
आज के दौर में जब बॉलीवुड और साउथ इंडियन सिनेमा में 100 करोड़, 500 करोड़ या 1000 करोड़ रुपये की कमाई की चर्चा होना बेहद आम बात हो गई है, तब किसी भी फिल्म के लिए अपनी लागत निकाल पाना ही बड़ी चुनौती माना जाता है। लेकिन अगर हम आज से लगभग 22 साल पीछे मुड़कर देखें, तो क्षेत्रीय सिनेमा में 1 करोड़ रुपये की कमाई करना भी एक बहुत बड़ा और नामुमकिन सा सपना लगता था। विशेष रूप से 1990 के दशक के अंत और 2000 के दशक की शुरुआत में भोजपुरी सिनेमा एक तरह से ठप पड़ा हुआ था। थिएटर्स में नई भोजपुरी फिल्मों का अकाल था और दर्शक हिंदी या अन्य क्षेत्रीय भाषाओं की ओर रुख कर रहे थे। ऐसे दौर में एक ऐसी फिल्म आई जिसने न सिर्फ भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में नई जान फूंकी, बल्कि कमाई के ऐसे कीर्तिमान स्थापित किए जिन्हें आज तक कोई भी भोजपुरी फिल्म नहीं तोड़ पाई है।
हम बात कर रहे हैं साल 2003-2004 में सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर भोजपुरी फिल्म ‘ससुरा बड़ा पईसावाला’ की। इस फिल्म में मुख्य भूमिका में उस समय के मशहूर लोकगायक मनोज तिवारी और नई-नवेली अभिनेत्री रानी चटर्जी नजर आए थे। इस फिल्म ने रिलीज होते ही बॉक्स ऑफिस पर ऐसा तहलका मचाया कि न केवल बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड के सिनेमाघर हाउसफुल हो गए, बल्कि दिल्ली, मुंबई, गुजरात और पंजाब जैसे राज्यों में भी भोजपुरी भाषी दर्शक थिएटर्स की तरफ खिंचे चले आए।
30 लाख का बजट और 36 करोड़ का कलेक्शन: लागत से 120 गुना ज्यादा की छप्परफाड़ कमाई
फिल्म ‘ससुरा बड़ा पईसावाला’ के निर्माण और इसकी व्यावसायिक सफलता का गणित आज भी व्यापार विश्लेषकों (Trade Analysts) को हैरान कर देता है। निर्देशक अजय सिन्हा के मार्गदर्शन में बनी इस फिल्म का कुल बजट महज 30 लाख रुपये के आसपास था। उस दौर में सीमित संसाधनों और कम बजट के साथ बनाई गई इस फिल्म से किसी को इतनी बड़े चमत्कार की उम्मीद नहीं थी। लेकिन जब फिल्म रिलीज हुई, तो दर्शकों ने इसे हाथों-हाथ लिया और सिनेमाघरों के बाहर टिकट खिड़की पर लंबी-लंबी कतारें लग गईं।
बॉक्स ऑफिस आंकड़ों के अनुसार, ‘ससुरा बड़ा पईसावाला’ ने भारत और विदेश के थिएटर्स को मिलाकर लगभग 36 करोड़ रुपये का कुल कारोबार किया। यदि गणितीय दृष्टि से देखा जाए तो इस फिल्म ने अपने मूल बजट से 120 गुना (12,000%) अधिक का मुनाफा कमाया। यह भोजपुरी सिनेमा के इतिहास की पहली ऐसी फिल्म बनी जिसने 1 करोड़ रुपये के कलेक्शन का जादुई आंकड़ा सबसे पहले पार किया था। इसके बाद 5 करोड़, 10 करोड़ और देखते ही देखते 36 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक कलेक्शन खड़ा कर दिया। आज भी कई बड़ी बजट वाली भोजपुरी फिल्में बनती हैं, लेकिन लागत के अनुपात में 120 गुना मुनाफा कमाने का यह रिकॉर्ड आज तक कोई दूसरी फिल्म नहीं दोहरा सकी है।
लगातार 65 हफ्तों तक थिएटर्स में चली फिल्म: अनूठा सिल्वर और गोल्डन जुबली रिकॉर्ड
फिल्म ‘ससुरा बड़ा पईसावाला’ की सफलता केवल रुपयों की कमाई तक सीमित नहीं थी, बल्कि थिएटर्स में इसकी लंबे समय तक चलने की क्षमता (Longevity) ने भी एक नया इतिहास रचा था। आज के दौर में जहां फिल्में एक या दो हफ्ते के बाद ही थिएटर्स से उतर जाती हैं या ओटीटी (OTT) पर आ जाती हैं, वहीं उस समय ‘ससुरा बड़ा पईसावाला’ लगातार 65 हफ्तों तक थिएटर्स में सफलता से चलती रही।
बिहार और पूर्वांचल के कई शहरों के सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों में यह फिल्म 50 हफ्तों से भी ज्यादा समय तक हाउसफुल बोर्ड के साथ दिखाई गई। लोग ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और बसों में भरकर दूर-दराज के गांवों से सिनेमा हॉल तक फिल्म देखने आते थे। फिल्म के गानों और संवादों का खुमार लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा था। 65 हफ्तों का यह अटूट रिकॉर्ड आज भी भोजपुरी सिनेमा के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।
क्या थी ‘ससुरा बड़ा पईसावाला’ की कहानी और सफलता का राज?
