
उत्तर प्रदेश में मानसून की विदाई से ठीक पहले मौसम एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाने के लिए तैयार है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के लखनऊ केंद्र ने ताजा बुलेटिन जारी करते हुए राज्य के कई हिस्सों में अगले 48 घंटों के दौरान मौसम के तेजी से बिगड़ने की गंभीर चेतावनी जारी की है। बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती परिसंचरण और उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के संयुक्त प्रभाव से पूरे प्रदेश में घने बादलों की आवाजाही तेज हो गई है। मौसम विभाग के अनुसार, 7 और 8 अक्टूबर को पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तमाम जिलों में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश, 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी और आकाशीय बिजली (वज्रपात) गिरने का खतरा बना हुआ है। कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ ओलावृष्टि (Hailstorm) की भी आशंका जताई गई है, जिसके चलते प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
राजधानी लखनऊ और इसके आसपास के जनपदों—सीतापुर, बाराबंकी, उन्नाव, हरदोई और कानपुर में मंगलवार देर रात से ही बादलों का डेरा जमना शुरू हो गया है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, लखनऊ में 7 और 8 अक्टूबर को आसमान में घने काले बादल छाए रहेंगे और कई दौर की तेज गरज-चमक वाली बारिश दर्ज की जा सकती है। इस दौरान 40 से 50 किमी प्रति घंटे की झोंकेदार हवाएं चलने का पूर्वानुमान है, जिससे तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज होगी और उमस भरी गर्मी से राहत मिलेगी। हालांकि, तेज आंधी और बारिश के कारण लखनऊ के निचले इलाकों में जलभराव, पेड़ों के टूटने और बिजली आपूर्ति बाधित होने की आशंका जताई गई है। कानपुर नगर और कानपुर देहात के औद्योगिक क्षेत्रों में भी भारी बारिश के चलते यातायात प्रभावित होने की संभावना है।
मौसम विभाग के क्षेत्रीय आंकड़ों के अनुसार, इस मौसमी बदलाव का सबसे तीखा असर पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में देखने को मिलेगा। आजमगढ़, सुल्तानपुर, जौनपुर, गाजीपुर, बलिया, वाराणसी, गोरखपुर, बस्ती, बहराइच, गोंडा और देवरिया में मौसम विभाग ने येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में स्थानीय स्तर पर भारी बादलों के टकराने से तेज आवाज के साथ बिजली गिरने और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की प्रबल संभावना है। आजमगढ़ से लेकर सुल्तानपुर तक पहले भी तेज बारिश ने फसलों को प्रभावित किया है, और अब 8 अक्टूबर तक इस क्षेत्र में रुक-रुक कर तेज बारिश का सिलसिला जारी रहने के आसार हैं। नदियों के तटीय इलाकों और तराई वाले क्षेत्रों में जिलाधिकारियों को जलस्तर की 24 घंटे निगरानी रखने और बाढ़ चौकियों को सक्रिय करने के निर्देश दिए गए हैं।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश और रुहेलखंड के जिलों में भी मौसम की स्थिति शांत नहीं रहने वाली है। मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, बुलंदशहर, अलीगढ़, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली और पीलीभीत में 6 अक्टूबर की रात से लेकर 9 अक्टूबर तक छिटपुट से लेकर मध्यम दर्जे की बारिश का दौर बना रहेगा। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से इस क्षेत्र में धूल भरी आंधी और 45 किमी प्रति घंटे की गति से हवाएं चल सकती हैं। तेज हवाओं के चलते खुले मैदानों, हाइवे और एक्सप्रेसवे (यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे) पर चलने वाले वाहन चालकों को गति सीमित रखने और विजिबिलिटी कम होने पर फॉग लाइट का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। मुरादाबाद और बरेली के निचले शहरी इलाकों में जल निकासी की व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए नगर निगमों को अलर्ट पर रखा गया है।
मौसम का यह अचानक बदला मिजाज उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए भारी चिंता का सबब बन गया है। इस समय प्रदेश भर के खेतों में धान की पछेती फसल पकने की कगार पर है, जबकि कई स्थानों पर कटाई का कार्य शुरू हो चुका है। इसके साथ ही तिल, उड़द, मूंग और गन्ने की फसलों को तेज आंधी और जलभराव से भारी नुकसान की आशंका है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में पानी न रुकने दें और जल निकासी का उचित प्रबंध करें। कटी हुई फसल को खुले आसमान के नीचे छोड़ने के बजाय सुरक्षित स्थानों या तिरपाल से ढक कर रखें। तेज हवाओं के चलने से खड़ी फसल के गिरने (लॉजिंग) का खतरा सबसे ज्यादा रहता है, जिससे दाना काला पड़ने और पैदावार घटने का जोखिम पैदा हो जाता है।
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) और मौसम विभाग ने आम नागरिकों से खराब मौसम के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की है:
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पेड़ों और खंभों से दूर रहें: तेज आंधी और बारिश के समय कभी भी किसी बड़े व पुराने पेड़, बिजली के खंभों, ट्रांसफार्मर या कमजोर होर्डिंग्स के नीचे खड़े न हों।
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बिजली चमकने पर सुरक्षित शरण लें: खुले मैदान, खेत, तालाब या नदी के किनारे तुरंत छोड़ दें और किसी पक्के मकान या छत के नीचे शरण लें। यदि वाहन में हैं, तो खिड़कियां बंद कर वाहन के भीतर ही रहें।
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इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग बंद करें: घर के भीतर रहने पर बिजली के संवेदनशील उपकरणों (टीवी, फ्रिज, कंप्यूटर) के प्लग निकाल दें और लैंडलाइन फोन का इस्तेमाल करने से बचें।
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हेल्पलाइन नंबर: किसी भी अप्रिय घटना, जलभराव या बिजली आपूर्ति से जुड़ी समस्या के समाधान के लिए बिजली विभाग के 1912 और जिला आपदा नियंत्रण कक्ष के आपातकालीन नंबरों पर तत्काल संपर्क करें। मौसम विभाग के अनुसार 9 अक्टूबर के बाद से उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम धीरे-धीरे शुष्क होने लगेगा और आसमान साफ हो जाएगा।
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