
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान की सैन्य रणनीति एक बार फिर चर्चा में है। खासतौर पर “मोजेक डिफेंस” (Mosaic Defense) नाम की रणनीति को लेकर दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों की नजरें टिकी हुई हैं। इस रणनीति के पीछे जिस शख्स का नाम सबसे ज्यादा लिया जाता है, वह हैं ईरान के पूर्व सैन्य कमांडर मोहम्मद अली जाफरी। माना जाता है कि उनकी बनाई इस रणनीति ने ईरान को इजरायल और अमेरिका जैसे शक्तिशाली देशों के सामने मजबूती से खड़ा होने की क्षमता दी है।
कौन हैं मोहम्मद अली जाफरी
मोहम्मद अली जाफरी ईरान के प्रमुख सैन्य अधिकारियों में गिने जाते हैं। वह इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के पूर्व कमांडर-इन-चीफ रह चुके हैं। उन्होंने 2007 से 2019 तक इस महत्वपूर्ण सैन्य संगठन का नेतृत्व किया।
जाफरी को ईरान की रक्षा नीति में बड़े बदलावों का श्रेय दिया जाता है। उनके नेतृत्व में ईरान ने पारंपरिक युद्ध की बजाय असममित युद्ध (Asymmetric Warfare) और विकेंद्रित सैन्य रणनीति को अपनाने पर जोर दिया। यही सोच आगे चलकर “मोजेक डिफेंस” रणनीति के रूप में सामने आई।
क्या है ‘मोजेक डिफेंस’ रणनीति
“मोजेक डिफेंस” का अर्थ है युद्ध की स्थिति में पूरे देश को छोटे-छोटे सैन्य क्षेत्रों में बांटकर लड़ाई लड़ना। इस रणनीति में सेना की कमान पूरी तरह केंद्रीकृत नहीं रहती, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों में मौजूद सैन्य इकाइयों को स्वतंत्र रूप से कार्रवाई करने की क्षमता दी जाती है।
इसका फायदा यह होता है कि यदि किसी बड़े सैन्य ठिकाने या कमांड सेंटर पर हमला हो भी जाए, तो बाकी इकाइयां स्वतः सक्रिय रहकर जवाबी कार्रवाई जारी रख सकती हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीति खासतौर पर अमेरिका और इजरायल जैसे तकनीकी रूप से उन्नत देशों के खिलाफ तैयार की गई थी।
ईरान की सैन्य रणनीति में बड़ा बदलाव
जाफरी के नेतृत्व में ईरान ने अपनी सैन्य तैयारी को पूरी तरह नए ढंग से ढाला। पारंपरिक बड़े सैन्य ठिकानों की बजाय छोटे-छोटे मोबाइल यूनिट्स, मिसाइल बेस और स्थानीय लड़ाकू नेटवर्क तैयार किए गए।
इसके साथ ही ईरान ने मिसाइल तकनीक, ड्रोन और क्षेत्रीय सहयोगी संगठनों के जरिए अपनी सामरिक ताकत बढ़ाने पर भी जोर दिया। यही वजह है कि पश्चिमी देशों के दबाव और प्रतिबंधों के बावजूद ईरान क्षेत्रीय राजनीति में मजबूत खिलाड़ी बना हुआ है।
इजरायल और अमेरिका के लिए क्यों चुनौती
विशेषज्ञों के मुताबिक “मोजेक डिफेंस” रणनीति का सबसे बड़ा उद्देश्य यह है कि किसी भी बड़े हमले के बावजूद देश की रक्षा प्रणाली पूरी तरह ध्वस्त न हो।
इस मॉडल में युद्ध केवल सेना ही नहीं बल्कि स्थानीय स्तर पर मौजूद नेटवर्क और संसाधनों के जरिए भी लड़ा जा सकता है। यही कारण है कि कई विश्लेषकों का मानना है कि यदि बड़े स्तर पर संघर्ष होता है तो ईरान की यह रणनीति इजरायल और अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा
मध्य पूर्व में लगातार बदलते हालात के बीच मोहम्मद अली जाफरी और उनकी “मोजेक डिफेंस” रणनीति पर अंतरराष्ट्रीय सैन्य विशेषज्ञ लगातार अध्ययन कर रहे हैं। कई रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि आधुनिक युद्ध में विकेंद्रित सैन्य मॉडल भविष्य की रणनीतियों को भी प्रभावित कर सकता है।
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