चेन्नई: तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर छिड़ा संग्राम अब ‘आरोप-प्रत्यारोप’ की जंग में तब्दील हो गया है। सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) के प्रमुख विजय को राज्यपाल द्वारा शपथ न दिलाए जाने पर विपक्ष ने इसे भाजपा की ‘दबाव की राजनीति’ करार दिया है। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि राजभवन केवल संवैधानिक मर्यादाओं और नियम पुस्तिका (Rule Book) का पालन कर रहा है।
विपक्ष का हमला: “भाजपा विरोध की मिल रही सजा”
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के रुख पर कड़े सवाल उठाए हैं।
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मणिकम टैगोर (कांग्रेस): उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि विजय ने चुनाव के दौरान भाजपा की नीतियों का विरोध किया था, इसलिए अब केंद्र के इशारे पर उन्हें मुख्यमंत्री बनने से रोका जा रहा है।
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कमल हासन और प्रकाश राज: इन दिग्गज अभिनेताओं ने भी सोशल मीडिया के जरिए राज्यपाल की भूमिका पर सवाल उठाए। उनका तर्क है कि लोकतांत्रिक परंपरा के अनुसार, सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का न्योता मिलना चाहिए।
भाजपा की सफाई: “लोकतंत्र में दबाव नहीं, आंकड़ों की चलती है”
विपक्ष के तीखे हमलों के बीच भाजपा प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने पार्टी का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने कहा कि सरकार गठन की प्रक्रिया पूरी तरह लोकतांत्रिक और पारदर्शी होगी।
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कोई भ्रम नहीं: तिरुपति ने कहा कि राजभवन में कोई भ्रम नहीं है। राज्यपाल केवल यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि सरकार बनाने का दावा करने वाले के पास 118 विधायकों का स्पष्ट समर्थन हो।
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जनादेश का सम्मान: भाजपा नेता ने तर्क दिया कि मतदाताओं ने किसी को स्पष्ट बहुमत नहीं दिया है, इसलिए यह स्थिति पैदा हुई है। यदि विजय आवश्यक संख्या बल जुटा लेते हैं, तो संविधान के तहत उन्हें मौका मिलेगा।
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दबाव के आरोप निराधार: उन्होंने कहा कि ‘दिल्ली का दबाव’ जैसी बातें केवल राजनीतिक बयानबाजी हैं। भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यहां सब कुछ संविधान के अनुसार ही होगा।
राजभवन में 40 मिनट की मुलाकात और फ्लोर टेस्ट का दावा
थलापति विजय गुरुवार को 24 घंटे के भीतर दूसरी बार राज्यपाल से मिलने लोकभवन पहुंचे। करीब 40 मिनट तक चली इस मुलाकात के दौरान विजय ने अपना पक्ष मजबूती से रखा।
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विजय का पक्ष: उन्होंने राज्यपाल से कहा कि वे विधानसभा के पटल पर ‘फ्लोर टेस्ट’ (बहुमत परीक्षण) का सामना करने के लिए तैयार हैं।
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गवर्नर की शर्त: सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल अपनी इस मांग पर अडिग हैं कि विजय पहले 118 विधायकों के हस्ताक्षर वाला लिखित समर्थन पत्र पेश करें।
क्या है मौजूदा अंकगणित?
तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 का आंकड़ा अनिवार्य है।
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TVK (विजय): 108 सीटें
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कांग्रेस समर्थन: 5 सीटें
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कुल योग: 113 (बहुमत से 5 सीटें कम)
टीवीके नेता वी.एस. बाबू ने उम्मीद जताई है कि सरकार गठन की प्रक्रिया जल्द पूरी होगी। हालांकि, उन्होंने केंद्र के कथित दबाव पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। फिलहाल, सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या विजय अगले कुछ घंटों में उन 5 ‘जादुई’ विधायकों का समर्थन जुटा पाते हैं या तमिलनाडु की राजनीति किसी नए मोड़ की ओर मुड़ जाएगी।
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