बॉलीवुड के बेहतरीन अभिनेताओं में शुमार पंकज त्रिपाठी आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं. अपनी दमदार अदाकारी से उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में एक खास मुकाम हासिल किया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जहां पंकज त्रिपाठी मुंबई की चकाचौंध में रहते हैं, वहीं उनके सबसे बड़े भाई बिजेंद्र नाथ त्रिपाठी (Bijendra Nath Tripathi) आज भी लाइमलाइट और मीडिया से कोसों दूर रहते हैं. आइए जानते हैं कि कौन हैं बिजेंद्र नाथ त्रिपाठी, वह गांव में क्या करते हैं और उन्होंने अपने सुपरस्टार भाई से अलग गांव में ही रहने का फैसला क्यों किया.
मिट्टी से जुड़े हैं बिजेंद्र नाथ, गांव में रहकर करते हैं किसानी
पंकज त्रिपाठी के सबसे बड़े भाई बिजेंद्र नाथ त्रिपाठी बिहार के गोपालगंज जिले के बेलसंड गांव में रहते हैं. जहां पंकज त्रिपाठी रुपहले पर्दे पर अपनी अदाकारी का जलवा बिखेरते हैं, वहीं उनके बड़े भाई बिजेंद्र ने अपनी जड़ों से जुड़े रहना पसंद किया. वह गांव में एक बेहद साधारण और सुकून भरी जिंदगी जीते हैं. पेशे से वह एक किसान हैं और खेती-बाड़ी करके अपना जीवन यापन करते हैं. बिजेंद्र ने उस ग्रामीण परिवेश को कभी नहीं छोड़ा, जिसे पीछे छोड़कर पंकज त्रिपाठी अपने सपनों को पूरा करने मुंबई चले गए थे.
आखिर क्यों चुना भाई से अलग गांव में ही रहने का रास्ता?
पंकज त्रिपाठी और बिजेंद्र नाथ के दिवंगत पिता पंडित बनारस तिवारी गांव के एक जाने-माने किसान और पुरोहित थे. उनका पूरा परिवार हमेशा से किसानी और पूजा-पाठ से जुड़ा रहा है. पंकज त्रिपाठी के मुंबई में एक सफल और बड़े स्टार बनने के बाद बिजेंद्र के पास भी शहर में आकर ऐशो-आराम की जिंदगी जीने का पूरा मौका था. लेकिन, अपनी मिट्टी और पैतृक संपत्ति के प्रति उनके गहरे लगाव ने उन्हें गांव में ही रोके रखा. बिजेंद्र ने गांव में रहकर ही अपने माता-पिता की सेवा करने और परिवार की खेती-बाड़ी को संभालने की बड़ी जिम्मेदारी उठाई.
सामाजिक कार्यों में रुचि और ‘पंडित बनारस तिवारी फाउंडेशन’
पंकज त्रिपाठी ने कई साक्षात्कारों में इस बात का जिक्र किया है कि उनका परिवार बेहद जमीन से जुड़ा हुआ है. उनके बड़े भाई बिजेंद्र को बॉलीवुड की पार्टियों, ग्लैमर या फेम में रत्ती भर भी दिलचस्पी नहीं है. वह गांव के लोगों के सुख-दुख में शामिल होना और उनकी मदद करना ज्यादा पसंद करते हैं.
दोनों भाइयों ने मिलकर अपने माता-पिता के सम्मान में ‘पंडित बनारस तिवारी फाउंडेशन ट्रस्ट’ की स्थापना की है. बिजेंद्र नाथ गांव में रहकर इस ट्रस्ट के जरिए कई सामाजिक कार्यों की देखरेख करते हैं. इस फाउंडेशन के माध्यम से उन्होंने गांव में स्कूल बनवाने, सोलर लाइट लगवाने और बुनियादी ढांचे की मरम्मत करवाने जैसे कई सराहनीय काम किए हैं.
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