कुंबले-अकरम समेत टेस्ट क्रिकेट के 7 बदनसीब दिग्गज! 400 से ज्यादा विकेट चटकाकर भी कभी नहीं बन पाए ICC नंबर-1, मिचेल स्टार्क ने तोड़ा अनोखा तिलिस्म

रेड बॉल क्रिकेट यानी टेस्ट मैच को खेल का सबसे कठिन और असली इम्तिहान माना जाता है। इस प्रारूप में 100 या 200 विकेट लेना भी किसी गेंदबाज के जीवन का बड़ा सपना होता है। लेकिन इतिहास में कुछ ऐसे चुनिंदा जांबाज हुए हैं जिन्होंने अपनी फिरकी और रफ्तार के दम पर विरोधी बल्लेबाजों में खौफ पैदा किया और 400 से अधिक टेस्ट विकेटों का विशाल पहाड़ खड़ा कर दिया। विडंबना यह है कि टेस्ट क्रिकेट में अनगिनत यादगार जीत दिलाने और रिकॉर्ड्स की झड़ी लगाने के बावजूद ये गेंदबाज अपने पूरे करियर में कभी भी आईसीसी टेस्ट रैंकिंग के शीर्ष पायदान यानी नंबर-1 की कुर्सी पर नहीं बैठ सके। क्रिकेट की दुनिया में इन्हें अक्सर सबसे ‘बदनसीब’ महारथी कहा जाता है, जिनकी काबिलियत पर किसी को शक नहीं, लेकिन आईसीसी का अंक गणित और समकालीन दिग्गजों की मौजूदगी ने उन्हें हमेशा शीर्ष से एक कदम दूर रखा।

मिचेल स्टार्क ने तोड़ा चक्रव्यूह: 445 विकेट के बाद हासिल किया नंबर-1 का ताज

हाल ही में आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में एक ऐतिहासिक फेरबदल देखने को मिला, जिसने इस पुराने रिकॉर्ड को दोबारा सुर्खियों में ला दिया। ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज मिचेल स्टार्क ने 107 टेस्ट मैचों में 445 विकेट पूरे करने के बाद अपने करियर में पहली बार आईसीसी टेस्ट बॉलिंग रैंकिंग में नंबर-1 का पायदान हासिल किया। स्टार्क ने भारतीय तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को पछाड़कर यह ताज अपने नाम किया। बांग्लादेश के खिलाफ खेली गई टेस्ट सीरीज में स्टार्क ने अपनी तूफानी इनस्विंग और यॉर्कर गेंदों से कहर बरपाते हुए 12 विकेट झटके और ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ का खिताब जीता।

इस जबरदस्त प्रदर्शन के साथ ही स्टार्क ने टेस्ट क्रिकेट में दक्षिण अफ्रीका के डेल स्टेन (439 विकेट) और भारत के महान ऑलराउंडर कपिल देव (434 विकेट) को पीछे छोड़ दिया। सबसे बड़ी बात यह रही कि स्टार्क ने संन्यास की दहलीज पर पहुंचने से पहले खुद को उन बदकिस्मत गेंदबाजों की सूची से बाहर निकाल लिया, जो 400 से ज्यादा शिकार करने के बावजूद कभी नंबर-1 नहीं बन सके थे। स्टार्क के इस ताज के बाद उन 7 लीजेंड्स की चर्चा फिर तेज हो गई है जो 400 क्लब में रहकर भी कभी शीर्ष पर नहीं पहुंच पाए।

619 विकेट के बाद भी नंबर-1 से महरूम रहे ‘जंबो’ अनिल कुंबले

भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े मैच विनर और टेस्ट में तीसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले स्पिनर अनिल कुंबले का नाम इस सूची में सबसे ऊपर आता है। कुंबले ने 132 टेस्ट मैचों में 619 विकेट चटकाए, जिसमें एक पारी में सभी 10 विकेट लेने का ऐतिहासिक कीर्तिमान भी शामिल है। टूटे हुए जबड़े पर पट्टी बांधकर ब्रायन लारा को आउट करने का जज्बा दिखाने वाले कुंबले भारत के सबसे सफल टेस्ट गेंदबाज हैं।

