
संयुक्त राज्य अमेरिका के राजनीतिक परिदृश्य में भारतीय प्रवासियों का प्रभाव लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। शीर्ष संघीय पदों से लेकर स्थानीय निकायों तक, भारतीय मूल के प्रतिनिधि अपनी कार्यकुशलता और नेतृत्व क्षमता का लोहा मनवा रहे हैं। इसी कड़ी में जॉर्जिया प्रांत से एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक खबर सामने आई है। डेमोक्रेटिक पार्टी से ताल्लुक रखने वाली प्रमुख भारतवंशी नेता शुचिता पटेल जॉर्जिया की राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील मानी जाने वाली फोरसिथ काउंटी (Forsyth County) में कमिश्नर पद के लिए चुनावी मैदान में उतरी हैं। तीन नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में वे इस पद के लिए अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर रही हैं। शुचिता पटेल फोरसिथ काउंटी के इतिहास में कमिश्नर पद के लिए चुनाव लड़ने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी महिला बन चुकी हैं, जिसने इस स्थानीय मुकाबले को अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया है।
रविवार सुबह से ही शुचिता पटेल अपने स्वयंसेवकों की टीम के साथ काउंटी के विभिन्न मोहल्लों में डोर-टू-डोर जनसंपर्क अभियान चलाती नजर आईं। वे मतदाताओं के दरवाजे खटखटाकर न केवल अपनी प्राथमिकताओं और विकास के एजेंडे को साझा कर रही थीं, बल्कि लोगों को यह भी याद दिला रही थीं कि इस बार उनके पास एक नया और समावेशी विकल्प मौजूद है। फोरसिथ काउंटी में भारतीय-अमेरिकी और एशियाई समुदाय की आबादी पिछले दो दशकों में तेजी से बढ़ी है, लेकिन स्थानीय प्रशासनिक संस्थाओं में उनकी भागीदारी लगभग नदारद रही है। शुचिता की उम्मीदवारी ने पूरे दक्षिण एशियाई समुदाय में नई ऊर्जा और उत्साह भर दिया है और उन्हें हर वर्ग का समर्थन मिल रहा है।
1912 का खूनी और काला इतिहास: कभी कू क्लक्स क्लैन का गढ़ थी फोरसिथ काउंटी
फोरसिथ काउंटी में शुचिता पटेल की यह राजनीतिक यात्रा केवल एक सामान्य चुनाव नहीं है, बल्कि यह उस इलाके के काले और नस्लवादी इतिहास को आईना दिखाने वाला ऐतिहासिक बदलाव है। जॉर्जिया की यह काउंटी दशकों तक भयानक नस्लीय हिंसा, जातीय नफरत और मॉब लिंचिंग जैसी अमानवीय घटनाओं के लिए कुख्यात रही है। इतिहास के पन्नों को पलटें तो साल 1912 में इस काउंटी में एक खौफनाक नस्लीय नरसंहार और निष्कासन अभियान चलाया गया था। उस दौरान स्थानीय कट्टरपंथी श्वेत निवासियों और कू क्लक्स क्लैन (KKK) जैसे कुख्यात हिंसक श्वेत वर्चस्ववादी समूहों ने मिलकर काउंटी में रहने वाली लगभग पूरी अश्वेत आबादी पर कहर बरपाया था।
उस दौर में अश्वेत परिवारों के घरों और चर्चों को आग के हवाले कर दिया गया था और उन्हें बंदूक की नोक पर काउंटी छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था। इस जबरन पलायन के बाद कई दशकों तक फोरसिथ काउंटी पूरी तरह से केवल श्वेत नागरिकों का इलाका बनकर रह गई थी, जहां किसी भी गैर-श्वेत व्यक्ति का प्रवेश भी जोखिम भरा माना जाता था। ऐसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वाली काउंटी में आज एक अप्रवासी पृष्ठभूमि की भारतीय महिला का मुख्यधारा की राजनीति में उतरना और कमिश्नर पद की मजबूत दावेदार बनना इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि समय के साथ अमेरिकी समाज में विविधता, समानता और लोकतंत्र की जड़ें कितनी गहरी हुई हैं।
