
सनातन धर्म और वैदिक ज्योतिष परंपरा में किसी भी नए कार्य की शुरुआत, धार्मिक अनुष्ठान, यात्रा, गृह प्रवेश, व्यापारिक सौदे और मांगलिक कार्यों के लिए दैनिक पंचांग का विशेष महत्व होता है। पंचांग के पांच मुख्य अंग—तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण मिलकर समय की सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा का निर्धारण करते हैं। आज 22 अगस्त 2026, दिन शनिवार है। भाद्रपद मास के अंतर्गत आने वाली यह दशमी तिथि अपने आप में बेहद फलदायी मानी जाती है।
शनिवार का दिन न्याय के देवता कर्मफल दाता शनिदेव और संकटमोचन हनुमान जी की साधना के लिए समर्पित होता है। आज के दिन ज्येष्ठा नक्षत्र और रवि योग का अत्यंत दुर्लभ व शुभ संयोग बन रहा है। रवि योग सभी प्रकार के दोषों का शमन करने वाला और कार्यों में विजय दिलाने वाला माना जाता है। आइए विस्तार से जानते हैं आज के सभी प्रमुख पंचांग घटकों, शुभ मुहूर्तों, राहुकाल और विशेष नियमों के बारे में।
सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय
दैनिक पंचांग में सूर्य और चंद्रमा की गति का विशेष स्थान है। यह खगोलीय स्थिति स्थानीय समय के अनुसार निर्धारित होती है:
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सूर्योदय: प्रातः 05:54 AM
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सूर्यास्त: सायं 06:53 PM
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चंद्रोदय: दोपहर 01:45 PM
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चंद्रास्त: मध्यरात्रि 01:10 AM (23 अगस्त)
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सूर्य राशि: सिंह राशि (सूर्य देव अपनी स्वराशि सिंह में विराजमान रहेंगे)
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चंद्र राशि: वृश्चिक राशि (चंद्रमा दिन-रात मंगल की राशि वृश्चिक में संचरण करेंगे)
पंचांग के पांच मुख्य घटक: तिथि, नक्षत्र, करण और योग
वैदिक पंचांग के अनुसार आज के प्रमुख अंगों की स्थिति इस प्रकार रहेगी:
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तिथि: शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि (दशमी तिथि धर्म, कर्म, आर्थिक निवेश और पदभार ग्रहण करने के लिए उत्तम मानी जाती है)।
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नक्षत्र: ज्येष्ठा नक्षत्र (ज्येष्ठा नक्षत्र के स्वामी बुध देव हैं और इसके देवता देवराज इंद्र हैं। यह नक्षत्र बौद्धिक कार्यों, रणनीतिक योजनाओं और व्यापारिक निर्णयों के लिए प्रभावशाली होता है)।
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योग: विष्कुंभ योग के उपरांत प्रीति योग का निर्माण होगा। साथ ही पूरे दिन सूर्य के प्रभाव वाला शक्तिशाली ‘रवि योग’ प्रभावी रहेगा।
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करण: गर करण (इसके उपरांत वणिज करण का आरंभ होगा)।
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पक्ष: शुक्ल पक्ष
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मास: भाद्रपद (भादो)
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संवत: विक्रम संवत 2083
आज के अत्यंत शुभ मुहूर्त: नए कार्यों के लिए श्रेष्ठ समय
शुभ मुहूर्त में किए गए कार्यों में दैवीय कृपा प्राप्त होती है और विघ्न-बाधाएं स्वतः दूर हो जाती हैं। 22 अगस्त 2026 को बनने वाले प्रमुख शुभ समय निम्नलिखित हैं:
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अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:58 AM से 12:49 PM तक (यह दिन का सबसे श्रेष्ठ और दोषमुक्त मुहूर्त है। किसी भी नए प्रोजेक्ट, खरीदारी या महत्वपूर्ण अनुबंध के लिए यह समय सबसे उत्तम है)।
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ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:26 AM से 05:10 AM तक (ध्यान, योग, मंत्र साधना और विद्या अध्ययन के लिए सर्वश्रेष्ठ समय)।
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अमृत काल: प्रातः 07:15 AM से 08:50 AM तक।
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विजय मुहूर्त: दोपहर 02:32 PM से 03:24 PM तक (मुकदमेबाजी, प्रतियोगिता और अटके हुए कार्यों को सुलझाने के लिए अनुकूल)।
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गोधूलि मुहूर्त: सायं 06:52 PM से 07:15 PM तक।
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निशिता मुहूर्त: रात्रि 12:01 AM से 12:45 AM (23 अगस्त) तक।
आज के अशुभ काल: इस दौरान न करें कोई भी मांगलिक कार्य
