नई दिल्ली | विशेष संवाददाता लोकसभा में मंगलवार को नजारा उस वक्त बेहद गर्मागर्म हो गया जब स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हुई। सदन की कार्यवाही के दौरान नियमों और संवैधानिक मर्यादाओं को लेकर पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। बहस की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने आसन की निष्पक्षता और नियमों पर सवाल उठाए, जिसका जवाब देने के लिए खुद गृह मंत्री अमित शाह को अपनी सीट से खड़ा होना पड़ा।
नियमों की व्याख्या पर छिड़ा ‘वाकयुद्ध’
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरू करते ही संविधान के अनुच्छेद 96 का हवाला देते हुए आसन पर बैठे पैनल चेयरमैन जगदंबिका पाल की उपस्थिति पर आपत्ति दर्ज कराई। गोगोई का तर्क था कि जब स्पीकर या डिप्टी स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव हो, तो उनकी गैर-मौजूदगी में कौन चेयर पर बैठेगा, यह सदन को तय करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पैनल के चयन में नियमों का उल्लंघन हुआ है और विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए ‘माइक’ को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
अमित शाह का पलटवार: “स्पीकर का कार्यालय कभी खत्म नहीं होता”
जब विपक्षी सांसदों का शोर बढ़ा, तो गृह मंत्री अमित शाह ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने गौरव गोगोई के दावों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्षी सांसद संविधान की गलत व्याख्या कर रहे हैं। शाह ने स्पष्ट किया, “प्रिसाइड (आसीन होना) शब्द के प्रयोग से स्पीकर का कार्यालय खत्म नहीं हो जाता। सदन भंग हो जाए या चुनाव चल रहे हों, तब भी स्पीकर का पद तब तक बना रहता है जब तक कि नए अध्यक्ष का चुनाव न हो जाए।” उन्होंने जोर देकर कहा कि अविश्वास प्रस्ताव के दौरान भी सदन का संचालन स्थापित नियमों के तहत ही होता है।
“व्यक्ति से नहीं, व्यवस्था से है लड़ाई” – गौरव गोगोई
गौरव गोगोई ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव ओम बिरला के व्यक्तिगत व्यक्तित्व के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा, “हम दुखी हैं कि हमें यह प्रस्ताव लाना पड़ा, लेकिन संसद की गरिमा बचाने के लिए हम मजबूर हैं। स्पीकर सरकार की आवाज नहीं, बल्कि सदन का संरक्षक होता है।” गोगोई ने जीवी मावलंकर और सोमनाथ चटर्जी जैसे पूर्व अध्यक्षों का उदाहरण देते हुए कहा कि अध्यक्ष को संवैधानिक नैतिकता और निष्पक्षता का पालन करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि देश में 200 से ज्यादा विपक्षी सांसद होने के बावजूद डिप्टी स्पीकर का पद खाली क्यों है?
जगदंबिका पाल की रूलिंग: नियमों के तहत ही है संचालन
विपक्ष के हंगामे के बीच चेयर पर आसीन जगदंबिका पाल ने व्यवस्था देते हुए कहा कि अनुच्छेद 95(2) के अनुसार सदन की प्रक्रिया तय होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में आसन पर बैठने का निर्णय स्पीकर की शक्तियों के तहत ही लिया गया है और इसमें किसी संवैधानिक मर्यादा का उल्लंघन नहीं हुआ है। पाल ने यह भी याद दिलाया कि सदन भंग होने की स्थिति में भी अध्यक्ष का पद नई सरकार के गठन तक सुरक्षित रहता है।
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