उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने ग्रामीण इलाकों की सूरत बदलने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब यूपी के गांवों में पारंपरिक सड़कों की जगह पर्यावरण के अनुकूल (Eco-Friendly) ‘कार्बन क्रेडिट’ सड़कें बनाई जाएंगी।
प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ग्राम्य विकास विभाग के उच्चाधिकारियों को इस महत्वाकांक्षी परियोजना का विस्तृत प्रस्ताव (Proposal) जल्द से जल्द तैयार करने के सख्त निर्देश दिए हैं। सरकार का मानना है कि इस नई पहल से न सिर्फ ग्रामीण कनेक्टिविटी मजबूत होगी, बल्कि पर्यावरण का संरक्षण होगा और गांवों की वायु गुणवत्ता (Air Quality) में भी अभूतपूर्व सुधार देखने को मिलेगा।
क्यों पड़ी ‘कार्बन क्रेडिट’ सड़कों की जरूरत?
ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण मुख्य रूप से प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (PMGSY) के तहत किया जाता है। पारंपरिक तरीके से सड़क बनाने के दौरान इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों (जैसे कोलतार और डामर को गर्म करना) से भारी मात्रा में कार्बन उत्सर्जन होता है, जो पर्यावरण और ग्रामीणों की सेहत को नुकसान पहुंचाता है। इसी प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए योगी सरकार ने ‘कार्बन न्यूट्रल’ और ‘कार्बन क्रेडिट’ सड़कों के निर्माण का मास्टर प्लान तैयार किया है।
क्या तकनीक है और कैसे बनाई जाती हैं ये आधुनिक सड़कें?
इन सड़कों को बनाने के लिए किसी एक तकनीक नहीं, बल्कि कई आधुनिक और वैज्ञानिक विधाओं का इस्तेमाल किया जाएगा:
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बायो-डामर (Bio-Asphalt) आधारित तकनीक: इन सड़कों के निर्माण में पारंपरिक डामर सीमेंट की जगह वनस्पति और पौधों के अपशिष्ट (Plant Waste) का उपयोग किया जाता है। यह तकनीक कार्बन को लंबे समय तक मिट्टी और सड़क के भीतर स्थिर रखती है, जिससे वायुमंडल में कार्बन उत्सर्जन न के बराबर होता है।
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फ्लाई ऐश (Fly Ash) का उपयोग: थर्मल पावर प्लांटों से निकलने वाली राख (फ्लाई ऐश) को कंक्रीट और सीमेंट के बेस में मिलाया जाता है। इससे सीमेंट के उत्पादन के दौरान होने वाला प्रदूषण बेहद कम हो जाता है।
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प्लास्टिक वेस्ट (Plastic Waste): कबाड़ और रीसायकल न होने वाले प्लास्टिक कचरे को डामर के साथ मिक्स करके सड़कें बनाई जाती हैं, जो वॉटरप्रूफ होती हैं और बेहद टिकाऊ मानी जाती हैं।
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रीसाइक्लिंग (Recycled Materials): पुरानी और टूटी हुई सड़कों के मलबे, गिट्टी और डामर को आधुनिक मशीनों से क्रश करके नई सड़क के निर्माण में दोबारा इस्तेमाल किया जाता है। इससे नए पत्थरों के खनन और प्रोसेसिंग में लगने वाली ऊर्जा की बड़ी बचत होती है।
FDR तकनीक से यूपी ने बचाए ₹4,000 करोड़, अब अगला कदम
उत्तर प्रदेश में ग्रामीण सड़कों को मजबूत और आधुनिक बनाने के लिए फुल डेप्थ रिक्लेमेशन (FDR) तकनीक का इस्तेमाल पहले से ही बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।
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टिकाऊ और सस्ती: FDR तकनीक के तहत पुरानी सड़क की ही सामग्री को रीसायकल कर नई और बेहद मजबूत परत तैयार की जाती है।
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शानदार रिकॉर्ड: यूपी में अब तक इस तकनीक की मदद से 8,000 किलोमीटर से अधिक लंबी ग्रामीण सड़कों का निर्माण सफलतापूर्वक किया जा चुका है।
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बजट की भारी बचत: इस स्वदेशी और आधुनिक तकनीक के कारण राज्य सरकार ने निर्माण लागत में करीब 4,000 करोड़ रुपये की ऐतिहासिक बचत की है। इसी सफलता को देखते हुए अब सरकार पूरे प्रदेश में कार्बन क्रेडिट सड़कों के कॉन्सेप्ट को अनिवार्य करने जा रही है।
प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही शुरू होगा काम
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि अधिकारियों द्वारा फाइनल ड्राफ्ट और प्रस्ताव सौंपे जाने के बाद कैबिनेट स्तर पर इसे मंजूरी दी जाएगी। इसके बाद आगामी वित्तीय बजट के तहत गांवों में इन ग्रीन रोड्स का निर्माण युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया जाएगा, जिससे उत्तर प्रदेश ग्रामीण विकास और पर्यावरण संरक्षण के मामले में देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरेगा।
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