
आजकल हर कोई बेदाग, निखरी और चमकदार त्वचा पाने के लिए तरह-तरह के ब्यूटी प्रोडक्ट्स और घरेलू नुस्खों का सहारा ले रहा है। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, विज्ञापनों और इंटरनेट पर मौजूद रील्स को देखकर लोग बिना अपनी त्वचा का प्रकार (Skin Type) जाने किसी भी तरह का केमिकल या घरेलू फेस पैक चेहरे पर लगाना शुरू कर देते हैं। मुल्तानी मिट्टी, बेसन, हल्दी, चारकोल, क्ले मास्क से लेकर बाजार में मिलने वाले रेडीमेड शीट मास्क तक, फेस पैक्स को स्किनकेयर का सबसे आसान और जादुई उपाय मान लिया गया है।
लेकिन त्वचा रोग विशेषज्ञों (Dermatologists) का मानना है कि हर चमकती चीज सोना नहीं होती और हर फेस पैक हर किसी की त्वचा के लिए सुरक्षित नहीं होता। गलत तरीके से, गलत सामग्री से या गलत समय पर लगाया गया फेस पैक चेहरे की प्राकृतिक चमक बढ़ाने के बजाय त्वचा की कुदरती सुरक्षा परत (Skin Barrier) को पूरी तरह नष्ट कर सकता है। कई स्थितियों में फेस पैक का इस्तेमाल त्वचा को इतनी गंभीर क्षति पहुंचाता है कि उसे ठीक होने में महीनों लग जाते हैं।
किन लोगों को भूलकर भी नहीं करना चाहिए फेस पैक का इस्तेमाल?
यदि आप निम्नलिखित में से किसी भी त्वचा विकार या स्थिति से जूझ रहे हैं, तो फेस पैक लगाना आपके लिए फायदे की जगह भारी नुकसान का कारण बन सकता है:
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सक्रिय मुंहासे और मवाद वाले दाने (Active Cystic Acne & Pustules): जिन लोगों के चेहरे पर लाल, दर्दनाक या मवाद से भरे सक्रिय पिंपल्स हैं, उन्हें किसी भी तरह का कड़ा, क्ले-बेस्ड या स्क्रब जैसा फेस पैक नहीं लगाना चाहिए। फेस पैक लगाते या धोते समय जब आप त्वचा को रगड़ते हैं, तो मुंहासों के अंदर का बैक्टीरिया पूरे चेहरे पर फैल जाता है, जिससे इंफेक्शन कई गुना बढ़ सकता है।
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एक्जिमा, सोरायसिस और रोसैसिया के मरीज: यदि आपकी त्वचा एक्जिमा, सोरायसिस या रोसैसिया जैसी क्रॉनिक त्वचा समस्याओं से ग्रसित है, तो फेस पैक में मौजूद तत्व आपकी त्वचा में गंभीर जलन, लालिमा और सूजन पैदा कर सकते हैं। ऐसी त्वचा अत्यधिक संवेदनशील होती है और किसी भी बाहरी लेप को बर्दाश्त नहीं कर पाती।
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अत्यधिक कटी-फटी और क्षतिग्रस्त स्किन बैरियर (Damaged Skin Barrier): यदि आपकी त्वचा बहुत अधिक ड्राई है, पपड़ीदार होकर छूट रही है या किसी गलत प्रोडक्ट के कारण त्वचा की ऊपरी परत छिल गई है, तो फेस पैक लगाने से जलन और खिंचाव बढ़ जाएगा। ऐसी स्थिति में केवल मॉइस्चराइजिंग और हीलिंग की जरूरत होती है, फेस पैक की नहीं।
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केमिकल पील या लेजर ट्रीटमेंट के तुरंत बाद: यदि आपने हाल ही में चेहरे पर कोई डर्मेटोलॉजिकल ट्रीटमेंट जैसे केमिकल पील, माइक्रोडर्माब्रेशन, लेजर या ब्लीच कराया है, तो कम से कम 2 से 3 सप्ताह तक किसी भी प्रकार का फेस पैक लगाने से बचें। इस दौरान त्वचा की नई परत बन रही होती है और वह किसी भी रसायन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होती है।
