
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) के वालूज एमआईडीसी क्षेत्र में एक हाई-प्रोफाइल घटनाक्रम के तहत नीट परीक्षा धांधली आंदोलन से चर्चा में आए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके का अपनी सुरक्षा में तैनात एक पुलिस उपनिरीक्षक (PSI) के साथ तीखी बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। अपने आवास पर लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करने और आगंतुकों के साथ कथित दुर्व्यवहार से नाराज 30 वर्षीय युवा नेता अभिजीत दीपके ने ऑन-ड्यूटी पुलिसकर्मी को फटकार लगाते हुए सीधे तौर पर कहा, “आप दिल्ली पुलिस जैसा व्यवहार मत कीजिए”। दीपके ने न केवल उस पुलिस अधिकारी को अपने घर के परिसर से तुरंत बाहर जाने के लिए कहा, बल्कि फोन पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से संपर्क कर उस पुलिसकर्मी को अपनी सुरक्षा व्यवस्था से तुरंत हटाने और अपने आवास के बाहर सादे कपड़ों में घूम रहे सीआईडी जवानों की संदिग्ध गतिविधियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इस घटना का वीडियो सामने आते ही महाराष्ट्र के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है।
‘आप नहीं तय करेंगे कि मैं किससे मिलूं’: जानिए क्या है वायरल वीडियो की पूरी कहानी
छत्रपति संभाजीनगर के वालूज एमआईडीसी स्थित अभिजीत दीपके के निजी आवास पर हुई इस घटना के दो अलग-अलग वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं। पहले 56 सेकंड के वीडियो में सादे कपड़ों में मौजूद सुरक्षा में तैनात उपनिरीक्षक (PSI) सुरेश के साथ दीपके की तीखी बहस होती दिखाई दे रही है। वीडियो में दीपके पुलिस अधिकारी के व्यवहार पर आपत्ति जताते हुए कहते हैं, “जब मैं खुद लोगों को अपने घर बुला रहा हूं और उनसे मिलना चाहता हूं, तो आपको उन्हें अंदर आने देने में क्या समस्या है? आप दिल्ली पुलिस की तरह व्यवहार क्यों कर रहे हैं?” दीपके ने आगे कहा कि आज तक उनके आवास पर कोई अप्रिय घटना या सुरक्षा समस्या नहीं हुई है और वे उस अधिकारी को पहली बार देख रहे हैं। दीपके ने कड़े शब्दों में कहा कि पुलिस या सुरक्षा एजेंसियां उन्हें यह निर्देश नहीं दे सकतीं कि उन्हें किससे मिलना चाहिए और किससे नहीं।
बहस के दौरान दीपके ने स्पष्ट लहजे में पुलिसकर्मी को अपने घर के दायरे से बाहर जाने को कहा। उन्होंने कहा, “आप कृपया बाहर जाइए, मैं आपको अपने घर के अंदर नहीं चाहता”। दीपके का आरोप था कि सुरक्षा के नाम पर तैनात यह अधिकारी उनके पास आने वाले छात्रों, समर्थकों और स्थानीय नागरिकों को बिना वजह रोक रहा था और उनके साथ बेहद कड़ा तथा अमर्यादित व्यवहार कर रहा था। उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक या सामाजिक नेता के पास आने वाले लोगों पर इस तरह का अनाधिकृत प्रतिबंध लगाना उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से शिकायत और ‘हिट स्प्रे’ व्हाट्सएप ग्रुप का सनसनीखेज दावा
घटना के दूसरे वीडियो में CJP के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से फोन पर बातचीत करते नजर आ रहे हैं। फोन पर दीपके ने अपनी शिकायत दोहराते हुए कहा, “सुरेश नाम का एक पीएसआई यहां तैनात किया गया है जो मेरे पास आने वाले मेहमानों और लोगों के साथ बहुत बदतमीजी कर रहा है। वह लोगों को जबरन बाहर जाने के लिए कह रहा है। क्या यह सब जानबूझकर किया जा रहा है? मुझे ऐसा अधिकारी नहीं चाहिए, उसे तुरंत यहां से हटाया जाए”। इस फोन कॉल के दौरान दीपके ने महाराष्ट्र राज्य गुप्तवार्ता/आपराधिक जांच विभाग (CID) के कर्मियों पर भी अपने घर के आसपास जासूसी करने का गंभीर आरोप लगाया।
