सऊदी अरब के भीषण हवाई हमलों से थर्राया यमन का हदीदा पोर्ट: तेल सुविधा केंद्र और जहाजों पर बरसे बम

पश्चिम एशिया में जारी भारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच यमन के रणनीतिक और तटीय प्रांत हदीदा में एक बार फिर भयंकर बारूदी धमाके गूंज उठे हैं। यमन के लाल सागर तटवर्ती इलाके पर नियंत्रण रखने वाले ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के अनुसार, सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने सोमवार को हदीदा प्रांत के अत्यंत संवेदनशील समुद्री बंदरगाहों और प्रमुख तेल भंडारण सुविधाओं पर सिलसिलेवार हवाई हमले किए हैं। लड़ाकू विमानों की भीषण बमबारी के चलते पूरा तटीय परिक्षेत्र दहल गया और आसमान में काले धुएं के विशाल गुबार छा गए। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस एयरस्ट्राइक में कम से कम सात लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें तुरंत नजदीकी ट्रॉमा केंद्रों में भर्ती कराया गया है।

हूती समूह के स्वास्थ्य मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता अनीस अल-अस्बाही ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक बयान जारी करते हुए हमलों के विवरण की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि सऊदी लड़ाकू विमानों ने नागरिक बुनियादी ढांचे, बंदरगाह जेट्टी और तेल आपूर्ति लाइन को जानबूझकर अपना निशाना बनाया। लंबे समय से नाजुक शांति और छिटपुट संघर्ष के दौर से गुजर रहे इस पूरे क्षेत्र में इन ताजा हमलों ने एक बार फिर पूर्ण सैन्य टकराव की आशंका को हवा दे दी है। लाल सागर एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय समुद्री गलियारा है जहां से दुनिया का एक बड़ा व्यापार और तेल टैंकर गुजरते हैं, ऐसे में हदीदा जैसे महत्वपूर्ण बंदरगाह पर हुए इस बड़े हमले से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की चिंता बढ़ गई है।

रास ईसा पोर्ट पर जेट्टी और व्यापारिक जहाज पर गिरी मिसाइलें, बजील जिले में ऑयल फैसिलिटी तबाह

प्राप्त विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी गठबंधन की वायुसेना ने मुख्य रूप से दो महत्वपूर्ण भौगोलिक ठिकानों पर सघन हवाई हमले किए। पहला बड़ा हमला रास ईसा पोर्ट पर केंद्रित था, जो कच्चे तेल के निर्यात और आयात का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है। हूती विद्रोही समूह द्वारा संचालित अल-मसीरा टेलीविजन नेटवर्क ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि रास ईसा बंदरगाह पर स्थापित मुख्य समुद्री जेट्टी पर सीधे मिसाइलें दागी गईं। इसके साथ ही बंदरगाह पर लंगर डाले खड़े एक कमर्शियल मालवाहक जहाज को भी इन हमलों में भारी नुकसान पहुंचा है। रास ईसा पोर्ट पर हुए इस हमले में चार निर्दोष बंदरगाह कर्मचारी और नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गए।

गठबंधन सेना का दूसरा बड़ा निशाना हदीदा प्रांत का बजील जिला बना, जहां स्थित एक रणनीतिक तेल सुविधा केंद्र (Oil Facility Center) पर घातक हवाई प्रहार किए गए। तेल डिपो पर हुए इन हमलों के बाद वहां भीषण आग लग गई, जिसे बुझाने के लिए दमकल की कई गाड़ियों को घंटों मशक्कत करनी पड़ी। बजील जिले में हुए इस हमले में तीन अन्य लोग झुलसने और मलबे की चपेट में आने से घायल हुए हैं। स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि धमाके इतने शक्तिशाली थे कि उनकी गूंज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी और आसपास की रिहायशी इमारतों की खिड़कियों के शीशे टूट गए। घायलों में से कुछ की हालत नाजुक बताई जा रही है, जिससे हताहतों की संख्या बढ़ने का अंदेशा बना हुआ है।

