पाकिस्तान के सांस्कृतिक केंद्र और पंजाब प्रांत की राजधानी लाहौर से एक बेहद दर्दनाक और झुलसा देने वाली खबर सामने आ रही है। लाहौर के एक घनी आबादी वाले इलाके में चल रहे एक निजी ट्यूशन सेंटर (अकादमी) की छत अचानक भरभराकर गिर गई। इस भीषण हादसे में 14 स्कूली बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कम से कम 20 अन्य बच्चे और एक महिला शिक्षिका गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
हादसे के वक्त ट्यूशन सेंटर के भीतर 7 से 13 वर्ष की आयु के मासूम बच्चे पढ़ाई कर रहे थे, जो अचानक गिरे मलबे के नीचे जिंदा दफन हो गए। इस घटना के बाद पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई और पाकिस्तान के प्रशासनिक अमले में हड़कंप है।
निर्माणाधीन इमारत में चल रही थी मौत की क्लास
यह दर्दनाक हादसा लाहौर के घनी आबादी वाले काहना नौ क्षेत्र के बस्ती ईदगाह इलाके में हुआ। स्थानीय पुलिस और रेस्क्यू टीमों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह निजी ट्यूशन सेंटर एक ऐसी इमारत में संचालित हो रहा था, जिसका निर्माण कार्य अभी चल रहा था।
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मजदूर कर रहे थे काम: घटना के वक्त इमारत के एक हिस्से में निर्माण कार्य चल रहा था और मजदूर काम में व्यस्त थे, तभी अचानक छत का एक बहुत बड़ा हिस्सा ढह गया।
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मलबे में दबे मासूम: छत गिरते ही क्लासरूम में बैठे बच्चे संभल भी नहीं पाए और मलबे के नीचे दब गए।
रेस्क्यू ऑपरेशन जारी: ठेकेदार गिरफ्तार, बढ़ सकता है मौत का आंकड़ा
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, एधी फाउंडेशन (Edhi Foundation) की टीमें और पाकिस्तान की आपातकालीन सेवा ‘रेस्क्यू 1122’ के कर्मी भारी मशीनरी के साथ मौके पर पहुंचे। संकरी गलियां और घनी आबादी होने के कारण राहत कार्य में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
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DIG का बयान: लाहौर के उप महानिरीक्षक (Operations) फैसल कामरान ने घटनास्थल पर पुष्टि की कि अब तक मलबे से 14 बच्चों के शव निकाले जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि लापरवाही बरतने वाले ठेकेदार को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले की आपराधिक जांच शुरू कर दी गई है।
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एधी फाउंडेशन की चेतावनी: एधी फाउंडेशन ने अपने आधिकारिक बयान में बताया कि शवों को लाहौर जनरल अस्पताल के मुर्दाघर भेज दिया गया है। चूंकि मलबे का आकार बहुत बड़ा है और कुछ बच्चों के अभी भी दबे होने की आशंका है, इसलिए मृतकों की संख्या और बढ़ने का अंदेशा है।
बिना अनुमति अवैध तरीके से चल रहा था सेंटर
लाहौर जिला शिक्षा प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) तारिक महमूद ने बताया कि यह ट्यूशन सेंटर स्थानीय एक महिला द्वारा चलाया जा रहा था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि पूरी तरह निर्माणाधीन और असुरक्षित इमारत में इस तरह अनधिकृत (Unauthorized) रूप से ट्यूशन सेंटर चलाने की कोई कानूनी अनुमति नहीं ली गई थी। शिक्षा विभाग इस बात की जांच कर रहा है कि घनी आबादी के बीच इतने दिनों से यह अवैध काम किसकी शह पर चल रहा था।
मुख्यमंत्री मरियम नवाज सख्त: “जिम्मेदार बख्शे नहीं जाएंगे”
पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने इस दर्दनाक हादसे पर गहरा शोक और दुख व्यक्त किया है। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए लाहौर पुलिस और जिला प्रशासन को बेहद सख्त निर्देश जारी किए हैं।
सीएम मरियम नवाज ने कहा कि बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार इमारत के मालिक, ठेकेदार और उन अधिकारियों की पहचान तुरंत की जाए जिन्होंने इस असुरक्षित जगह पर सेंटर चलने दिया। उन्होंने आदेश दिया कि इन सभी के खिलाफ तत्काल आपराधिक मुकदमा (Criminal Case) दर्ज कर जेल भेजा जाए और इस मामले में किसी भी स्तर की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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