
शारीरिक रूप से फिट दिखने वाले युवाओं, मशहूर हस्तियों और नियमित जिम जाने वाले लोगों का अचानक वर्कआउट के दौरान गिर जाना और हार्ट अटैक या सडन कार्डियक अरेस्ट (SCA) का शिकार हो जाना आज एक बेहद गंभीर और चिंताजनक विषय बन चुका है। सामान्य तौर पर एक्सरसाइज को दिल को मजबूत बनाने, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने और उम्र बढ़ाने का सबसे बेहतरीन माध्यम माना जाता है। लेकिन जब वही एक्सरसाइज गलत तरीके से, क्षमता से परे जाकर या अनदेखी हृदय समस्याओं के साथ की जाती है, तो यह जीवनदायिनी बनने के बजाय जानलेवा साबित हो सकती है। कार्डियोलॉजिस्ट्स और स्पोर्ट्स मेडिसिन विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि एक्सरसाइज अपने आप में खराब नहीं है, बल्कि ‘अचानक बहुत ज्यादा, बहुत तेज और बिना तैयारी के’ किया गया वर्कआउट शरीर के कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम (हृदय प्रणाली) पर विनाशकारी दबाव डालता है। यह समझना बेहद जरूरी है कि किस प्रकार की एक्सरसाइज और कौन सी गलत आदतें दिल के दौरे के खतरे को कई गुना बढ़ा देती हैं।
किस तरह की एक्सरसाइज और गलत आदतें बढ़ा देती हैं हार्ट अटैक का जोखिम?
हार्ट अटैक का खतरा किसी एक एक्सरसाइज से नहीं, बल्कि उसे करने की तीव्रता (Intensity), तकनीक और शारीरिक तैयारी के अभाव से जुड़ा होता है। निम्नलिखित परिस्थितियां दिल के लिए सबसे अधिक खतरनाक साबित होती हैं:
1. अचानक और बिना कंडीशनिंग के एक्सट्रीम इंटेंसिटी वर्कआउट (HIIT)
हाई-इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग (HIIT) और अचानक बहुत तेज दौड़ना (Sprinting) दिल की धड़कन को कुछ ही सेकंड में उसके चरम स्तर पर पहुंचा देता है। जो लोग लंबे समय तक सेडेंटरी (सुस्त) लाइफस्टाइल में रहे हैं और बिना किसी धीरे-धीरे की जाने वाली ट्रेनिंग के सीधे 100 प्रतिशत क्षमता पर क्रॉसफिट, बूटकैंप या एक्सट्रीम कार्डियो शुरू कर देते हैं, उनका दिल इस अचानक आए तनाव को झेल नहीं पाता। बिना तैयारी के किया गया ऐसा वर्कआउट कोरोनरी धमनियों में रक्त के दबाव को हिंसक रूप से बढ़ा देता है, जिससे दिल की लय (Cardiac Rhythm) अचानक बिगड़ सकती है।
2. सांस रोककर अत्यधिक भारी वजन उठाना (वलसाल्वा मैन्यूवर)
स्ट्रेंथ ट्रेनिंग में अपनी क्षमता से कहीं अधिक वजन उठाने की कोशिश करते समय अक्सर लोग ‘वलसाल्वा मैन्यूवर’ (Valsalva Maneuver) का सहारा लेते हैं, यानी वजन उठाते वक्त अपनी सांस को सीने में पूरी तरह रोक लेते हैं। सांस रोककर भारी वजन उठाने से सीने के भीतर का दबाव (Intrathoracic Pressure) और ब्लड प्रेशर अचानक 300 mmHg से भी ऊपर चला जाता है। यह अचानक हुआ रक्तचाप का विस्फोट दिल की मुख्य धमनी (Aorta) पर भारी खिंचाव पैदा करता है और यदि धमनियों में कोई छोटा सा भी शांत प्लाक (Fatty Blockage) मौजूद है, तो वह तुरंत फटकर ब्लड क्लॉट बना देता है, जिससे सेकंडों में हार्ट अटैक आ जाता है।
3. बिना वॉर्म-अप और कूल-डाउन के सीधे तीव्र वर्कआउट शुरू करना
वर्कआउट से पहले वॉर्म-अप न करना और वर्कआउट के तुरंत बाद अचानक बैठ जाना या ठंडे पानी से नहा लेना दिल के लिए एक बड़ा झटका होता है। वॉर्म-अप न करने पर धमनियां सिकुड़ी रहती हैं और अचानक भारी मेहनत करने से दिल को तुरंत पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिसे ‘मायोकार्डियल इस्केमिया’ कहा जाता है। इसी तरह, भारी एक्सरसाइज के बाद बिना कूल-डाउन के अचानक रुक जाने से पैरों की मांसपेशियों से खून वापस दिल तक तेजी से नहीं पहुंच पाता, जिससे ब्लड प्रेशर एकदम गिर जाता है और कार्डियक अरेस्ट की आशंका बढ़ जाती है।
4. ओवरट्रेनिंग, अधूरी नींद और अत्यधिक शारीरिक थकावट में कसरत
जब शरीर रात की नींद पूरी न होने, अत्यधिक मानसिक तनाव या बीमारी से पहले ही थका हुआ होता है, तब एड्रेनालाईन और कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन्स का स्तर पहले से ही ऊंचा रहता है। ऐसी स्थिति में जिम जाकर भारी कसरत करना ‘आग में घी डालने’ जैसा काम करता है। शरीर को रिकवरी का समय न मिलने पर हृदय की मांसपेशियों में सूक्ष्म सूजन (Micro-inflammation) आ जाती है, जो क्रोनिक मायोकार्डियल फाइब्रोसिस और खतरनाक एरिदमिया (दिल की धड़कन का अनियमित होना) का कारण बनती है।