हूती विद्रोहियों ने हमलों को बताया 'युद्ध अपराध', अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों के उल्लंघन का लगाया आरोप

इन विध्वंसक हमलों के बाद हूती विद्रोही नेतृत्व सऊदी गठबंधन और उसके अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों पर बुरी तरह भड़क गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता अनीस अल-अस्बाही ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि तेल के ठिकानों, सार्वजनिक उपयोगिता वाले बंदरगाहों और गैर-सैन्य प्रतिष्ठानों पर बार-बार किए जाने वाले ये हमले अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून (International Humanitarian Law) का खुला और बेशर्म उल्लंघन हैं। उन्होंने कहा कि नागरिक बुनियादी ढांचे को जानबूझकर निशाना बनाना जेनेवा समझौते की मूल भावना के खिलाफ है और यह सऊदी गठबंधन द्वारा यमन की बेकसूर जनता पर ढाए जा रहे संगठित 'युद्ध अपराधों' की एक और नई कड़ी है।

हूती कमांडरों ने संकेत दिया है कि इन हमलों का उचित समय पर कड़ा जवाब दिया जाएगा। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि हूती विद्रोही इस कार्रवाई के प्रतिशोध में सऊदी अरब की सीमावर्ती तेल रिफाइनरियों, अरामको के प्रतिष्ठानों या लाल सागर में गश्त कर रहे गठबंधन के नौसैनिक जहाजों पर ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों से पलटवार कर सकते हैं। हूतियों के इस आक्रामक रुख ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय शांति दूतों के उन प्रयासों को गहरा झटका दिया है, जो यमन में एक स्थायी और दीर्घकालिक युद्धविराम स्थापित करने की कोशिशों में जुटे हुए थे।

एक दशक के खूनी गृहयुद्ध से पस्त यमन, दुनिया के सबसे बड़े मानवीय संकट का झेल रहा है दंश

अरब प्रायद्वीप के सबसे गरीब मुल्कों में गिना जाने वाला यमन पिछले एक दशक से भी अधिक समय से एक विनाशकारी, बहुकोणीय और खूनी गृहयुद्ध की आग में झुलस रहा है। यमन का यह संकट वर्ष 2014 के अंत में उस समय चरम पर पहुंच गया था जब शिया जैदी संप्रदाय से जुड़े ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त चुनी हुई सरकार को अपनी राजधानी छोड़कर दक्षिणी शहर अदन में शरण लेनी पड़ी। इस घटनाक्रम के बाद वर्ष 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व में एक शक्तिशाली सुन्नी अरब देशों के गठबंधन ने यमन सरकार को दोबारा सत्ता में बहाल करने के उद्देश्य से हूती ठिकानों पर व्यापक सैन्य अभियान और हवाई हमलों की शुरुआत की थी।

सालों से चल रहे इस अनवरत संघर्ष ने यमन को पूरी तरह तबाह कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न मानवीय रिपोर्टों के अनुसार, यह देश इतिहास के सबसे भीषण मानवीय संकटों में से एक से जूझ रहा है, जहां लाखों लोग भुखमरी, पेयजल की कमी और स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में जीने को मजबूर हैं। हदीदा बंदरगाह यमन की अस्सी प्रतिशत से अधिक आबादी के लिए भोजन, दवाएं और ईंधन पहुंचाने का मुख्य जीवन रेखा (लाइफलाइन) है। ऐसे में इस बंदरगाह और उसके आसपास की बुनियादी सुविधाओं पर सैन्य हमले होने से देश के भीतर मानवीय सहायता सामग्री का वितरण बुरी तरह ठप हो सकता है, जिससे लाखों मासूम यमनी नागरिकों का जीवन एक बार फिर घोर संकट में पड़ जाएगा।

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