सोने की बढ़ी कीमतों के बीच रश्मिका-विजय की ‘रॉयल वे़डिंग’: 1.62 लाख के पार पहुंचा गोल्ड, फिर भी गहनों से लदी दिखीं ‘श्रीवल्ली’

नई दिल्ली। दक्षिण भारतीय सिनेमा के ‘पावर कपल’ रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा आखिरकार हमेशा के लिए एक-दूसरे के हो गए हैं। 26 फरवरी को झीलों की नगरी उदयपुर में हुई इस शाही शादी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रही हैं। लेकिन इस शादी में सबसे ज्यादा चर्चा रश्मिका के लुक की नहीं, बल्कि उनके द्वारा पहने गए ‘सोने की खान’ जैसे भारी-भरकम गहनों की हो रही है।

सोने के आसमान छूते भाव और रश्मिका का ‘ऑल गोल्ड’ लुक

हैरानी की बात यह है कि जहां एक ओर 24 कैरेट सोने की कीमतें ₹1,62,000 के पार पहुंच रही हैं और 22 कैरेट सोना ₹1,46,000 के करीब ट्रेड कर रहा है, वहीं रश्मिका ने अपनी शादी में डायमंड या कुंदन को दरकिनार कर पूरी तरह पारंपरिक स्वर्ण आभूषणों को चुना। रश्मिका का यह अंदाज 90 के दशक की उन दुल्हनों की याद दिला रहा है, जब सोना ही संपन्नता और परंपरा की असली पहचान होता था।

सिंदूरी साड़ी और भारी गहनों में दिखीं ‘साउथ इंडियन ब्राइड’

अपने खास दिन पर रश्मिका मंदाना ने गहरे सिंदूरी रंग की साड़ी पहनी थी, जिसमें उनका पारंपरिक साउथ इंडियन टच साफ झलक रहा था। उनके गहनों की बात करें तो उन्होंने:

  • दो बेहद भारी गोल्डन नेकलेस पहने थे।

  • सिर पर मांग टीका और हाथों में शानदार बाजूबंद

  • कमर पर पारंपरिक कमरबंद और एक छोटी सी नोज पिन।

आजकल की दुल्हनें जहां पेस्टल लहंगों के साथ डायमंड ज्वेलरी पसंद कर रही हैं, वहीं रश्मिका का यह ‘गोल्डन अवतार’ फैशन की दुनिया में एक नया ट्रेंड सेट कर रहा है।

विजय देवरकोंडा का ‘महाराजा’ स्टाइल

दूल्हे राजा विजय देवरकोंडा भी किसी मामले में पीछे नहीं रहे। उन्होंने अपनी सादगी और रॉयल अंदाज से सबका दिल जीत लिया। विजय ने अपने आउटफिट के साथ मैचिंग गोल्ड नेकलेस और रिस्टबैंड पहना था, जो उनके लुक को एक योद्धा और राजकुमार जैसा फील दे रहा था।

हीरे-मोती छोड़ सोना ही क्यों चुना?

फैंस के मन में सवाल है कि करोड़ों की मालकिन होने के बावजूद रश्मिका ने डायमंड क्यों नहीं पहना? दरअसल, इसके पीछे की वजह गहरी परंपरा है। दक्षिण भारतीय संस्कृति में सोने को बेहद शुभ और ‘पॉजिटिव एनर्जी’ का स्रोत माना जाता है। मान्यता है कि कुंदन या डायमंड में ‘कोल्ड एनर्जी’ होती है, जबकि सोना सौभाग्य का प्रतीक है। यही कारण है कि आंध्र और तेलंगाना की शादियों में आज भी ‘ऑल-गोल्ड’ लुक को ही प्राथमिकता दी जाती है।

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