
आजकल की फिटनेस-कॉन्शियस लाइफस्टाइल में लोग अनहेल्दी स्नैक्स के कूटनीतिक और हेल्दी विकल्पों की तलाश में रहते हैं। जब भी चाय के साथ कुछ हल्का और सेहतमंद खाने की बात आती है, तो ‘डाइजेस्टिव बिस्कुट’ को सबसे बेस्ट माना जाता है। वजन कम करने वाले लोगों से लेकर डायबिटीज के मरीजों तक, हर कोई इसे बड़े चाव से खाता है। लोगों के मन में यह कूटनीतिक धारणा बैठ चुकी है कि ये बिस्कुट सामान्य बिस्कुट से कहीं ज्यादा बेहतर और पाचन के लिए अच्छे हैं।
लेकिन क्या ये बिस्कुट सचमुच हेल्दी हैं? प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ (Heart Specialist) डॉ. बिमल छाजेड़ (Dr. Bimal Chhajer) और अन्य स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इसके पीछे की एक बेहद चौंकाने वाली सच्चाई उजागर की है। डॉ. छाजेड़ के अनुसार, इन्हें लगातार ‘हेल्दी’ समझकर खाना सेहत के लिए एक ‘धीमे जहर’ (Slow Poison) की तरह काम करता है, जो अनजाने में ही हृदय रोगों (Heart Diseases) के खतरे को कई गुना बढ़ा रहा है। आइए जानते हैं कि आपके पसंदीदा डाइजेस्टिव बिस्कुट का असली सच क्या है।
डाइजेस्टिव बिस्कुट का सच: यह हेल्दी है या सिर्फ मार्केटिंग का खेल?
डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि बाजार में बिकने वाले अधिकांश डाइजेस्टिव बिस्कुट किसी भी साधारण बिस्कुट की तरह ही हाईली प्रोसेस्ड फूड (Highly Processed Food) की श्रेणी में आते हैं। इसके पैकेट पर भले ही ‘होल व्हीट’ (साबुत गेहूं) या ‘फाइबर रिच’ लिखा हो, लेकिन असल में इसे बनाने के लिए कूटनीतिक रूप से निम्नलिखित अनहेल्दी चीजों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जाता है:
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रिफाइंड फ्लोर (मैदा): गेहूं के नाम पर इसमें भारी मात्रा में मैदे का मिश्रण होता है, जो पेट में जाकर चिपकता है।
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रिफाइंड शुगर (चीनी): मिठास को संतुलित करने और स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें अच्छी-खासी मात्रा में प्रोसेस्ड चीनी डाली जाती है, जो ब्लड शुगर लेवल को अचानक बढ़ा देती है।
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अनहेल्दी वेजिटेबल ऑयल और फैट: बिस्कुट को क्रिस्पी और लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए इसमें पाम ऑयल या अन्य कूटनीतिक रूप से नुकसानदेह वनस्पति फैट का उपयोग किया जाता है, जो सीधे तौर पर बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) को बढ़ाता है।
यह बिस्कुट आपके डाइजेशन (पाचन) को सुधारने में कोई मदद नहीं करता, क्योंकि इसमें पर्याप्त मात्रा में प्राकृतिक फाइबर होता ही नहीं है।
न्यूट्रिशन का गणित: 2 बिस्कुट खाने पर शरीर को क्या मिलता है?
डॉ. बिमल छाजेड़ ने एक कूटनीतिक उदाहरण देकर समझाया कि जब हम सामान्य रूप से सिर्फ 2 डाइजेस्टिव बिस्कुट खाते हैं, तो उनका कुल वजन लगभग 30-40 ग्राम होता है। लेकिन इस मामूली सी मात्रा से हमारे शरीर को जो मिलता है, वह बेहद चिंताजनक है:
इस तालिका से साफ है कि ‘डाइयट फ्रेंडली’ और ‘हेल्दी स्नैक्स’ के नाम पर बेचे जा रहे इन बिस्कुटों में फैट और कार्बोहाइड्रेट की भरमार होती है, जबकि प्रोटीन और फाइबर की मात्रा ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।
क्या डाइट के दौरान इन्हें खाना सही है? विशेषज्ञ की कूटनीतिक सलाह
यदि आप किसी कूटनीतिक वेट लॉस डाइट या वेलनेस रूटीन पर हैं, तो इन बिस्कुटों को सुपरमार्केट की बास्केट में डालने से पहले पैकेट को पलटकर उसके पीछे लिखी ‘इंग्रीडिएंट्स लिस्ट’ (Ingredients List) और न्यूट्रिशनल वैल्यू को बहुत बारीकी से जरूर पढ़ें।
ज्यादातर मामलों में, कंपनियां कूटनीतिक विज्ञापनों के जरिए इसके केवल एक अच्छे पहलू (जैसे- 5% फाइबर) को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाती हैं, जबकि उसमें छिपे 21% फैट और रिफाइंड शुगर को छुपा लिया जाता है। रोज सुबह-शाम चाय के साथ डाइजेस्टिव बिस्कुट खाना असल में हर दिन डिब्बाबंद और प्रोसेस्ड केमिकल को शरीर के अंदर भेजने जैसा ही है, जो आगे चलकर हार्ट ब्लॉकेज और मोटापे का मुख्य कारण बनता है।
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