पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक बड़ा वित्तीय और प्रशासनिक निर्णय लिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा के साथ एक उच्च-स्तरीय डिजिटल बैठक के बाद, मुख्यमंत्री ने राज्य को केंद्र से 3,000 करोड़ रुपये से अधिक की स्वास्थ्य मंजूरी मिलने का ऐलान किया है।
स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए वित्तीय पैकेज
मुख्यमंत्री ने बताया कि चालू वित्त वर्ष के लिए केंद्र सरकार से भारी धनराशि आवंटित की गई है, जिससे राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को विश्वस्तरीय बनाने में मदद मिलेगी।
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM): एनएचएम के तहत राज्य को 2,103 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है, जिसमें से 500 करोड़ रुपये की पहली किस्त राज्य को प्राप्त भी हो चुकी है।
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आयुष्मान भारत योजना: इस योजना के लिए केंद्र ने अपना 976 करोड़ रुपये का हिस्सा आवंटित कर दिया है।
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कुल आवंटन: विभिन्न मदों को मिलाकर राज्य को 3,000 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि प्राप्त हुई है।
जुलाई से ‘आयुष्मान भारत’ कार्ड वितरण
मुख्यमंत्री के अनुसार, बंगाल में स्वास्थ्य सुधार की प्रक्रिया बेहद तीव्र गति से आगे बढ़ रही है:
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प्रथम चरण: पूर्ववर्ती सरकार के ‘स्वास्थ्य साथी’ कार्ड धारक लगभग 6 करोड़ लोगों को पहले चरण में आयुष्मान भारत योजना के तहत कवर किया जाएगा।
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कार्ड वितरण: पात्र लाभार्थियों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, और जुलाई 2026 से कार्ड वितरण का कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।
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आयुष्मान आरोग्य मंदिर: राज्य सरकार जून 2026 के पहले सप्ताह में ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ नेटवर्क में शामिल होने के लिए केंद्र के साथ समझौता करने जा रही है, जिससे राज्य के प्रवासी नागरिकों को भी लाभ मिलेगा।
‘पारदर्शी भर्ती नीति’ से स्वास्थ्य कर्मियों की कमी दूर होगी
मुख्यमंत्री ने राज्य के स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों, नर्सों और अन्य कर्मियों की भारी कमी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जहां राष्ट्रीय स्तर पर भर्ती दर 98% है, वहीं बंगाल में यह मात्र 53% तक सिमट गई थी।
भर्ती प्रक्रिया का रोडमैप:
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अगले तीन महीनों में ‘पारदर्शी भर्ती नीति’ के माध्यम से रिक्त पदों को प्राथमिकता पर भरा जाएगा।
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भर्ती प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जाएगी ताकि योग्य उम्मीदवारों को अवसर मिल सके।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पिछली सरकार द्वारा केंद्र के साथ ‘असहयोग’ की नीति अपनाने के कारण राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई थी, जिसका सीधा नुकसान आम जनता को उठाना पड़ा। अब नई सरकार का लक्ष्य केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में एक सकारात्मक और कार्यकुशल वातावरण तैयार करना है।
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