फिल्म ‘ससुरा बड़ा पईसावाला’ की सफलता के पीछे इसकी सीधी-सच्ची, पारिवारिक और माटी से जुड़ी कहानी थी। फिल्म में मनोज तिवारी ने एक सीधे-साधे ग्रामीण युवक (राजा) का किरदार निभाया था, जबकि रानी चटर्जी ने एक अमीर और स्वाभिमानी लड़की (रानी) की भूमिका निभाई थी। दोनों के बीच प्यार होता है, लेकिन पारिवारिक और सामाजिक विषमताओं के कारण उनके रिश्ते का कड़ा विरोध होता है।
पारिवारिक विरोध और खींचतान के बावजूद दोनों शादी करने का फैसला करते हैं। इसके बाद दोनों परिवारों के बीच होने वाली खट्टी-मीठी तकरार, हास्य, इमोशन और अंत में एक सुखद पारिवारिक मिलन को पर्दे पर बहुत ही जीवंत तरीके से उतारा गया था। फिल्म के गाने जैसे ‘ससुरा बड़ा पईसावाला’, ‘जवानी ई त बाटे कंचन के ढेला’ और अन्य लोकगीत इतने बड़े हिट साबित हुए कि वे शादी-विवाह और हर मांगलिक अवसर की धड़कन बन गए। गानों की लोकप्रियता ने फिल्म के कलेक्शन में आग में घी का काम किया।
मनोज तिवारी और रानी चटर्जी का रातों-रात सुपरस्टार बनना
‘ससुरा बड़ा पईसावाला’ केवल एक सफल फिल्म नहीं थी, बल्कि इसने भोजपुरी इंडस्ट्री को दो बड़े दिग्गज सितारे भी दिए। इस फिल्म से पहले मनोज तिवारी मुख्य रूप से एक जाने-माने भोजपुरी लोकगायक और भजन गायक के रूप में पहचाने जाते थे। लेकिन इस फिल्म की एतिहासिक सफलता के बाद वे रातों-रात भोजपुरी सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार बन गए। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक कई हिट फिल्में दीं और आगे चलकर राजनीति में भी अपनी मजबूत पहचान बनाई।
वहीं दूसरी ओर, इस फिल्म से महज 14-15 साल की उम्र में डेब्यू करने वाली अभिनेत्री रानी चटर्जी रातों-रात स्टार बन गईं। उनकी अदायगी, अभिव्यक्ति और मनोज तिवारी के साथ उनकी केमिस्ट्री को दर्शकों ने खूब सराहा। इस फिल्म की सफलता के बाद रानी चटर्जी भोजपुरी सिनेमा की ‘क्वीन’ बनकर उभरीं और उन्होंने अगले दो दशकों तक इंडस्ट्री पर राज किया।
भोजपुरी सिनेमा का पुनर्जन्म और नई क्रांति का आगाज
यदि ‘ससुरा बड़ा पईसावाला’ नहीं आई होती, तो शायद आज का आधुनिक भोजपुरी सिनेमा इस मुकाम पर न होता। इस फिल्म की अपार व्यावसायिक सफलता ने मुंबई और बिहार के फिल्म निर्माताओं को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि भोजपुरी भाषा में सिनेमा का बहुत बड़ा और आर्थिक रूप से समृद्ध बाजार मौजूद है।
इस फिल्म के बाद भोजपुरी फिल्म उद्योग में कॉरपोरेट और बड़े निवेशकों की एंट्री हुई। इसके बाद ‘बंधन टूटे ना’, ‘निरहुआ रिक्शावाला’, ‘प्रतिज्ञा’ जैसी सुपरहिट फिल्मों की झड़ी लग गई और दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’, पवन सिंह, खेसारी लाल यादव और रवि किशन जैसे नए सितारों के लिए रास्ते खुल गए। ‘ससुरा बड़ा पईसावाला’ ने यह साबित कर दिया था कि यदि कहानी अपनी संस्कृति, माटी की महक और दर्शकों की पसंद के अनुकूल हो, तो छोटे बजट की फिल्म भी बॉक्स ऑफिस पर बड़े-बड़े रिकॉर्ड ध्वस्त कर सकती है।
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