गर्भावस्था (प्रेग्नेंसी) हर महिला के जीवन का एक बेहद खूबसूरत लेकिन शारीरिक और मानसिक बदलावों से भरा सफर होता है। इस दौरान जैसे-जैसे प्रेगनेंसी का समय बढ़ता है, महिलाओं को कई तरह की असहजताओं का सामना करना पड़ता है। बढ़ता वजन, शरीर में लगातार दर्द, रात में बार-बार करवटें बदलना और प्रसव (डिलीवरी) को लेकर होने वाली चिंता अक्सर उनकी रातों की नींद खराब कर देती है। हेल्थ और फिटनेस एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस दौर में ‘प्रीनेटल योग’ (गर्भावस्था के दौरान किया जाने वाला योग) इन सभी समस्याओं से सुरक्षित और असरदार तरीके से छुटकारा पाने का एक बेहतरीन जरिया साबित हो सकता है।
कमर दर्द, जकड़न और पैरों की सूजन से तुरंत राहत
प्रेग्नेंसी के बढ़ने के साथ-साथ महिलाओं के शरीर का गुरुत्वाकर्षण केंद्र बदलता है, जिससे पीठ के निचले हिस्से, कमर और कूल्हों पर दबाव बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। गायनेकोलॉजिस्ट्स के अनुसार, प्रीनेटल योग के अंतर्गत किए जाने वाले विशेष सुरक्षित आसन रीढ़ की हड्डी को सहारा देने वाली मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं। यह शरीर की लचक (Flexibility) को बढ़ाता है और सही पोस्चर बनाए रखने में मदद करता है। इसके नियमित अभ्यास से प्रेगनेंसी में होने वाले भयंकर कमर दर्द, मांसपेशियों की जकड़न और पैरों में आने वाली सूजन से बहुत जल्द राहत मिलती है।
डीप ब्रीदिंग और प्राणायाम से सुधरेगा ब्लड सर्कुलेशन
प्रीनेटल योग का एक सबसे महत्वपूर्ण और अभिन्न हिस्सा प्राणायाम यानी नियंत्रित श्वास क्रिया है। गर्भावस्था के दौरान गहरी और सही तरीके से सांस लेने की तकनीकें शरीर में ऑक्सीजन के प्रवाह को काफी हद तक बेहतर बना देती हैं। यह न केवल गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए फायदेमंद है, बल्कि मां के शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को भी दुरुस्त रखता है। बेहतर ब्लड फ्लो होने के कारण शरीर में न्यूट्रिएंट्स का अवशोषण अच्छे से होता है और थकान व सुस्ती जैसी समस्याएं कोसों दूर रहती हैं।
प्रसव (Delivery) के समय बेहद मददगार साबित होती हैं ये तकनीकें
प्रीनेटल योग के दौरान सीखी गई ब्रीदिंग और रिलैक्सेशन तकनीकें सिर्फ गर्भावस्था में ही नहीं, बल्कि लेबर पेन (प्रसव पीड़ा) के दौरान भी महिलाओं के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जो महिलाएं प्रेग्नेंसी में नियमित रूप से योग का अभ्यास करती हैं, वे प्रसव के कठिन समय में दर्द के दौरान अधिक शांत, केंद्रित और तनावमुक्त रहने में सक्षम होती हैं। यह मानसिक दृढ़ता और शारीरिक लचीलापन नॉर्मल डिलीवरी की संभावनाओं को भी काफी हद तक बढ़ा देता है।
मानसिक तनाव, बेचैनी को दूर कर लाता है सुकून भरी नींद
गर्भावस्था के दौरान केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि भारी भावनात्मक उतार-चढ़ाव भी होते हैं। आने वाले बच्चे की जिम्मेदारियां, मूड स्विंग्स और डिलीवरी का डर कई महिलाओं में एंग्जायटी और मानसिक तनाव पैदा कर देता है, जो सीधे तौर पर उनकी नींद को प्रभावित करता है। प्रीनेटल योग और ध्यान (Meditation) मस्तिष्क में हैप्पी हार्मोन्स को रिलीज करने में मदद करते हैं। इससे मन शांत होता है, मूड में सुधार आता है, आत्मविश्वास बढ़ता है और रात में बिना किसी बेचैनी के एक बेहद सुकून भरी और गहरी नींद आती है।
भूलकर भी न करें ये गलतियां: इन स्थितियों में बरतें विशेष सावधानी
एक्सपर्ट्स ने सख्त हिदायत दी है कि गर्भावस्था के दौरान किया जाने वाला योग सामान्य योग से पूरी तरह अलग होता है। इस समय गहरे पेट के ट्विस्ट, कठिन बैकबेंड (पीछे झुकने वाले आसन) और बहुत ज्यादा तीव्र (High-Intensity) व्यायाम भूलकर भी नहीं करने चाहिए। इसके अलावा, जिन महिलाओं को सर्वाइकल इनसफिशिएंसी, अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर, गंभीर एनीमिया (खून की कमी), प्लेसेंटा प्रिविया या प्री-टर्म लेबर (समय से पहले प्रसव) का खतरा हो, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
महत्वपूर्ण नोट: कोई भी प्रीनेटल योग सत्र शुरू करने से पहले अपनी निजी डॉक्टर (गायनेकोलॉजिस्ट) से हरी झंडी जरूर लें और हमेशा एक प्रमाणित व अनुभवी प्रीनेटल योग एक्सपर्ट की देखरेख में ही इन आसनों का अभ्यास करें।
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