारत के पाकिस्तान दौरे तक अपना फैसला टालने का अनुरोध किया था। इसी तरह 1992 विश्व कप जीत के बाद जब इमरान खान ने शौकत खानम कैंसर अस्पताल की नींव रखी थी, तब भी भारतीय क्रिकेटरों ने उनके इस मानवीय कार्य की खुले दिल से सराहना की थी। कपिल देव और गावस्कर का यह ताजा कदम उसी आधी सदी पुरानी खेल भावना और आपसी सम्मान की जीवंत अभिव्यक्ति है।
अदियाला जेल की परिस्थितियों पर अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में चिंता
रावलपिंडी की उच्च सुरक्षा वाली अदियाला जेल में इमरान खान की स्थिति को लेकर केवल भारतीय दिग्गज ही नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, वेस्टइंडीज और दक्षिण अफ्रीका के कई पूर्व कप्तान भी अपनी आवाज उठा चुके हैं। खेल जगत का मानना है कि खेल के मैदान में अपना पूरा यौवन खपाने वाले और दुनिया भर के करोड़ों युवाओं को प्रेरित करने वाले एथलीट के साथ किसी भी देश में अमानवीय व्यवहार नहीं होना चाहिए।
पत्र में यह भी याद दिलाया गया है कि इमरान खान केवल एक राजनेता नहीं हैं, बल्कि वे ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के पूर्व चांसलर, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट हॉल ऑफ फेम के सदस्य और क्रिकेट के सर्वकालिक महान ऑलराउंडरों में से एक हैं। किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र के लिए यह आवश्यक है कि वह अपने वैश्विक प्रतीकों के प्रति प्रतिशोध की भावना त्यागकर गरिमापूर्ण आचरण प्रदर्शित करे।
क्रिकेट डिप्लोमेसी और राजनीतिक सीमाओं से परे एकजुटता का संदेश
भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले कई वर्षों से द्विपक्षीय क्रिकेट संबंध पूरी तरह ठप हैं और दोनों टीमें केवल आईसीसी या एशियन क्रिकेट काउंसिल के बहुपक्षीय टूर्नामेंटों में ही आमने-सामने होती हैं। ऐसे जटिल भू-राजनीतिक माहौल में भारतीय क्रिकेट के शीर्ष चेहरों का यह स्टैंड दोनों देशों के खेल प्रेमियों के बीच एक सकारात्मक और भावुक चर्चा का विषय बन गया है।
सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के आम नागरिकों, खेल पत्रकारों और क्रिकेट फैंस ने गावस्कर और कपिल देव के इस कदम की दिल खोलकर सराहना की है। लोगों का कहना है कि जहां राजनीति लोगों को बांटती है, वहीं खेल और उसके सच्चे दूत हमेशा मानवता और न्याय के पक्ष में खड़े होकर दिलों को जोड़ने का काम करते हैं।
पाकिस्तान सरकार का संभावित रुख और आगे का घटनाक्रम
इस्लामाबाद के कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय खेल जगत और खासकर भारतीय क्रिकेट दिग्गजों की इस सीधी अपील ने पाकिस्तान सरकार पर वैश्विक स्तर पर अतिरिक्त दबाव बना दिया है। संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार निगरानी संस्थाएं पहले ही इस मामले पर नजर रखे हुए हैं।
हालांकि पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने औपचारिक तौर पर यह दोहराया है कि जेल में सभी कैदियों को जेल मैनुअल के अनुसार ही सुविधाएं दी जा रही हैं, लेकिन इस हाई-प्रोफाइल अपील के बाद जेल प्रशासन द्वारा इमरान खान की मेडिकल जांच और मुलाकातों के नियमों में कुछ ढील दिए जाने के संकेत मिले हैं। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद अहम होगा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अंतरराष्ट्रीय खेल बिरादरी के इस पत्र का क्या औपचारिक उत्तर देते हैं।
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