वर्ष 2027 में शुरू होगा वृषभ राशि पर साढ़ेसाती का उदय चरण, पंडित जी से जानें आपकी राशि पर शनि का कैसा रहेगा प्रभाव?

ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को कर्मफल दाता और न्याय का देवता माना गया है। जब भी शनि किसी राशि में गोचर करते हैं, तो उसका प्रभाव सभी 12 राशियों के जीवन पर गहराई से पड़ता है। आगामी वर्ष 2027 वृषभ राशि (Taurus) के जातकों के लिए ज्योतिषीय दृष्टि से एक बड़ा मोड़ साबित होने वाला है।

2027 में शनि देव का मेष राशि में प्रवेश होगा, और इसी के साथ वृषभ राशि के जातकों पर शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण यानी ‘उदय चरण’ प्रारंभ हो जाएगा। साढ़ेसाती के कुल तीन चरण होते हैं और हर चरण ढाई साल का होता है। आइए प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार जानते हैं कि वृषभ राशि पर यह साढ़ेसाती कब से शुरू हो रही है और इसका आपके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

नोट कर लें तारीख: वृषभ राशि पर कब से लगेगी शनि की साढ़ेसाती?

पंचांग और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, शनि देव 3 जून 2027 को मेष राशि में गोचर करेंगे। इसी दिन से वृषभ राशि पर साढ़ेसाती का पहला चरण आधिकारिक रूप से शुरू हो जाएगा।

  • पहले चरण की अवधि: वृषभ राशि के लिए साढ़ेसाती का यह उदय चरण 3 जून 2027 से शुरू होकर 7 अगस्त 2029 तक रहेगा। इस दौरान शनि देव आपकी राशि के जातकों की कड़ी परीक्षा लेंगे।

मित्र राशि होने के बाद भी क्यों कष्टकारी रहेगा पहला चरण?

वृषभ राशि के स्वामी ग्रह शुक्र हैं, और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुक्र और शनि के बीच गहरी मित्रता का भाव है। इसके साथ ही वृषभ राशि के लिए शनि को ‘योगकारक’ ग्रह भी माना जाता है। इसके बावजूद, साढ़ेसाती का पहला चरण पूरी तरह अनुकूल नहीं कहा जा सकता। पंडित जी के अनुसार, इस दौरान आपको निम्नलिखित चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है:

  • करियर और बिजनेस में रुकावटें: नौकरीपेशा लोगों को ऑफिस में उच्चाधिकारियों (Boss) के साथ अनबन या सरकारी तंत्र से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। कार्यों में देरी और सफलता के लिए सामान्य से अधिक कड़ी मेहनत करनी होगी।

  • आर्थिक तंगी और बेवजह के खर्च: इस ढाई साल की अवधि में आपकी आय (Income) में कमी और अचानक होने वाले खर्चों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। इस समय की गई यात्राएं मनमुताबिक फल नहीं देंगी, जिससे मानसिक तनाव बढ़ सकता है।

  • सेहत और स्वभाव में बदलाव: मानसिक तनाव के कारण अनिद्रा (नींद न आना) की समस्या हो सकती है। इसके अलावा आंख, नाक और गले से जुड़ी परेशानियां घेर सकती हैं। स्वभाव में थोड़ा चिड़चिड़ापन, जिद्दीपन या छोटी बातों पर गुस्सा आने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है।

शनि के प्रकोप और दोषों से बचाव के 5 अचूक उपाय

शनि देव केवल व्यक्ति के कर्मों का फल देते हैं, इसलिए साढ़ेसाती से डरने के बजाय यदि सही नियमों और उपायों का पालन किया जाए, तो इसके नकारात्मक प्रभावों को बेहद कम किया जा सकता है:

  • भगवान शिव की आराधना: शनि देव भगवान शिव को अपना गुरु मानते हैं। इसलिए नियमित रूप से शिवलिंग पर शुद्ध जल और बेलपत्र अर्पित करने से शनि देव शांत होते हैं।

  • हनुमान चालीसा का पाठ: ऐसी मान्यता है कि शनि देव बजरंगबली के भक्तों को कभी परेशान नहीं करते। हर मंगलवार और शनिवार को नियम से हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करें।

  • पीपल के नीचे दीपक: शनिवार की शाम को सूर्यास्त के बाद पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का एक दीपक जलाना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

  • शनिवार को दान कार्य: शनिवार के दिन किसी जरूरतमंद को काले कपड़े, लोहा, काली उड़द की दाल, या काले तिल का दान करें।

  • शनि मंदिर में दर्शन: शनिवार के दिन शनि मंदिर जाकर उनके दर्शन करें, लेकिन ध्यान रखें कि शनि देव की मूर्ति की आंखों में सीधे न देखें, उनके चरणों के दर्शन करें।

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