नई दिल्ली: ज्योतिष शास्त्र में कुंडली को जीवन का दर्पण माना जाता है। जिस तरह कुंडली में ‘राजयोग’ व्यक्ति को राजा जैसा जीवन देता है, उसी तरह ‘अल्पायु योग’ असमय मृत्यु या कम उम्र का संकेत देता है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में लग्नेश और अष्टमेश (आयु भाव का स्वामी) कमजोर स्थिति में हों, तो यह योग बनता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि कुंडली के कौन से घर और ग्रह इस गंभीर योग का निर्धारण करते हैं और इससे बचने के लिए क्या शास्त्रोक्त उपाय किए जा सकते हैं।
कैसे बनता है अल्पायु योग? ग्रहों का खतरनाक खेल
ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर और व्यक्तित्व का स्वामी ‘लग्न’ और ‘लग्नेश’ होता है। जब कुंडली में लग्नेश, शनि या राहु जैसे क्रूर ग्रहों से पीड़ित हो और उसी समय शनि, राहु या केतु की दशा या अंतर्दशा चल रही हो, तो अचानक मृत्यु या बड़ी दुर्घटना की स्थिति बनती है।
अल्पायु योग मुख्य रूप से चार पाप ग्रहों—शनि, राहु, केतु और मंगल—के प्रभाव से बनता है। यदि लग्नेश कमजोर होकर नीच राशि में बैठा हो और उसे किसी शुभ ग्रह (जैसे बृहस्पति) का सहयोग न मिल रहा हो, तो व्यक्ति की जीवनी शक्ति क्षीण हो जाती है। हालांकि, यदि गुरु की दृष्टि लग्न पर हो, तो व्यक्ति भयावह स्थिति से भी सुरक्षित बाहर निकल आता है।
कुंडली का आठवां भाव: मृत्यु और आयु का रहस्य
ज्योतिष शास्त्र में कुंडली का आठवां (8th) भाव सबसे रहस्यमयी माना जाता है। यह भाव आयु, मृत्यु के प्रकार और अचानक होने वाली घटनाओं का कारक है।
-
पाप ग्रहों का वास: यदि आठवें भाव में शनि, राहु, केतु या मंगल जैसे ग्रह बैठे हों, तो यह अल्पायु योग की प्रबल संभावना बनाता है।
-
अष्टमेश की स्थिति: यदि आठवें घर का स्वामी (अष्टमेश) कुंडली के छठे या बारहवें भाव में चला जाए, तो भी आयु पक्ष कमजोर हो जाता है।
-
लग्न की कमजोरी: यदि पहला घर (लग्न) पाप ग्रहों से घिरा हो (पाप कर्तरी योग), तो भी जातक को स्वास्थ्य संबंधी गंभीर परेशानियां रहती हैं।
अकाल मृत्यु के संकट को दूर करने के 4 अचूक उपाय
यदि कुंडली में अल्पायु योग के लक्षण दिखते हैं, तो शास्त्रों में कुछ विशेष उपाय बताए गए हैं जो ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव को कम कर आयु वृद्धि में सहायक होते हैं:
-
महामृत्युंजय मंत्र का जाप: भगवान शिव का यह मंत्र आयु वृद्धि और रोग नाश के लिए सबसे शक्तिशाली है। प्रतिदिन ‘ॐ त्र्यम्बकं यजामहे…’ मंत्र का 108 बार जाप करने से मृत्यु का भय दूर होता है।
-
आयुष हवन (Ayush Homam): यह एक विशेष ज्योतिषीय अनुष्ठान है। दीर्घायु की प्राप्ति और स्वास्थ्य लाभ के लिए साल में एक बार आयुष होम कराना अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
-
हनुमान चालीसा और शनि देव की पूजा: संकटमोचन हनुमान जी की शरण में जाने से अकाल मृत्यु का दोष कटता है। नियमित हनुमान चालीसा का पाठ करें और शनिवार को शनि देव पर सरसों का तेल अर्पित करें।
-
चिरंजीवियों का स्मरण: भारत के 8 चिरंजीवियों (अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम और मार्कंडेय ऋषि) की आराधना करें। साथ ही भगवान शिव का अभिषेक कर चंद्रमा को मजबूत करें।
The News 11 – ताज़ा हिंदी समाचार, ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, देश-दुनिया