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खुले घाव, कट या सनबर्न वाली त्वचा: धूप में झुलसने (Sunburn) के बाद या चेहरे पर कहीं खरोंच, दाद या घाव होने पर फेस पैक लगाना त्वचा पर तेजाब डालने जैसा असर कर सकता है। इससे त्वचा में गंभीर जलन और स्थायी दाग-धब्बे बन सकते हैं।
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अत्यधिक संवेदनशील और एलर्जी प्रोन स्किन: जिन लोगों की त्वचा बहुत जल्दी लाल हो जाती है या नए प्रोडक्ट्स लगाते ही दाने निकल आते हैं, उन्हें बिना पैच टेस्ट के किसी भी तरह का फेस पैक छूना भी नहीं चाहिए।
फेस पैक के गलत इस्तेमाल से होने वाली 6 प्रमुख त्वचा समस्याएं
गलत सामग्री का चुनाव या फेस पैक को जरूरत से ज्यादा समय तक चेहरे पर लगाए रखने से त्वचा को कई तरह की गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है:
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कांटेक्ट डर्मेटाइटिस और एलर्जिक रिएक्शन: फेस पैक में मौजूद खुशबू (Fragrance), प्रिजर्वेटिव्स, पैराबेंस या घरेलू नुस्खों में इस्तेमाल होने वाले नींबू व सिरके जैसे तत्व त्वचा में एलर्जिक रिएक्शन पैदा कर सकते हैं। इससे चेहरे पर अचानक तेज खुजली, लाल चकत्ते, सूजन और छोटे-छोटे दानों का गुच्छा उभर आता है जिसे मेडिकल भाषा में कांटेक्ट डर्मेटाइटिस कहते हैं।
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प्राकृतिक नमी का छिनना और रूखापन: मुल्तानी मिट्टी, चारकोल या बेंटोनाइट क्ले मास्क त्वचा से अतिरिक्त तेल सोखने के लिए जाने जाते हैं। लेकिन जब ड्राई स्किन वाले लोग या सामान्य त्वचा वाले लोग इसे बहुत ज्यादा देर तक लगाकर रखते हैं, तो यह त्वचा के जरूरी प्राकृतिक सीबम और लिपिड्स को भी पूरी तरह खींच लेता है। इससे त्वचा बेजान, रूखी और खिंची-खिंची हो जाती है।
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समय से पहले झुर्रियां और फाइन लाइन्स: बहुत से लोग फेस पैक लगाकर उसे 100% सूखने तक चेहरे पर छोड़ देते हैं और इस दौरान बात करते हैं या हंसते हैं। जब मिट्टी या क्ले मास्क चेहरे पर पूरी तरह सूखकर कड़ा हो जाता है और उसमें दरारें पड़ने लगती हैं, तो वह त्वचा के इलास्टिक टिश्यूज को खींचता है। इससे चेहरे पर समय से पहले महीन रेखाएं (Fine Lines) और झुर्रियां पड़ने लगती हैं।
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रोमकूपों का बंद होना और ब्लैकहेड्स/व्हाइटहेड्स: बहुत से क्रीमी या ऑयली फेस पैक्स में ऐसे तत्व होते हैं जो अत्यधिक कोमेडोजेनिक (Comedogenic) होते हैं। यदि तैलीय (Oily) त्वचा वाले लोग इन पैक्स का इस्तेमाल करते हैं या पैक को सही से साफ नहीं करते, तो त्वचा के रोमछिद्र बंद हो जाते हैं, जिससे ब्लैकहेड्स, व्हाइटहेड्स और नए मुंहासे निकलने लगते हैं।
