CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की मुश्किलें बढ़ीं: कोर्ट ने बेल बॉन्ड उल्लंघन और आचरण पर जताई सख्ती, 2 दिन और बढ़ी न्यायिक हिरासत

जंतर-मंतर पर बिना अनुमति प्रवेश कर प्रदर्शन करने और शांति व्यवस्था बनाए रखने के मुचलके (बेल बॉन्ड) का उल्लंघन करने के मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजकों सौरव दास और आशुतोष रांका की कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। दिल्ली की विशेष अदालत ने दोनों नेताओं को फौरी राहत देने से इनकार करते हुए उनकी न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) की अवधि दो और दिनों के लिए बढ़ा दी है। पांच दिनों की शुरुआती न्यायिक हिरासत खत्म होने के बाद सोमवार, 19 अक्टूबर को दोनों को मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन स्थित स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत में पेश किया गया था।

अदालत में दिल्ली पुलिस ने दोनों नेताओं के पूर्व आचरण, बार-बार निषेधाज्ञा तोड़ने और बेल बॉन्ड की शर्तों का खुलेआम उल्लंघन करने की दलीलें दीं। अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि कानून-व्यवस्था और शांति बनाए रखने के लिए आरोपियों को रिहा करना उचित नहीं होगा। मजिस्ट्रेट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सौरव दास और आशुतोष रांका को 21 अक्टूबर तक तिहाड़ जेल में रखने का आदेश सुनाया। इसके साथ ही, मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने इस पूरे अनधिकृत प्रवेश और उपद्रव मामले की जांच आधिकारिक तौर पर क्राइम ब्रांच (Crime Branch) को सौंप दी है।

विवाद की शुरुआत 13 अक्टूबर 2026 को हुई थी, जब सीजेपी नेताओं ने जंतर-मंतर पर पहुंचकर प्रदर्शन किया था। गौरतलब है कि जंतर-मंतर को प्रशासन द्वारा पहले ही अधिसूचित प्रदर्शन स्थलों (Designated Protest Sites) की सूची से बाहर कर दिया गया था।

पुलिस के आरोपों के मुताबिक:

  • सौरव दास और आशुतोष रांका ने पुलिस की बैरिकेडिंग और बंद गेट को फांदकर जंतर-मंतर परिसर में अवैध रूप से प्रवेश (Trespassing) किया।

  • दोनों ने अपने समर्थकों के साथ मिलकर राष्ट्रीय ध्वज लहराया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया के खिलाफ उग्र नारेबाजी की।

  • पुलिस ने मौके से दोनों को हिरासत में लिया और निषेधाज्ञा के उल्लंघन व शांति भंग की धाराओं के तहत कार्रवाई करते हुए विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया, जहां से उन्हें 14 अक्टूबर को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया था।

अदालत में सुनवाई के दौरान दोनों नेताओं को राहत न मिलने की सबसे बड़ी वजह उनका 11 अक्टूबर का पुराना बेल बॉन्ड बना।

वास्तव में, 10 अक्टूबर को सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को पुलिस ने पहले भी हिरासत में लिया था। 11 अक्टूबर को दिल्ली कैंट की मजिस्ट्रेट अदालत ने तीनों को ₹50-50 हजार के मुचलके पर इस शर्त के साथ रिहा किया था कि वे अगले एक साल तक किसी भी तरह से शांति भंग नहीं करेंगे और कानून का पालन करेंगे।

लेकिन रिहाई के महज 48 घंटे के भीतर दोनों नेता दोबारा जंतर-मंतर पर धारा 144 और प्रतिबंधात्मक आदेशों को तोड़ते हुए पहुंच गए। कोर्ट में पुलिस ने मजबूती से दलील रखी कि जब आरोपियों ने पहले से दिए गए कानूनी बॉन्ड की शर्तों की परवाह नहीं की, तो उन्हें दोबारा जमानत पर छोड़ना सार्वजनिक शांति के लिए खतरा बन सकता है।

इस हाई-प्रोफाइल मामले में रविवार को उस वक्त नया मोड़ आ गया जब इस जमानत मामले की शुरुआती सुनवाई कर रहे स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (एसीपी ऋतुराज) ने आरोप लगाया कि उन्हें अज्ञात व्यक्तियों द्वारा धमकाया जा रहा है।

मजिस्ट्रेट को धमकी मिलने की लिखित शिकायत के बाद संसद मार्ग थाने में पुलिस ने गैर-संज्ञेय रिपोर्ट (NCR) दर्ज की। इस गंभीर घटनाक्रम के बाद संबंधित मजिस्ट्रेट को मामले की सुनवाई से हटा दिया गया और सोमवार को दोनों नेताओं को मंदिर मार्ग पर तैनात नवनियुक्त स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया, जिन्होंने पुलिस की रिमांड अर्जी को स्वीकार करते हुए दो दिन की हिरासत और बढ़ा दी।

उधर, कॉकरोच जनता पार्टी की लीगल टीम और संस्थापक अभिजीत दीपके (जिन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी है) ने दिल्ली पुलिस और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि पुलिस जानबूझकर उनके सह-संयोजकों को जेल में रखने के लिए कानूनी प्रक्रियाओं में अड़ंगे लगा रही है। सीजेपी का दावा है कि उन्होंने जमानतदारों (Sureties) के सभी वैध दस्तावेज अदालत के रिकॉर्ड पर पेश कर दिए थे, लेकिन पुलिस और प्रशासन ने तकनीकी व अस्पष्ट आधारों का हवाला देकर प्रक्रिया को लंबा खींच दिया।

सौरव दास और आशुतोष रांका की दो दिन की बढ़ी हुई न्यायिक हिरासत बुधवार, 21 अक्टूबर को समाप्त हो रही है। अब मामले की जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच कर रही है, जो जंतर-मंतर पर अवैध प्रवेश और शांति भंग की साजिश के तकनीकी व डिजिटल साक्ष्यों को खंगाल रही है। बुधवार को जब दोनों नेताओं को फिर से अदालत में पेश किया जाएगा, तब यह देखना अहम होगा कि क्या कोर्ट उन्हें मुचलके पर रिहा करने का आदेश देती है या क्राइम ब्रांच इस मामले में आगे की कस्टडी की मांग करती है।

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