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों की महा-जंग, प्रतिनिधि सभा की सभी 435 और सीनेट की 37 सीटों पर फैसला
तीन नवंबर को होने वाले ये चुनाव अमेरिकी राजनीति की भावी दिशा और शक्ति संतुलन तय करने वाले हैं। अमेरिका में दो सदनों वाली संसद यानी कांग्रेस की संरचना को निर्धारित करने के लिए यह मतदान आयोजित किया जा रहा है, जिसकी कार्यप्रणाली काफी हद तक भारत की लोकसभा और राज्यसभा के समान है। इस मध्यावधि चुनाव में अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) की सभी 435 सीटों पर एक साथ मतदान कराया जा रहा है। इसके साथ ही 100 सदस्यों वाले उच्च सदन यानी सीनेट की 37 सीटों के लिए भी कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है।
संघीय संसद के इन अहम फैसलों के समानांतर ही कई प्रमुख अमेरिकी राज्यों में गवर्नर पद, राज्य विधानसभाओं और स्थानीय प्रशासनिक निकायों के चुनाव भी एक साथ हो रहे हैं। इनमें काउंटी कमिश्नर, स्थानीय शेरिफ, म्यूनिसिपल जज और पब्लिक स्कूल बोर्ड के प्रमुखों के चुनाव शामिल हैं। अमेरिकी प्रशासनिक ढांचे में काउंटी कमिश्नर का पद स्थानीय स्तर पर अत्यंत शक्तिशाली और प्रभावशाली माना जाता है क्योंकि सड़कों के निर्माण, जोनिंग नियमों, बजट आवंटन, पब्लिक हेल्थ और स्थानीय टैक्स की दरें तय करने का पूरा अधिकार इन्हीं कमिश्नरों के हाथ में होता है। ऐसे महत्वपूर्ण पद पर एक भारतीय-अमेरिकी की जीत स्थानीय नीतियों में प्रवासी समुदाय की प्राथमिकताओं को सीधे तौर पर शामिल करने में मदद करेगी।
जमीनी मुद्दों पर केंद्रित है शुचिता का एजेंडा, इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा को दी प्राथमिकता
अपने सघन चुनाव प्रचार के दौरान शुचिता पटेल ने काउंटी के वास्तविक और बुनियादी जनमुद्दों को अपना मुख्य हथियार बनाया है। फोरसिथ काउंटी में पिछले कुछ वर्षों में आबादी का दबाव बहुत तेजी से बढ़ा है, जिसके चलते ट्रैफिक जाम, सड़कों की खराब स्थिति और पब्लिक स्कूलों में सीटों की कमी एक बड़ी नागरिक समस्या बन चुकी है। शुचिता पटेल ने अपने चुनावी घोषणापत्र में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट, सरकारी स्कूलों में उच्च स्तरीय संसाधनों की उपलब्धता और स्थानीय व्यवसायों को प्रोत्साहन देने का वादा किया है।
इसके अलावा शुचिता ने काउंटी प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने पर भी जोर दिया है। उनका कहना है कि फोरसिथ काउंटी अब 1912 की पुरानी मानसिकता वाली जगह नहीं रही, बल्कि यह एक बहुसांस्कृतिक और प्रगतिशील क्षेत्र बन चुकी है जहां दुनिया भर से आए डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक और उद्यमी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में स्थानीय प्रशासन में भी इस विविधता की झलक दिखनी चाहिए। यदि तीन नवंबर को होने वाले मतदान में शुचिता पटेल जीत दर्ज करती हैं, तो वे न केवल फोरसिथ काउंटी में इतिहास रचेंगी बल्कि पूरे अमेरिका में रहने वाले लाखों प्रवासी भारतीयों के लिए प्रेरणा का एक नया स्रोत बनकर उभरेंगी।
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