वैदिक परंपरा में अशुभ काल के दौरान नए निवेश, मांगलिक कार्य और महत्वपूर्ण यात्राएं टालने की सलाह दी जाती है:
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राहुकाल: प्रातः 09:08 AM से 10:46 AM तक (शनिवार के दिन राहुकाल प्रातःकाल के दूसरे प्रहर में पड़ता है। इस समय कोई भी शुभ या नया कार्य प्रारंभ न करें)।
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यमगंड काल: दोपहर 02:00 PM से 03:37 PM तक।
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गुलिक काल: प्रातः 05:54 AM से 07:31 AM तक।
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दुर्मुहूर्त: प्रातः 05:54 AM से 06:46 AM तक और पुनः 06:46 AM से 07:38 AM तक।
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वर्ज्य काल: रात्रि 10:15 PM से 11:48 PM तक।
रवि योग और ज्येष्ठा नक्षत्र का विशेष ज्योतिषीय संयोग
22 अगस्त 2026 को बनने वाला रवि योग ज्योतिष शास्त्र में विशेष स्थान रखता है। मान्यता है कि रवि योग के प्रभाव से चंद्रमा और अन्य ग्रहों के कई अशुभ दोष स्वतः निष्प्रभावी हो जाते हैं।
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रवि योग में किया गया कोई भी धार्मिक कार्य, दान-पुण्य और व्यापारिक आरंभ दीर्घकालिक लाभ प्रदान करता है।
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ज्येष्ठा नक्षत्र के प्रभाव से व्यक्ति की तर्कशक्ति, निर्णय लेने की क्षमता और नेतृत्व गुणों में वृद्धि होती है।
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वृश्चिक राशि में चंद्रमा का संचरण होने के कारण आज लोगों का झुकाव गूढ़ विद्याओं, शोध और आध्यात्मिक साधनाओं की तरफ अधिक रहेगा।
आज का दिशा शूल और यात्रा संबंधी नियम
शनिवार के दिन पूर्व दिशा में दिशा शूल रहता है। इसका अर्थ है कि शनिवार को पूर्व दिशा की ओर लंबी दूरी की यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि किसी आवश्यक कारणवश पूर्व दिशा में यात्रा करनी अनिवार्य हो, तो घर से निकलने से पहले कुछ विशेष नियमों का पालन अवश्य करें:
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यात्रा पर निकलने से पहले थोड़ा सा अदरक, लौंग या सरसों के दाने खाकर निकलें।
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घर से निकलते समय मुख्य द्वार पर ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ या संकटमोचन हनुमानाष्टक का स्मरण करें।
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पांच कदम पीछे की ओर चलकर फिर आगे की यात्रा प्रारंभ करें।
शनिवार और दशमी तिथि पर करें ये विशेष पूजा और उपाय
शनिवार का दिन होने के कारण आज का दिन शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और पितृ दोष से पीड़ित जातकों के लिए कष्ट निवारण का सुनहरा अवसर है:
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शनिदेव का तैलाभिषेक: शाम के समय किसी शनि मंदिर में जाकर लोहे के पात्र में सरसों का तेल भरकर शनिदेव की प्रतिमा पर अर्पित करें और उनके चरणों के दर्शन करें।
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पीपल वृक्ष की परिक्रमा: सूर्यास्त के बाद पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का चौमुखा दीपक जलाएं और सात बार पीपल की परिक्रमा करते हुए ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का जाप करें।
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हनुमान चालीसा का पाठ: शनिवार को दशमी तिथि का संयोग हनुमान जी की उपासना के लिए भी श्रेष्ठ है। चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर हनुमान जी को चोला चढ़ाएं और तीन बार हनुमान चालीसा अथवा सुंदरकांड का पाठ करें।
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छाया दान और अन्न दान: एक कांसे या स्टील की कटोरी में सरसों का तेल लेकर उसमें अपना चेहरा देखें और उस तेल को कटोरी सहित किसी जरूरतमंद अथवा डाकोत को दान कर दें। यह उपाय असाध्य रोगों और दुर्घटनाओं से रक्षा करता है।
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काले कुत्ते और पक्षियों को भोजन: काले कुत्ते को सरसों का तेल लगी रोटी खिलाएं और पक्षियों के लिए छत पर ताजे पानी व अनाज का प्रबंध करें।
आज का पंचांग कर्म, धर्म और विवेक के संतुलन का संदेश देता है। शुभ मुहूर्तों का सदुपयोग करते हुए राहुकाल के समय सावधानी बरतें और अपने कार्यों को सफलतापूर्वक पूर्ण करें।
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