मुजफ्फरबाद। पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पिछले कुछ दिनों से जारी तनाव अब पूरी तरह से एक बड़े नागरिक विद्रोह में तब्दील हो चुका है। कंगाली की कगार पर खड़ा पाकिस्तान अपने कब्जे वाले इस क्षेत्र में बुनियादी जरूरतें जैसे कि सस्ता आटा और बिजली देने में भी पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है। स्थानीय प्रशासन द्वारा जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर प्रतिबंध लगाने के बाद स्थिति और ज्यादा हिंसक हो गई है। प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए सुरक्षा बलों ने बर्बरता की सारी हदें पार कर दी हैं, जिससे बड़े पैमाने पर मौतें और गिरफ्तारियां हुई हैं। बौखलाई पाकिस्तान सरकार ने अब आंदोलन के प्रमुख नेताओं पर भारी-भरकम इनाम की घोषणा कर दी है।
वांटेड नेताओं पर 1 करोड़ का इनाम, धरपकड़ के लिए सेना का छापा
पाकिस्तानी मीडिया और समाचार एजेंसी डॉन के मुताबिक, PoK की कठपुतली सरकार ने अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के आंदोलन को कुचलने के लिए एक नया पैंतरा आजमाया है। सरकार ने संगठन को एक गैर-कानूनी और प्रतिबंधित संस्था घोषित करते हुए इसके चार सबसे प्रमुख वांटेड नेताओं की गिरफ्तारी पर 1 करोड़ रुपये (पाकिस्तानी) के इनाम का एलान किया है। इन नेताओं में शौकत नवाज मीर, उमर नजीर कश्मीरी, मेहरान अरशद ख्वाजा और सरदार अमन शामिल हैं। इन चारों नेताओं की जानकारी देने वाले को यह मोटी रकम दी जाएगी, जिसके बाद से पूरे इलाके में सेना और पुलिस की छापेमारी तेज हो गई है।
सस्ते आटे और बिजली की मांग से सुलग उठी बगावत की चिंगारी
PoK में फैली यह अशांति रातों-रात पैदा नहीं हुई है, बल्कि यह पाकिस्तान सरकार के खिलाफ वर्षों से पनप रहे गुस्से का नतीजा है। JAAC ने शुरुआत में बेहद बुनियादी और जायज आर्थिक मुद्दों को लेकर आम जनता को एकजुट किया था। उनकी शुरुआती मांगों में सब्सिडी वाला सस्ता आटा, सस्ती बिजली की दरें और आसमान छूती महंगाई से राहत शामिल थी। लेकिन जब पाकिस्तान सरकार ने जनता को राशन देने के बजाय उन पर लाठियां और गोलियां बरसाना शुरू किया, तो इस आंदोलन का दायरा बढ़ गया और अब प्रदर्शनकारी सीधे प्रशासनिक जवाबदेही और बड़े संवैधानिक सुधारों की मांग पर अड़ गए हैं।
क्या है 12 रिफ्यूजी सीटों का विवाद, जिसे खत्म करने के लिए हो रहा है बवाल?
इस वक्त चल रहे उग्र प्रदर्शनों और जनता के गुस्से की सबसे बड़ी वजह PoJK विधानसभा की 12 आरक्षित सीटें हैं। दरअसल, ये 12 सीटें साल 1947 के विभाजन के बाद पाकिस्तान के मुख्य शहरों (जैसे लाहौर, रावलपिंडी) में जाकर बसने वाले जम्मू-कश्मीर के शरणार्थियों के लिए आरक्षित रखी गई हैं।
JAAC और स्थानीय नागरिकों का सीधा आरोप है कि इन 12 सीटों का इस्तेमाल इस्लामाबाद में बैठी मुख्य राजनीतिक पार्टियां और पाकिस्तानी सेना मुजफ्फरबाद में अपनी मर्जी की कठपुतली सरकार बनाने के लिए करती हैं। चुनाव में धांधली और राजनीतिक हेरफेर का यह सबसे बड़ा जरिया बन चुकी हैं, इसलिए जनता मांग कर रही है कि इन सीटों को तुरंत और पूरी तरह से निरस्त किया जाए ताकि स्थानीय लोगों को उनके वास्तविक लोकतांत्रिक अधिकार मिल सकें।
मुजफ्फरबाद, मीरपुर और कोटली में पूर्ण शटडाउन, सड़कों पर सन्नाटा
भारी तनाव के बीच मुजफ्फरबाद, मीरपुर और कोटली समेत कई मुख्य जिलों में पूरी तरह से शटडाउन (पूर्ण बंद) देखा जा रहा है। सभी व्यापारिक बाजार और दुकानें पूरी तरह बंद हैं और सड़कों पर वाहनों की आवाजाही ठप है। पूरे क्षेत्र को छावनी में बदल दिया गया है, जहां दंगा नियंत्रण पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान अत्याधुनिक हथियारों के साथ गश्त कर रहे हैं। इस भारी दमन के बावजूद मीरपुर और कोटली में सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी हुकूमत के खिलाफ रैलियां निकालीं और जमकर नारेबाजी की।
अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंची गूंज, ब्रिटेन में पाकिस्तानी दूतावास के बाहर प्रदर्शन
रावलकोट और उसके आसपास के क्षेत्रों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई हिंसक झड़पों के बाद हालात इतने बिगड़ गए हैं कि इस्लामाबाद से अतिरिक्त संघीय अर्धसैनिक बलों (पैरामिलिट्री फोर्सेज) को विमानों के जरिए PoK भेजा गया है। इस बीच PoK के प्रधानमंत्री फैसल मुमताज राठौर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बैकफुट पर आते हुए बातचीत की अपील की है।
दूसरी तरफ, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की इस क्रूरता की गूंज अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुनाई देने लगी है। ब्रिटेन के ब्रैडफोर्ड शहर में रह रहे कश्मीरी प्रवासियों ने पाकिस्तानी वाणिज्य दूतावास (Consulate) के बाहर इकट्ठा होकर पाकिस्तान सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। ब्रैडफोर्ड ईस्ट के ब्रिटिश सांसद इमरान हुसैन के नेतृत्व में दर्जनों सांसदों ने ब्रिटेन सरकार से इस मामले में तुरंत राजनयिक हस्तक्षेप करने की मांग की है, जहां इंटरनेट और संचार माध्यमों को बंद कर मानवाधिकारों का गला घोंटा जा रहा है।
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