मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच जारी भीषण तनाव और बदलते सुरक्षा परिदृश्य ने खाड़ी देशों को अपनी रक्षा नीतियों पर नए सिरे से विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है. इसी कड़ी में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अपनी सैन्य क्षमताओं को अभूतपूर्व रूप से मजबूत करने के लिए एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है. अबू धाबी ने भारत से दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल (BrahMos Cruise Missile) और भारत की स्वदेशी ‘आकाशतीर’ वायु रक्षा प्रणाली (Akashteer Air Defence System) हासिल करने के लिए औपचारिक प्रारंभिक बातचीत शुरू कर दी है.
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की सुरक्षा का बड़ा संकट
हाल के महीनों में मिडिल ईस्ट में हुए भीषण मिसाइल और आत्मघाती ड्रोन हमलों के खतरे को देखते हुए यूएई अपनी रक्षा खरीद नीति का पुनर्मूल्यांकन कर रहा है. यूएई के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंता रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ की सुरक्षा को चाक-चौबंद करना है.
दरअसल, यूएई का अधिकांश कच्चे तेल का निर्यात इसी समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है, जिस पर युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं. अबू धाबी की कोशिश है कि वह हथियारों के लिए केवल किसी एक देश (जैसे अमेरिका) पर निर्भर न रहकर अपने रक्षा आपूर्तिकर्ताओं में विविधता लाए और नए हवाई खतरों का मुकाबला करने के लिए भारत जैसे विश्वसनीय देश के साथ हाथ मिलाए.
दुनिया की सबसे तेज मिसाइल ‘ब्रह्मोस’ और ‘आकाशतीर’ क्यों हैं खास?
यूएई ने भारत की जिन दो रक्षा प्रणालियों में सबसे ज्यादा दिलचस्पी दिखाई है, उनकी ताकत पूरी दुनिया मानती है:
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ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल: भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम द्वारा विकसित ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज परिचालन सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है. इसे जमीन, समुद्र, युद्धपोत और लड़ाकू विमान से बेहद आसानी से दागा जा सकता है. इसके निर्यात संस्करण (Export Version) की मारक क्षमता करीब 290 किलोमीटर है. चूंकि इसे रूस के सहयोग से बनाया गया है, इसलिए इसके निर्यात के लिए मॉस्को की सहमति जरूरी होगी. हालांकि, रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि रूस और यूएई के बेहतरीन संबंधों के चलते इस मंजूरी में कोई अड़चन नहीं आएगी.
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आकाशतीर एयर डिफेंस सिस्टम: यह पूरी तरह से स्वचालित (Fully Automated) वायु रक्षा कमांड और कंट्रोल सिस्टम है, जिसे भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) ने भारतीय सेना की जरूरतों के मुताबिक तैयार किया है. यह दुश्मन के ड्रोन, मिसाइल या लड़ाकू विमान का त्वरित पता लगाने और उन्हें हवा में ही नष्ट करने के लिए विभिन्न सेंसरों और हथियार प्लेटफॉर्मों को एक साथ जोड़ता है.
यूएई के पास पहले से ही अमेरिका की आधुनिक ‘थाड’ (THAAD) और पैट्रियट मिसाइल प्रणालियां मौजूद हैं. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का आकाशतीर सिस्टम इन अमेरिकी प्रणालियों के बीच एक बेहतरीन रीयल-टाइम समन्वय (Coordination) स्थापित करने में गेम-चेंजर साबित होगा.
भारत-UAE रणनीतिक साझेदारी में नया अध्याय
यह महत्वपूर्ण रक्षा चर्चा दोनों देशों के बीच तेजी से मजबूत हो रहे द्विपक्षीय और रणनीतिक संबंधों का हिस्सा है. भारत और यूएई ने हाल के वर्षों में व्यापार, निवेश और ऊर्जा के साथ-साथ संयुक्त हथियार विकास (Joint Weapons Development) में भी कदम आगे बढ़ाए हैं.
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह प्रस्तावित रक्षा सौदा नई दिल्ली की अबू धाबी के साथ साझेदारी को एक नए स्तर पर ले जाएगा, खासकर ऐसे समय में जब पड़ोसी देश सऊदी अरब और पाकिस्तान भी अपना रक्षा सहयोग बढ़ा रहे हैं. दक्षिण एशिया सुरक्षा मामलों की विशेषज्ञ पर्ल पंड्या के अनुसार, भारत-यूएई के इस बढ़ते रक्षा गठजोड़ को क्षेत्रीय भू-राजनीति और खाड़ी देशों में नेतृत्व की आपसी प्रतिस्पर्धा के चश्मे से भी देखा जाना चाहिए.
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा भारत का रक्षा निर्यात
भारत सरकार के लगातार प्रयासों और ‘मेक इन इंडिया’ नीति के चलते वैश्विक स्तर पर भारतीय हथियारों की साख तेजी से बढ़ी है. मार्च 2026 में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में भारत का रक्षा निर्यात ₹37,868 करोड़ ($4 अरब) के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गया है, जो साल 2013-14 में महज ₹68 करोड़ था.
मई 2025 में पाकिस्तान के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान ब्रह्मोस मिसाइल के सफल और अचूक इस्तेमाल ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय हथियारों की विश्वसनीयता पर मुहर लगा दी थी. भारत पहले ही फिलीपींस, वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देशों को ब्रह्मोस मिसाइलों का सफल निर्यात कर चुका है, और अब यूएई जैसे शक्तिशाली खाड़ी देश का भारत की तरफ हाथ बढ़ाना भारतीय रक्षा उद्योग के लिए एक बहुत बड़ी वैश्विक उपलब्धि है.
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