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हाइपरपिग्मेंटेशन और सन सेंसिटिविटी: कुछ फेस पैक्स में अल्फा हाइड्रॉक्सी एसिड (AHA), रेटिनॉल या घरेलू तत्वों में नींबू का रस होता है। इन्हें लगाने के बाद यदि तुरंत धूप में निकला जाए, तो त्वचा सूर्य की यूवी किरणों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाती है (Photosensitivity)। इसके परिणामस्वरूप चेहरे पर काले-भूरे धब्बे और मेलास्मा की समस्या बढ़ जाती है।
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घरेलू नुस्खों से केमिकल बर्न का खतरा: लोग अक्सर इंटरनेट पर देखकर नींबू का रस, बेकिंग सोडा, टूथपेस्ट या बिना घुली हुई दालचीनी का पाउडर सीधे चेहरे पर लगा लेते हैं। इन तत्वों का पीएच (pH) लेवल त्वचा के प्राकृतिक एसिड मेंटल (pH 4.5 – 5.5) से बिल्कुल मेल नहीं खाता, जिससे त्वचा की ऊपरी परत जल जाती है और गंभीर जलन व काले दाग पड़ जाते हैं।
फेस पैक लगाते समय इन 5 जरूरी सावधानियों का रखें ध्यान
यदि आपकी त्वचा सामान्य है और आप फेस पैक का सही लाभ लेना चाहते हैं, तो इन बुनियादी नियमों का पालन जरूर करें:
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पैच टेस्ट करना कभी न भूलें: कोई भी नया फेस पैक (चाहे वह 100% प्राकृतिक या आयुर्वेदिक ही क्यों न हो) पूरे चेहरे पर लगाने से पहले अपनी कलाई के अंदरूनी हिस्से या कान के पीछे गर्दन पर थोड़ा सा लगाकर 24 घंटे तक देखें। यदि वहां कोई लालिमा, खुजली या जलन न हो, तभी उसे चेहरे पर लगाएं।
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फेस पैक को कभी 100% न सुखाएं: किसी भी क्ले या मड फेस पैक को केवल तब तक चेहरे पर रखना चाहिए जब तक कि वह हल्का नम रहे (आमतौर पर 10 से 12 मिनट)। जब पैक छूने पर थोड़ा सा चिपचिपा रहे तभी उसे गुनगुने या सादे पानी से हल्के हाथों से धो लें। इसे पूरी तरह पपड़ी बनकर सूखने न दें।
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रोजाना फेस पैक लगाने की गलती न करें: फेस पैक कोई दैनिक क्लींजर या मॉइस्चराइजर नहीं है। सप्ताह में 1 या अधिकतम 2 बार ही फेस पैक का इस्तेमाल पर्याप्त होता है। रोजाना पैक लगाने से त्वचा की सुरक्षात्मक परत कमजोर हो जाती है।
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फेस पैक हटाने के बाद तुरंत मॉइस्चराइजर लगाएं: पैक धोने के तुरंत बाद जब त्वचा थोड़ी नम हो, तभी अपनी स्किन टाइप के अनुसार एक अच्छा हाइड्रेटिंग मॉइस्चराइजर और दिन का समय हो तो सनस्क्रीन अवश्य लगाएं ताकि त्वचा की नमी अंदर लॉक हो सके।
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चेहरे को जोर से न रगड़ें: फेस पैक हटाते समय चेहरे को तौलिए या उंगलियों से जोर-जोर से रगड़कर साफ न करें। पानी के हल्के छींटे मारकर पैक को पहले गीला करें और फिर गोल-गोल घुमाते हुए कोमलता से धोएं।
सुंदर और स्वस्थ त्वचा का राज महंगे या लगातार फेस पैक लगाने में नहीं, बल्कि त्वचा की प्रकृति को समझने और उसकी सही देखभाल करने में है। यदि आपकी त्वचा पर किसी भी प्रकार का संक्रमण, दाने या अत्यधिक संवेदनशीलता है, तो किसी भी नुस्खे को आजमाने से पहले किसी प्रमाणित डर्मेटोलॉजिस्ट से सलाह लेना ही सबसे बुद्धिमानी भरा कदम है।
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