
ओटीटी प्लेटफॉर्म पर हाल ही में रिलीज हुई साइकोलॉजिकल सस्पेंस थ्रिलर फिल्म ‘द Last House’ (द लास्ट हाउस) ने अपनी डार्क थीम, घुमावदार पटकथा और रहस्यमयी माहौल से दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। फिल्म शुरू से लेकर आखिर तक सस्पेंस की एक ऐसी परत बुनती है जहां हर किरदार पर शक होता है और हर मोड़ पर कहानी एक नया रूप ले लेती है। हालांकि, फिल्म का क्लाइमैक्स जितना अप्रत्याशित था, उसने दर्शकों के दिमाग में सुलझन से ज्यादा उलझनें पैदा कर दी हैं।
फिल्म खत्म होने के बाद सोशल मीडिया और रेडिट जैसे प्लेटफॉर्म्स पर इसके एंडिंग (Ending) को लेकर बहस छिड़ गई है। निर्देशक ने कहानी को एक ऐसे खुले मोड़ (Open Ending) पर छोड़ा है, जहां हर दर्शक अपने हिसाब से अर्थ निकाल रहा है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बीच 3 ऐसे बुनियादी सवाल हैं, जिनका स्पष्ट जवाब फिल्म में नहीं मिल पाया है। आइए, एक रिपोर्टर के नजरिए और फिल्म के बारीकी से किए गए विश्लेषण के आधार पर जानते हैं क्लाइमैक्स का असली मतलब और उन 3 अनसुलझे रहस्यों का सच।
1. पहला अनसुलझा सवाल: क्या सच में कोई प्रेतात्मा थी या यह महज मुख्य किरदार का मतिभ्रम (Hallucination) था?
फिल्म का सबसे बड़ा सस्पेंस इसी बात के इर्द-गिर्द घूमता है कि ‘द लास्ट हाउस’ नाम के उस सुनसान और वीरान बंगले में कोई अलौकिक शक्ति (Paranormal Force) मौजूद थी या मुख्य किरदार ‘विक्रम’ किसी गंभीर मानसिक बीमारी (Schizophrenia) का शिकार था।
फिल्म के शुरुआती दो घंटों में निर्देशक दर्शकों को यह विश्वास दिलाने में कामयाब रहते हैं कि घर के अंदर अतीत की कोई पुरानी बुरी आत्मा है, जो वहां रहने आने वाले लोगों को अपना शिकार बनाती है। लेकिन क्लाइमैक्स की अंतिम 10 मिनट की रोंगटे खड़े कर देने वाली सीक्वेंस में दिखाया जाता है कि विक्रम ही उन सभी हत्याओं के पीछे था। इसके बावजूद, अंत के आखिरी सीन में जब वह जेल या मेंटल असाइलम की कोठरी में बैठा होता है, तो कमरे के कोने में फिर से वही भयानक परछाईं दिखाई देती है।
यह दृश्य दर्शकों को भ्रमित कर देता है कि क्या विक्रम को अपनी ही मानसिक स्थिति की वजह से वह परछाईं दिख रही थी, या फिर उस पुराने घर की बुरी आत्मा विक्रम के शरीर और दिमाग पर पूरी तरह कब्जा (Possess) कर चुकी थी और अब भी उसके साथ मौजूद है। फिल्म इस सवाल का कोई ठोस जवाब दिए बिना खत्म हो जाती है।
2. दूसरा अनसुलझा सवाल: बेसमेंट में मिली वो पुरानी डायरी और 1990 की फाइल का असली रहस्य क्या था?
