
ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भारतीय वेब सीरीज के इतिहास को नए सिरे से लिखने वाली ‘मिर्जापुर’ अब सिनेमाघरों में तहलका मचाने के लिए पूरी तरह तैयार है। वेब सीरीज की जबरदस्त लोकप्रियता और देश-विदेश के दर्शकों के अपार प्यार के बाद निर्माताओं ने जब ‘मिर्जापुर: द फिल्म’ की घोषणा की थी, तभी से सिनेमाप्रेमियों में इसकी रिलीज को लेकर भारी उत्साह था। अब इस बहुप्रतीक्षित फिल्म से जुड़ा एक बड़ा और रोमांचक अपडेट सामने आया है। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने फिल्म को बिना किसी बड़े समझौते के ‘A’ (एडल्ट्स ओनली) सर्टिफिकेट के साथ हरी झंडी दे दी है। इसके साथ ही फिल्म का रनटाइम भी 3 घंटे से ज्यादा का रखा गया है, जो यह साफ संकेत देता है कि बड़े पर्दे पर पूर्वांचल का यह खूनी संघर्ष बेहद विस्तृत और भव्य पैमाने पर दिखाया जाएगा।
फिल्म समीक्षकों और ट्रेड एनालिस्टों का मानना है कि ओटीटी से बड़े पर्दे का यह सफर भारतीय सिनेमा में एक नया ट्रेंड स्थापित करेगा। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर, जौनपुर, वाराणसी, लखनऊ और कानपुर समेत पूरे हिंदी पट्टी के दर्शकों के बीच इस फिल्म को लेकर जो दीवानगी है, वह किसी बड़े त्योहार से कम नहीं है। मेकर्स ने इस बात का पूरा ख्याल रखा है कि मोबाइल स्क्रीन पर दिखने वाला मिर्जापुर का खौफ जब 70 एमएम के विशाल पर्दे पर डॉल्बी एटमॉस साउंड के साथ गूंजेगा, तो उसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाएगा।
सीबीएफसी का ‘ए’ सर्टिफिकेट: बेखौफ हिंसा और देसी तेवर की वापसी
मिर्जापुर की असली पहचान उसकी बेबाक भाषा, ठेठ देसी अंदाज, अप्रत्याशित ट्विस्ट और बिना किसी लाग-लपेट के दिखाई जाने वाली रॉ और रियलिस्टिक हिंसा रही है। जब किसी वेब सीरीज को फीचर फिल्म में बदला जाता है, तो अक्सर यह डर बना रहता है कि सेंसर बोर्ड की पाबंदियों के चलते कहानी की धार कमजोर न पड़ जाए। हालांकि, ‘मिर्जापुर: द फिल्म’ के मामले में निर्माताओं ने कोई समझौता नहीं किया है। सेंसर बोर्ड द्वारा फिल्म को ‘A’ सर्टिफिकेट दिया जाना इस बात की पुष्टि करता है कि दर्शकों को वही पुराना और अनफिल्टर्ड मिर्जापुर देखने को मिलेगा, जिसकी उन्हें उम्मीद थी।
फिल्म में दिखाए गए एक्शन सीन, गोलियों की तड़तड़ाहट और तीखे संवादों को सेंसर बोर्ड ने कहानी की मांग मानते हुए बरकरार रखा है। सूत्रों के मुताबिक, फिल्म में ऐसे कई हाई-ऑक्टेन सीक्वेंस हैं जो दर्शकों के रोंगटे खड़े कर देंगे। कालीन भैया के शांत लेकिन जानलेवा तेवर, गुड्डू पंडित का अंधाधुंध गुस्सा और सत्ता की लालच में होने वाले षड्यंत्रों को इस बार और अधिक आक्रामकता के साथ पेश किया गया है।
3 घंटे से लंबा रनटाइम: पूर्वांचल के खूनी खेल की महागाथा
मौजूदा दौर में जहां अधिकतर फिल्में 2 से सवा दो घंटे के सीमित दायरे में सिमट जाती हैं, वहीं ‘मिर्जापुर द फिल्म’ का 3 घंटे से भी अधिक लंबा होना अपने आप में एक बड़ा फैसला है। निर्देशक गुरमीत सिंह और लेखक पुनीत कृष्णा ने कहानी के हर पहलू को बारीकी से तराशा है ताकि दर्शकों को किसी भी मोड़ पर कहानी अधूरी या जल्दबाजी में समेटी हुई न लगे।