इतनी अविश्वसनीय सफलताओं के बावजूद ‘जंबो’ कभी आईसीसी रैंकिंग में नंबर-1 नहीं बन सके। उनका सर्वश्रेष्ठ करियर रैंक नंबर-2 रहा। इसकी सबसे बड़ी वजह यह थी कि कुंबले का पूरा करियर मुथैया मुरलीधरन, शेन वॉर्न, ग्लेन मैक्ग्रा और शॉन पोलॉक जैसे दिग्गजों के स्वर्ण काल के समानांतर चला। जब भी कुंबले ने शानदार प्रदर्शन किया, तब इनमें से कोई न कोई गेंदबाज असाधारण फॉर्म में रहकर रैंकिंग में नंबर-1 पर काबिज रहा।

‘सुल्तान ऑफ स्विंग’ वसीम अकरम और 1983 के नायक कपिल देव की अनकही दास्तान

पाकिस्तान के पूर्व कप्तान और बाएं हाथ की तेज गेंदबाजी के बेताज बादशाह वसीम अकरम ने 104 टेस्ट मैचों में 414 विकेट झटके। पुरानी गेंद से रिवर्स स्विंग कराने की कला में अकरम का कोई सानी नहीं था। लेकिन ताज्जुब की बात है कि अकरम भी अपने करियर में केवल नंबर-2 के पायदान तक ही पहुंच पाए। उस दौर में वेस्टइंडीज के कर्टली एंब्रोस, मैल्कम मार्शल और उनके ही जोड़ीदार वकार यूनिस की प्रचंड फॉर्म के कारण अकरम कभी पहले पायदान को छू नहीं सके।

यही दास्तान भारत के पहले विश्व कप विजेता कप्तान कपिल देव की भी रही। कपिल देव ने बिना किसी आधुनिक फिटनेस तकनीक के 131 टेस्ट मैच खेले और 434 विकेट झटके, जो लंबे समय तक विश्व रिकॉर्ड रहा। कपिल देव ने भारतीय उपमहाद्वीप की सपाट पिचों पर तेज गेंदबाजी की नई परिभाषा लिखी थी। लेकिन अपने पूरे 16 साल के करियर में सर रिचर्ड हैडली, इमरान खान और मैल्कम मार्शल जैसे समकालीन महान ऑलराउंडरों और गेंदबाजों के दबदबे की वजह से कपिल देव की सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग भी नंबर-2 ही रही।

नाथन लियोन और कोर्टनी वॉल्श: 500+ विकेट का पहाड़, लेकिन शीर्ष से दूरी

इस सूची में ऑस्ट्रेलिया के मौजूदा ऑफ स्पिनर नाथन लियोन और वेस्टइंडीज के पूर्व दिग्गज तेज गेंदबाज कोर्टनी वॉल्श का नाम भी शामिल है, जिन्होंने 500 से अधिक टेस्ट विकेटों का आंकड़ा पार किया है।

ऑस्ट्रेलिया के नाथन लियोन ने अब तक 571 टेस्ट विकेट हासिल किए हैं और वे शेन वॉर्न के बाद कंगारू टीम के दूसरे सबसे सफल स्पिनर हैं। ऑस्ट्रेलियाई पिचों पर जहां तेज गेंदबाजों का बोलबाला रहता है, वहां लियोन ने अपनी फ्लाइट और बाउंस से दुनिया भर के बल्लेबाजों को नचाया। लेकिन रविचंद्रन अश्विन, रवींद्र जडेजा, कगिसो रबाडा और पैट कमिंस के निरंतर दबदबे के चलते लियोन कभी नंबर-1 नहीं बन पाए।

वहीं, वेस्टइंडीज के कोर्टनी वॉल्श ने अपने करियर में 519 विकेट झटके थे और वे टेस्ट इतिहास में 500 विकेट का आंकड़ा छूने वाले दुनिया के पहले गेंदबाज बने थे। वॉल्श की लंबी कद-काठी और सटीक लाइन-लेंथ ने दशकों तक बल्लेबाजों को परेशान किया। लेकिन उसी दौर में उनके हमवतन कर्टली एंब्रोस, ऑस्ट्रेलिया के ग्लेन मैक्ग्रा और पाकिस्तान के तेज गेंदबाजों की रैंकिंग पॉइंट्स की बढ़त के कारण वॉल्श भी कभी नंबर-1 का मुकुट नहीं पहन सके।