फिल्म के मध्य भाग में विक्रम को घर के सीक्रेट बेसमेंट से एक धूल भरी पुरानी डायरी और वर्ष 1990 से जुड़ी कुछ पुलिस फाइल्स मिलती हैं। उन फाइलों से पता चलता है कि उस घर में रहने वाला पिछला परिवार भी ठीक उसी रहस्यमयी तरीके से गायब हुआ था, जैसे अब विक्रम के साथ चीजें घट रही थीं।
दर्शकों को उम्मीद थी कि क्लाइमैक्स में उस डायरी के लेखक और 1990 की घटना का राज खुलेगा, जिससे वर्तमान की घटनाओं का संबंध साफ हो जाएगा। लेकिन निर्देशक ने उस डायरी के अंतिम दो पन्नों के रहस्य को पूरी तरह से दबा दिया। क्या विक्रम के पूर्वजों का उस घर से कोई पुराना खूनी कनेक्शन था? या फिर वह डायरी खुद विक्रम ने ही अपने किसी पिछले मानसिक दौरे के दौरान लिखी थी, जिसे वह भूल चुका था? फिल्म में इस पहलू को बिना किसी स्पष्टीकरण के अधूरा छोड़ दिया गया।
3. तीसरा अनसुलझा सवाल: मुख्य महिला किरदार ‘अनाया’ का अचानक गायब होना और उसका असली इरादा?
फिल्म में अनाया का किरदार विक्रम की मदद करने और उस घर की गुत्थी को सुलझाने के लिए आता है। पूरी फिल्म में अनाया को एक हमदर्द और जांचकर्ता के रूप में दिखाया गया। लेकिन क्लाइमैक्स से ठीक पहले जब विक्रम पर सारे सबूत केंद्रित होने लगते हैं, तब अनाया रहस्यमयी ढंग से गायब हो जाती है।
क्लाइमैक्स के अंत में पुलिस को अनाया का कोई सुराग नहीं मिलता। न तो उसकी लाश मिलती है और न ही उसका कोई पुलिस रिकॉर्ड। यहां दर्शकों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या अनाया सच में कोई जिंदा इंसान थी, या फिर वह विक्रम के ही दिमाग का एक काल्पनिक हिस्सा (Manifestation) थी जो उसकी छुपी हुई यादों को बाहर लाने की कोशिश कर रही थी? यदि वह असली थी, तो वह अचानक कहां गायब हो गई और उसका असली मकसद क्या था? इसका कोई जवाब स्क्रीन पर नहीं दिया गया।
‘द लास्ट हाउस’ के क्लाइमैक्स का क्या है असली मतलब?
यदि फिल्म के क्लाइमैक्स को एक साइकोलॉजिकल और दार्शनिक (Philosophical) दृष्टिकोण से समझें, तो ‘द लास्ट हाउस’ वास्तव में इंसान के भीतर छिपे उसके अपने ही अतीत के अपराधबोध (Guilt) और डिप्रेशन का प्रतीक है।
‘द लास्ट हाउस’ (आखरी घर) केवल एक भौतिक इमारत नहीं है, बल्कि वह इंसान के दिमाग का वह अंतिम कोना है जहां से वापस लौटना नामुमकिन हो जाता है। क्लाइमैक्स का मतलब यह दर्शाना है कि जब कोई व्यक्ति अपने पुराने गुनाहों का सामना करने से भागता है, तो उसका अपना ही दिमाग उसके लिए एक नरक और भूतिया घर बन जाता है। विक्रम ने अतीत में जो गलतियां की थीं, उसका guilt ही धीरे-धीरे राक्षस बनकर उसे निगल गया। अंत में उसका कोठरी में अकेले बैठकर मुस्कुराना और सामने परछाईं का दिखना इस बात का संकेत है कि वह अपनी ही बनाई दुनिया में हमेशा के लिए कैद हो चुका है।
क्या मेकर्स लाएंगे ‘द Last House Part 2’?
फिल्म का इस तरह से खुला और रहस्यमयी अंत होना इस बात का मजबूत इशारा है कि मेकर्स इसके सीक्वल (Part 2) की योजना बना रहे हैं। फिल्म के निर्देशक ने हाल ही में अपने एक इंटरव्यू में संकेत दिया था कि ‘द लास्ट हाउस’ एक त्रयी (Trilogy) या दो भागों की कहानी का पहला चैप्टर है।
यदि इसका पार्ट-2 आता है, तो उसमें अनाया के सच, 1990 की डायरी के पन्नों का राज और विक्रम की असली मानसिक स्थिति से पर्दा उठाया जा सकता है। फिलहाल, थ्रिलर और सस्पेंस फिल्मों के शौकीनों के लिए यह फिल्म एक बेहतरीन ‘पहेली’ बनी हुई है।
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