3 घंटे से लंबे इस विशालकाय कैनवास में हर मुख्य किरदार के बैकग्राउंड, उनके आंतरिक संघर्ष और पूर्वांचल की सत्ता की गद्दी पर बैठने की होड़ को भरपूर स्क्रीन टाइम दिया गया है। फिल्म का पहला हाफ जहां किरदारों के बीच बढ़ते तनाव और शतरंज की बिसात बिछाने में खर्च होगा, वहीं दूसरा हाफ एक नॉन-स्टॉप एक्शन और बदले की आग से दहकता हुआ क्लाइमैक्स लेकर आएगा। इतने लंबे रनटाइम के बावजूद मेकर्स का दावा है कि फिल्म की रफ्तार इतनी तेज है कि दर्शकों को पलक झपकाने तक का मौका नहीं मिलेगा।
मुन्ना भैया, कालीन भैया और गुड्डू: किरदारों का महासंग्राम
‘मिर्जापुर’ की सफलता की सबसे बड़ी रीढ़ इसके अमर किरदार रहे हैं। पंकज त्रिपाठी द्वारा निभाया गया ‘अखंडानंद त्रिपाठी उर्फ कालीन भैया’ का किरदार भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित विलेन-कम-एंटीहीरो में गिना जाता है। वहीं अली फजल ने ‘गुड्डू पंडित’ के रूप में अपनी बॉडी लैंग्वेज और डायलॉग डिलीवरी से एक अलग ही बेंचमार्क सेट किया है। इस फिल्म में इन दोनों दिग्गजों के बीच का सीधा टकराव सिनेमाघरों में तालियां और सीटियां बटोरने के लिए तैयार है।
इसके अलावा सबसे बड़ी उत्सुकता दिव्येंदु शर्मा यानी हम सबके चहेते ‘मुन्ना भैया’ को लेकर है। भले ही सीरीज के पिछले सीजन में मुन्ना भैया के सफर को एक दर्दनाक मोड़ मिला था, लेकिन फिल्म के टीजर और पोस्टर्स ने उनके कमबैक के संकेत देकर इंटरनेट पर भूचाल ला दिया था। फैंस यह जानने के लिए बेताब हैं कि क्या मुन्ना भैया फ्लैशबैक के जरिए वापस आएंगे या कहानी में कोई ऐसा मोड़ आएगा जो सबको चौंका देगा। मुन्ना भैया की मौजूदगी ही इस फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर एक अभूतपूर्व ओपनिंग दिलाने के लिए काफी मानी जा रही है।
ओटीटी से सिनेमाघरों तक का सफर और बॉक्स ऑफिस उम्मीदें
एक्सेल एंटरटेनमेंट के बैनर तले रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर द्वारा निर्मित यह फिल्म भारतीय मनोरंजन उद्योग के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकती है। अब तक हॉलीवुड में ही मार्वल और डीसी जैसी फ्रेंचाइजी को सीरीज से फिल्मों में तब्दील करने का चलन देखा जाता था, लेकिन भारत में किसी सफल वेब सीरीज को इतने बड़े बजट पर सिनेमाघरों में उतारना एक क्रांतिकारी कदम है।
उत्तर भारत के सिंगल स्क्रीन थिएटरों से लेकर मल्टीप्लेक्स तक, डिस्ट्रीब्यूटर्स इस फिल्म को लेकर बेहद उत्साहित हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान और मध्य प्रदेश के सर्किट में फिल्म के पहले दिन के शोज हाउसफुल रहने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। ‘मिर्जापुर द फिल्म’ साबित करने जा रही है कि अगर कहानी में दम और किरदारों में जान हो, तो दर्शक ओटीटी से निकलकर टिकट खिड़की तक खींचे चले आते हैं। बड़े पर्दे पर लगने वाला यह खूनी दरबार निश्चित रूप से बॉक्स ऑफिस के कई पुराने रिकॉर्ड्स को ध्वस्त करने की ताकत रखता है।
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