
नई दिल्ली: भारत और भूटान के गहरे रिश्तों के बीच एक अहम कड़ी जुड़ गई है। 11वें रायसीना डायलॉग में भाग लेने के लिए भूटान के विदेश मामलों और बाहरी व्यापार मंत्री ल्योनपो डीएन धुंग्येल नई दिल्ली पहुंचे, जहां उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। राजधानी में उनके आगमन को भारत-भूटान रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रायसीना डायलॉग 2026 में बढ़ी वैश्विक हलचल
भारत की प्रतिष्ठित भू-राजनीतिक और कूटनीतिक वार्ता श्रृंखला रायसीना डायलॉग का यह 11वां संस्करण है, जिसमें दुनिया भर के शीर्ष नेता, नीति-निर्माता और रणनीतिक विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं। भूटान के विदेश मंत्री की मौजूदगी को दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग के संदर्भ में खास महत्व दिया जा रहा है।
विदेश मंत्रालय ने किया आधिकारिक स्वागत
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया पर धुंग्येल के स्वागत की तस्वीर साझा करते हुए कहा कि भारत और भूटान की साझेदारी गहरे आपसी विश्वास, सद्भावना और साझा विकास के विजन पर आधारित है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस दौरे से द्विपक्षीय संबंधों को और गति मिलेगी।
भारत और भूटान के बीच ऊर्जा, जलविद्युत, कनेक्टिविटी, व्यापार और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में लगातार सहयोग बढ़ रहा है। ऐसे समय में जब क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियां सामने हैं, यह दौरा रणनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
दिल्ली बन रही वैश्विक कूटनीति का केंद्र
रायसीना डायलॉग 2026 के लिए विभिन्न देशों के नेताओं का भारत आगमन जारी है। इसी क्रम में फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब भी नई दिल्ली पहुंचे। वे सम्मेलन में मुख्य अतिथि और प्रमुख वक्ता के तौर पर भाग लेंगे। उनके भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और क्षेत्रीय-वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की भी संभावना है।
राजधानी दिल्ली इस समय वैश्विक कूटनीति का प्रमुख मंच बनी हुई है, जहां एक साथ कई देशों के शीर्ष नेता रणनीतिक संवाद में भाग ले रहे हैं। भूटान के विदेश मंत्री का यह दौरा न केवल दोनों देशों के ऐतिहासिक रिश्तों को नई मजबूती देगा, बल्कि दक्षिण एशिया में सहयोग और स्थिरता के नए आयाम भी स्थापित कर सकता है।
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