यूक्रेन युद्ध के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने पूरी दुनिया के रक्षा विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है। जहां एक ओर पुतिन युद्ध के अंत की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर रूस ने अपनी सबसे घातक इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) ‘सरमत’ (RS-28 Sarmat) का सफल परीक्षण कर अपनी परमाणु शक्ति का लोहा मनवाया है। इसे ‘सैटन-2’ (Satan-II) के नाम से भी जाना जाता है, और पुतिन का दावा है कि यह हथियार रूस के दुश्मनों को “दो बार सोचने” पर मजबूर कर देगा।
सरमत: अभेद्य कवच को भी भेदने वाली शक्ति
रूस की इस नई मिसाइल को दुनिया की सबसे शक्तिशाली और विनाशकारी मिसाइल माना जा रहा है। पुतिन के अनुसार, ‘सरमत’ के वॉरहेड्स की मारक क्षमता किसी भी पश्चिमी मिसाइल की तुलना में चार गुना अधिक है। इसकी सबसे डरावनी खूबी इसकी रेंज है, जो 35,000 किलोमीटर से भी ज्यादा बताई जा रही है। इसका मतलब है कि यह मिसाइल उत्तरी या दक्षिणी ध्रुव के ऊपर से उड़ते हुए धरती के किसी भी कोने में स्थित लक्ष्य को पलक झपकते ही तबाह कर सकती है।
क्यों खास है ‘सैटन-2’?
रूस ने इस मिसाइल को सोवियत काल की पुरानी ‘वोयवेदा’ मिसाइलों को रिप्लेस करने के लिए तैयार किया है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इसे दुनिया के लिए एक बड़ा खतरा बनाती हैं:
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अजेय डिफेंस: पुतिन का दावा है कि अमेरिका या किसी भी पश्चिमी देश के पास वर्तमान में ऐसा कोई मिसाइल डिफेंस सिस्टम नहीं है जो ‘सरमत’ को बीच रास्ते में रोक सके।
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भारी पेलोड: यह मिसाइल 10 से अधिक परमाणु हथियार (वॉरहेड्स) एक साथ ले जाने में सक्षम है, जो अलग-अलग लक्ष्यों पर एक साथ हमला कर सकते हैं।
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सटीक निशाना: आधुनिक नेविगेशन सिस्टम से लैस यह मिसाइल हजारों मील दूर बैठे दुश्मन के ठिकाने को सटीक रूप से ध्वस्त करने की ताकत रखती है।
2026 के अंत तक सेना में होगी शामिल
मंगलवार को हुआ यह परीक्षण रूस के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि 2024 में एक परीक्षण के दौरान इसमें विस्फोट होने की खबरें आई थीं। लेकिन अब पुतिन ने स्पष्ट कर दिया है कि 2026 के अंत तक ‘सरमत’ को रूसी सामरिक बलों (Strategic Forces) में युद्ध के लिए तैयार हालत में शामिल कर लिया जाएगा। पुतिन ने इस टेस्टिंग को ‘रणनीतिक संतुलन’ बनाए रखने के लिए जरूरी बताया है।
परमाणु हथियारों की नई और खतरनाक होड़
रूस और अमेरिका के बीच परमाणु हथियारों को नियंत्रित करने वाला आखिरी समझौता इसी साल फरवरी में समाप्त हो चुका है। समझौते के खत्म होते ही दोनों महाशक्तियों के बीच अनियंत्रित परमाणु रेस शुरू होने का खतरा मंडराने लगा है। रूस द्वारा ‘सरमत’ का सफल परीक्षण इसी दिशा में एक बड़ा संदेश माना जा रहा है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।
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