दीपके ने फोन पर वरिष्ठ अधिकारी को बताया कि एक स्थानीय पत्रकार ने उनके आवास के आसपास सादे कपड़ों में घूम रहे कुछ संदिग्ध लोगों को देखा था। जब पुलिस ने उनसे पूछताछ की तो उन्होंने खुलासा किया कि वे राज्य सीआईडी (CID) के जवान हैं। दीपके के अनुसार, पत्रकार ने देखा कि उन सीआईडी कर्मियों के मोबाइल फोन पर एक व्हाट्सएप ग्रुप खुला हुआ था जिसका नाम ‘हिट स्प्रे’ (Hit Spray) रखा गया था। दीपके ने आरोप लगाया कि सीआईडी के लोग उनके आवास के बाहर से लगातार पल-पल की रिपोर्ट उसी ‘हिट स्प्रे’ ग्रुप में भेज रहे थे। दीपके ने सवाल उठाया कि क्या एक शांतिपूर्ण आंदोलन चलाने वाले नागरिक और युवा संगठन के प्रमुख पर इस तरह से अवैध निगरानी और जासूसी कराई जा रही है? हालांकि, इस पूरे मामले पर वालूज एमआईडीसी क्षेत्र के अधिकार क्षेत्र वाले पुलिस उपायुक्त (DCP) पंकज अतुलकर या पुलिस विभाग की ओर से तुरंत कोई आधिकारिक सफाई जारी नहीं की गई है।
जंतर-मंतर से मिली पहचान और घर पर सुरक्षा बल की तैनाती का पूरा बैकग्राउंड
उल्लेखनीय है कि अभिजीत दीपके हाल के महीनों में देश के सबसे चर्चित युवा चेहरों में से एक बनकर उभरे हैं। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) में कथित धांधली और पेपर लीक के खिलाफ नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले हुए विशाल छात्र आंदोलन की अगुवाई दीपके ने ही की थी। जंतर-मंतर पर हुए इस ऐतिहासिक आंदोलन, सोनम वांगचुक के समर्थन और देशव्यापी छात्र आक्रोश के बाद तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा तक देना पड़ा था। इस आंदोलन की सफलता के बाद CJP ने हाल ही में अपने संगठनात्मक ढांचे की घोषणा की है, जिसमें बोस्टन यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र रहे अभिजीत दीपके को राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया है।
जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान और उसके बाद दीपके को मिली लगातार धमकियों और उनके आवास पर प्रतिदिन उमड़ने वाली समर्थकों व मीडियाकर्मियों की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन द्वारा छत्रपति संभाजीनगर स्थित उनके घर पर सुरक्षा गार्ड और पुलिस बल तैनात किया गया था। लेकिन सुरक्षाकर्मियों द्वारा भीड़ प्रबंधन के नाम पर आगंतुकों को रोकने और निगरानी बढ़ाने की वजह से यह विवाद उत्पन्न हो गया। दीपके का मानना है कि सुरक्षा का मतलब किसी व्यक्ति को उसके समर्थकों और जनता से अलग-थलग करना या उस पर सरकारी निगरानी बिठाना नहीं हो सकता।
‘दिल्ली पुलिस’ से तुलना के मायने और स्थानीय प्रशासन में मची हलचल
दीपके द्वारा पुलिस अधिकारी को “दिल्ली पुलिस जैसा व्यवहार मत करो” कहने के पीछे एक गहरा राजनीतिक और भावनात्मक संदर्भ है। दरअसल, 20 जुलाई की रात नई दिल्ली में जंतर-मंतर पर संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारी छात्रों पर दिल्ली पुलिस, सीआरपीएफ और रैपिड एक्शन फोर्स द्वारा की गई कड़ी कार्रवाई और बल प्रयोग की घटना से दीपके और उनके साथी काफी आहत हुए थे। उस दौरान दिल्ली पुलिस ने पूरे जंतर-मंतर क्षेत्र की बिजली काटकर और बैरिकेडिंग करके आंदोलन को दबाने का प्रयास किया था। उसी संदर्भ को याद करते हुए दीपके ने महाराष्ट्र पुलिस के रवैये की तुलना दिल्ली पुलिस की उस सख्त और आक्रामक कार्यशैली से कर दी।
महाराष्ट्र के पुलिस महकमे में इस वीडियो के सामने आने के बाद हड़कंप मचा हुआ है। एक ओर जहां पुलिस अधिकारी ऑन-ड्यूटी सुरक्षाकर्मी से किए गए इस तरह के सीधे सवाल-जवाब को अनुशासन के नजरिए से देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर CJP समर्थकों और आम जनता का कहना है कि पुलिस को किसी भी नेता या नागरिक के पास आने वाले लोगों को परेशान करने का अधिकार नहीं है। सीआईडी के ‘हिट स्प्रे’ व्हाट्सएप ग्रुप को लेकर लगाए गए आरोपों ने इस मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। अब देखना यह होगा कि छत्रपति संभाजीनगर पुलिस प्रशासन इस सुरक्षा विवाद पर क्या कदम उठाता है और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।
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