हरभजन सिंह और रंगना हेराथ: मैच विनर स्पिनर्स जो रह गए नंबर-2 पर

भारतीय ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह ‘भज्जी’ ने टेस्ट क्रिकेट में 417 विकेट लेकर भारत की कई ऐतिहासिक जीतों की पटकथा लिखी, जिसमें 2001 की ऐतिहासिक बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में हैट्रिक और 32 विकेट शामिल हैं। हरभजन सिंह अपने करियर के चरम पर बल्लेबाजों के लिए अबूझ पहेली थे, लेकिन उस समय मुथैया मुरलीधरन और ग्लेन मैक्ग्रा की लगातार शीर्ष पर मौजूदगी ने हरभजन को नंबर-2 से आगे नहीं बढ़ने दिया।

श्रीलंका के बाएं हाथ के स्पिनर रंगना हेराथ ने मुथैया मुरलीधरन के संन्यास के बाद श्रीलंकाई गेंदबाजी का पूरा भार अपने कंधों पर उठाया। हेराथ ने बेहद कम समय में 93 टेस्ट में 433 विकेट अपने नाम किए। अपनी सटीक आर्म बॉल और वेरिएशन से उन्होंने गाले और कोलंबो में अनगिनत मैच जिताए। हालांकि, हेराथ का पीक करियर उस दौर में आया जब डेल स्टेन, जेम्स एंडरसन और आर अश्विन अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी कर रहे थे, जिसके चलते हेराथ भी नंबर-2 पर ही अटक कर रह गए।

ICC रैंकिंग में 400+ विकेट लेकर कभी नंबर-1 न बन पाने वाले 7 दिग्गज

  • अनिल कुंबले (भारत): 619 टेस्ट विकेट (करियर बेस्ट रैंकिंग: 2)

  • नाथन लियोन (ऑस्ट्रेलिया): 571 टेस्ट विकेट (करियर बेस्ट रैंकिंग: 3)

  • कोर्टनी वॉल्श (वेस्टइंडीज): 519 टेस्ट विकेट (करियर बेस्ट रैंकिंग: 2)

  • कपिल देव (भारत): 434 टेस्ट विकेट (करियर बेस्ट रैंकिंग: 2)

  • रंगना हेराथ (श्रीलंका): 433 टेस्ट विकेट (करियर बेस्ट रैंकिंग: 2)

  • हरभजन सिंह (भारत): 417 टेस्ट विकेट (करियर बेस्ट रैंकिंग: 2)

  • वसीम अकरम (पाकिस्तान): 414 टेस्ट विकेट (करियर बेस्ट रैंकिंग: 2)

आईसीसी रैंकिंग का जटिल गणित और कड़े मुकाबले का दौर

क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि किसी गेंदबाज का आईसीसी नंबर-1 न बन पाना उसकी क्षमता की कमी नहीं, बल्कि उस दौर के कड़े कॉम्पिटिशन और रेटिंग पॉइंट्स के एल्गोरिदम का नतीजा होता है। आईसीसी रैंकिंग केवल कुल विकेटों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि यह मैच की स्थिति, विरोधी टीम की ताकत, प्रति पारी विकेटों का अनुपात और गेंदबाजी औसत पर तय होती है। 90 के दशक और 2000 के शुरुआती दशक में एक साथ कई ‘ऑल-टाइम ग्रेट’ गेंदबाज खेल रहे थे, जिसके चलते रेटिंग पॉइंट्स का अंतर बेहद मामूली रहता था।

भले ही ये 7 महान खिलाड़ी कभी आईसीसी टेस्ट बॉलिंग चार्ट के शीर्ष पर नहीं पहुंच सके, लेकिन क्रिकेट की किताब में उनका कद किसी भी रैंकिंग और आंकड़ों से कहीं ज्यादा ऊंचा और अमर रहेगा।

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