
हिंदी सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित खलनायक ‘गब्बर सिंह’ यानी अमजद खान के बेटे शादाब खान इन दिनों मीडिया और कूटनीतिक गलियारों में अपने एक बेबाक इंटरव्यू को लेकर सुर्खियों में छाए हुए हैं। शादाब खान, जिन्होंने साल 1996 में अभिनेत्री रानी मुखर्जी के साथ फिल्म ‘राजा की आएगी बारात’ से बॉलीवुड में अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी, हाल के वर्षों में ‘स्कैम 1992: द हर्षद मेहता स्टोरी’ में ‘अजय केडिया’ के दमदार किरदार में नजर आ चुके हैं। अब उन्होंने एक लेटेस्ट इंटरव्यू में अपनी प्रोफेशनल लाइफ और पिता की विरासत को लेकर कई हैरान करने वाले खुलासे किए हैं, जिसमें रणवीर सिंह स्टारर मेगा-बजट फिल्म ‘धुरंधर’ से उनके बाहर होने की कहानी भी शामिल है।
‘धुरंधर’ के हाथ से निकलने की वजह: फिजिकैलिटी बनी बड़ी रुकावट
दिग्गज पत्रकार विक्की लालवानी को दिए इंटरव्यू में शादाब खान ने बताया कि हाल ही में आई और बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचाने वाली रणवीर सिंह स्टारर फिल्म ‘धुरंधर’ में एक बेहद महत्वपूर्ण और सॉलिड रोल के लिए उन्हें अप्रोच किया गया था। शादाब के अनुसार, मशहूर कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा की कंपनी की तरफ से उन्हें इस किरदार के लिए बकायदा फोन आया था।
उन्होंने बताया, “मैंने उस रोल के लिए ऑडिशन दिया और एक्टिंग के लिहाज से मेरा ऑडिशन बहुत ही शानदार रहा था। मेकर्स भी उससे काफी प्रभावित थे।” लेकिन बेहतरीन एक्टिंग के बावजूद आखिरकार शादाब को उस रोल के लिए रिजेक्ट कर दिया गया। इसकी वजह का खुलासा करते हुए शादाब ने कहा कि उस किरदार की मांग के हिसाब से उनकी शारीरिक बनावट (Physicallity) फिट नहीं बैठ रही थी। वह उस रोल के लिए शारीरिक रूप से तैयार नहीं थे, जिसके कारण वह बड़ी फिल्म उनके हाथ से निकल गई और बाद में वह किरदार किसी अन्य बॉलीवुड अभिनेता को सौंप दिया गया। हालांकि, कूटनीतिक शालीनता दिखाते हुए शादाब ने उस मुख्य किरदार के नाम का खुलासा करने से साफ इनकार कर दिया।
‘हजारों करोड़ कमाने वाली फिल्में एक तरफ, शोले एक तरफ’
इंटरव्यू के दौरान जब शादाब खान से भारतीय सिनेमा के इतिहास और बॉक्स ऑफिस को लेकर एक बेहद संवेदनशील सवाल पूछा गया कि “क्या आज के दौर की भारी-भरकम कमाई के बावजूद ‘शोले’ (Sholay) ही भारत की अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक फिल्म है?”
इसके जवाब में शादाब ने बेहद तार्किक और संतुलित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “इसमें रत्ती भर भी शक नहीं होना चाहिए कि ‘शोले’ भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे बड़ी और कालजयी फिल्म है। वह अपने दौर की सबसे बड़ी कमर्शियल ब्लॉकबस्टर होने के साथ-साथ हमारे पॉपुलर कल्चर (जनमानस की संस्कृति) का एक अटूट हिस्सा बन चुकी है।”
शादाब ने समकालीन सिनेमा की तारीफ करते हुए आगे कहा, “आज के समय में निश्चित तौर पर तकनीकी रूप से बेहद उन्नत और भव्य ब्लॉकबस्टर फिल्में बन रही हैं। ये फिल्में बॉक्स ऑफिस पर 1000 करोड़ और 1500 करोड़ रुपये का कलेक्शन कर रही हैं, जिसका पूरा श्रेय आज के निर्देशकों और फिल्म मेकर्स की कड़ी मेहनत को जाता है। लेकिन ‘शोले’ आज भी नंबर वन और आइकॉनिक इसलिए है क्योंकि वह पिछले 50 सालों से दर्शकों के दिलों में उसी शीर्ष स्थान पर अडिग खड़ी है। यह एक बिल्कुल अलग और असाधारण बात है।”
पॉपुलैरिटी बॉक्स ऑफिस के नंबरों की मोहताज नहीं
शादाब खान ने फिल्म ‘धुरंधर’ की भव्यता और कहानी की जमकर सराहना की, लेकिन उन्होंने साफ लहजे में कहा कि आज की किसी भी आधुनिक ब्लॉकबस्टर फिल्म की तुलना ‘शोले’ से करना पूरी तरह बेमानी और गलत है। उन्होंने तर्क दिया, “‘शोले’ की लोकप्रियता और उसकी लेगेसी केवल बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों या नंबरों तक सीमित नहीं है। अगर कोई फिल्म रिलीज होने के 50 साल बाद भी सिनेमा प्रेमियों द्वारा इसी तरह सेलिब्रेट की जा सकती है, हर पीढ़ी को उसके डायलॉग्स और किरदार जुबानी याद रहते हैं, तो भविष्य में कभी ऐसी फिल्मों की तुलना संभव हो सकती है, लेकिन मौजूदा दौर में तो बिल्कुल नहीं।
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