5. प्री-वर्कआउट सप्लीमेंट्स, अत्यधिक कैफीन और एनाबॉलिक स्टेरॉयड का कॉकटेल
आजकल युवाओं में जिम जाने से ठीक पहले भारी मात्रा में कैफीन युक्त प्री-वर्कआउट पाउडर, एनर्जी ड्रिंक्स या फैट बर्नर्स लेने का खतरनाक चलन बढ़ गया है। अत्यधिक कैफीन और उत्तेजक तत्व सीधे केंद्रीय तंत्रिका तंत्र और दिल की विद्युत प्रणाली को उत्तेजित कर देते हैं। इसके अलावा, मसल्स को जल्दी बड़ा करने के लिए लिए जाने वाले एनाबॉलिक स्टेरॉयड दिल की मांसपेशियों को अस्वाभाविक रूप से मोटा (Left Ventricular Hypertrophy) कर देते हैं, जिससे धमनियां सख्त हो जाती हैं और कम उम्र में ही जानलेवा हार्ट अटैक का जोखिम 4 से 5 गुना बढ़ जाता है।
शरीर के अंदर क्या होता है? समझिए वर्कआउट के दौरान अटैक का बायोमेडिकल विज्ञान
वर्कआउट के दौरान दिल का दौरा पड़ने के पीछे मुख्य रूप से दो अलग-अलग चिकित्सा स्थितियां होती हैं, जिन्हें समझना आवश्यक है:
पहला कारण है ‘मायोकार्डियल इन्फार्कशन’ (क्लासिकल हार्ट अटैक): 35 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्तियों या खराब लाइफस्टाइल वाले युवाओं की रक्त नलिकाओं (Coronary Arteries) में पहले से ही 20 से 40 प्रतिशत तक का हल्का प्लाक (कोलेस्ट्रॉल का जमाव) छिपा हो सकता है, जो सामान्य दिनों में कोई लक्षण नहीं दिखाता। जब व्यक्ति अचानक बहुत भारी वजन उठाता है या एक्सट्रीम कार्डियो करता है, तो तेज रक्त प्रवाह और धमनियों में आने वाली ऐंठन (Spasm) के कारण वह प्लाक की परत फट जाती है। शरीर फटे हुए प्लाक पर तुरंत थक्का (Blood Clot) बना देता है, जिससे धमनी 100% ब्लॉक हो जाती है और दिल की मांसपेशियों तक खून पहुंचना पूरी तरह बंद हो जाता है।
दूसरा कारण है ‘सडन कार्डियक अरेस्ट’ (विद्युत प्रणाली का ठप होना): यह स्थिति विशेष रूप से 35 वर्ष से कम उम्र के युवाओं और एथलीट्स में ज्यादा देखी जाती है। इसके पीछे अक्सर जन्मजात या अनदेखी बीमारियां होती हैं, जैसे हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी (हार्ट की दीवार का अत्यधिक मोटा होना), मायोकार्डिटिस (वायरल इन्फेक्शन के बाद दिल में सूजन) या चैनलपैथीज (विद्युत तरंगों की गड़बड़ी)। अत्यधिक कठोर व्यायाम के दौरान दिल में अचानक ‘वेंट्रिकुलर फाइब्रिलेशन’ (धड़कनों का अनियंत्रित कंपन) शुरू हो जाता है और दिल एक पंप के रूप में काम करना बंद कर देता है, जिससे व्यक्ति सेकंडों में बेहोश होकर गिर पड़ता है।
वर्कआउट के दौरान दिखने वाले 5 रेड फ्लैग संकेत: दिखते ही तुरंत रुक जाएं
एक्सरसाइज करते समय शरीर खतरे के स्पष्ट संकेत देता है। यदि वर्कआउट के दौरान निम्नलिखित में से कोई भी लक्षण महसूस हो, तो उसे ‘इगो’ या सहनशक्ति की परीक्षा न समझें और तुरंत व्यायाम रोक दें:
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सीने में भारीपन, दबाव या जलन: सीने के बीचों-बीच ऐसा महसूस होना मानो कोई भारी पत्थर रख दिया गया हो, या जलन जो धीरे-धीरे बाईं बांह, कंधे, गर्दन, जबड़े या पीठ की ओर फैल रही हो।
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अस्वाभाविक सांस फूलना: व्यायाम के अनुपात से कहीं अधिक सांस उखड़ना, ऐसा लगना कि गहरी सांस लेने के बावजूद फेफड़ों में हवा नहीं जा रही है।
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अचानक ठंडा पसीना और उल्टी जैसा लगना: वातानुकूलित (AC) जिम में भी अचानक माथे और हथेलियों पर ठंडा पसीना छूटना और साथ में चक्कर या जी मिचलाना।
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सिर चकराना या आंखों के आगे अंधेरा छाना: अचानक संतुलन खोना, हल्कापन महसूस होना या बेहोशी जैसी स्थिति बनना। यह मस्तिष्क में रक्त प्रवाह अचानक कम होने का संकेत है।
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दिल की धड़कनों का बेकाबू होना (Palpitations): सीने में बहुत तेज, अनियमित या फड़फड़ाने जैसी धड़कन महसूस होना, जो वर्कआउट की गति धीमी करने पर भी सामान्य न हो।
जिम जाने या इंटेंस ट्रेनिंग शुरू करने से पहले कौन-से टेस्ट कराना अनिवार्य है?
यदि आप 30 वर्ष से अधिक उम्र के हैं, लंबे समय बाद दोबारा कसरत शुरू कर रहे हैं, धूम्रपान करते हैं या आपके परिवार में किसी को कम उम्र में हार्ट अटैक का इतिहास रहा है, तो कोई भी भारी वर्कआउट शुरू करने से पहले एक बुनियादी कार्डियक स्क्रीनिंग अवश्य कराएं:
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ईसीजी (ECG) और 2D इकोकार्डियोग्राफी: यह टेस्ट दिल की संरचना, वाल्व की स्थिति और मांसपेशियों की मोटाई की सटीक जानकारी देता है।
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टीएमटी (TMT – ट्रेडमिल टेस्ट): इसे स्ट्रेस टेस्ट भी कहा जाता है। यह दौड़ते समय दिल पर पड़ने वाले लोड और छिपे हुए ब्लॉकेज की पहचान करने का सबसे सटीक टेस्ट है।
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लिपिड प्रोफाइल और एचएस-सीआरपी (hs-CRP): रक्त में कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स और धमनियों में मौजूद आंतरिक सूजन (Inflammation) के स्तर की जांच।
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ब्लड प्रेशर और HbA1c जांच: अनियंत्रित ब्लड प्रेशर और डायबिटीज धमनियों को कमजोर करते हैं, इसलिए इनका सामान्य होना अनिवार्य है।
सुरक्षित वर्कआउट के 6 स्वर्णिम नियम: कैसे रखें दिल को पूरी तरह महफूज?
व्यायाम छोड़ना समाधान नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक और अनुशासित तरीके से व्यायाम करना ही दीर्घायु और स्वस्थ हृदय की कुंजी है:
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प्रोग्रेसिव ओवरलोड का नियम अपनाएं: वजन और वर्कआउट की गति को अचानक न बढ़ाएं। शुरुआत हमेशा हल्के व्यायाम से करें और हफ्तों व महीनों में धीरे-धीरे 5 से 10 प्रतिशत तीव्रता बढ़ाएं।
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अधिकतम सुरक्षित हृदय गति (Target Heart Rate) की निगरानी करें: अपनी अधिकतम हृदय गति की गणना करें (सूत्र: 220 – आपकी उम्र)। सामान्य सुरक्षित वर्कआउट के दौरान अपनी धड़कनों को अधिकतम हृदय गति के 60 से 75 प्रतिशत के दायरे में रखें। फिटनेस ट्रैकर या स्मार्टवॉच से हार्ट रेट पर नजर रखें।
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10-15 मिनट का अनिवार्य वॉर्म-अप और कूल-डाउन: वर्कआउट से पहले स्ट्रेचिंग और हल्की वॉक से दिल को तैयार करें और अंत में धीमी गति से टहलकर व स्ट्रेचिंग करके पल्स रेट को धीरे-धीरे सामान्य स्तर पर लाएं।
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सांस लेने की सही तकनीक (Breathe Right): वजन उठाते समय सांस बाहर छोड़ें (Exhale on exertion) और वजन नीचे लाते समय सांस अंदर लें (Inhale)। कभी भी ताकत लगाते वक्त सांस को रोककर न रखें।
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पर्याप्त पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स लें: वर्कआउट के दौरान थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें। निर्जलीकरण (Dehydration) से खून गाढ़ा हो जाता है, जिससे दिल पर पंपिंग का दबाव बढ़ जाता है।
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शरीर की आवाज सुनें: यदि किसी दिन आपको बुखार, सर्दी-जुकाम, अत्यधिक थकान या नींद की कमी महसूस हो रही हो, तो उस दिन जिम से पूरी तरह ब्रेक लें। फिटनेस कोई एक दिन की रेस नहीं, बल्कि जीवनभर का अनुशासन है।
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