पश्चिम बंगाल के हालिया विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मची रार अब पूरी तरह से चौराहे पर आ चुकी है। पार्टी के भीतर हुए इस ऐतिहासिक विद्रोह में अब चार बार की लोकसभा सांसद और दिग्गज अभिनेत्री शताब्दी राय का नाम भी प्रमुखता से जुड़ गया है। बागी गुट में शामिल होने के बाद शताब्दी राय ने सीधे अपनी पूर्व ‘बॉस’ ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने ममता बनर्जी की कार्यशैली की तुलना महाभारत के ‘धृतराष्ट्र’ से करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने अपने करीबियों के चक्कर में पार्टी के वफादार नेताओं की चिंताओं पर पूरी तरह से आंखें मूंद ली थीं।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में आए इस भूचाल के बाद ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें हर बीतते दिन के साथ दोगुनी हो रही हैं। पार्टी के 20 से ज्यादा सांसद और दर्जनों विधायक पहले ही बगावत का झंडा बुलंद कर चुके हैं और अब वे लगातार नेतृत्व की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं। शताब्दी राय ने एक टीवी चैनल से दिए इंटरव्यू में अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर जो असंतोष है, वह बहुत गहरा है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यह तो सिर्फ शुरुआत है, आने वाले दिनों में कई और सांसद भी ममता बनर्जी का साथ छोड़कर बाहर आ सकते हैं।
ममता दी को अब पार्टी से प्यार नहीं रहा
साल 2009 से टीएमसी के हर अच्छे-बुरे वक्त में ममता बनर्जी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाली शताब्दी राय ने कहा कि उनका यह फैसला किसी जल्दबाजी का नतीजा नहीं है। उन्होंने कहा कि वह 2009 में तब से तृणमूल कांग्रेस का हिस्सा रही हैं, जब पश्चिम बंगाल में उनकी सरकार भी नहीं बनी थी। इतने वर्षों तक उन्होंने पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ पार्टी और बंगाल की जनता की सेवा की। लेकिन अब परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। ममता दी में अब पहले जैसा जुड़ाव नहीं रहा और ऐसा लगता है कि उन्हें अब अपनी पार्टी और पुराने नेताओं से कोई लगाव नहीं रह गया है।
4 मई की वो मुलाकात, जिसके बाद ममता से टूटा भरोसा
शताब्दी राय ने उस घटना का भी विस्तार से खुलासा किया, जिसके बाद उन्होंने बगावत का रास्ता चुना। उन्होंने बताया कि 4 मई को जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के अप्रत्याशित और बेहद खराब नतीजे आए, तो वे अन्य सांसदों के साथ आगे की रणनीति बनाने और हार की समीक्षा करने के लिए ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर गई थीं।
शताब्दी ने आरोप लगाया कि उस बैठक में ममता बनर्जी चुनावी जनादेश को स्वीकार करने के लिए तैयार ही नहीं थीं। हार के कारणों पर आत्ममंथन करने की बजाय उसे टालने की कोशिश की जा रही थी। इसके अलावा क्षेत्र और संगठन को लेकर उनकी कुछ गंभीर शिकायतें थीं, जिन्हें सुनना तो दूर, पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया। उस 4 मई की बैठक के बाद ही उन्हें और कई अन्य सांसदों को यह साफ समझ आ गया था कि अब शीर्ष नेतृत्व हमारी आवाज सुनने के मूड में बिल्कुल नहीं है और वे विधायकों-सांसदों की जमीनी बातों से पूरी तरह कट चुके हैं।
दीदी अब पूरी तरह बदल चुकी हैं, काम करना हुआ नामुमकिन
ममता बनर्जी के बदले हुए व्यवहार पर बात करते हुए शताब्दी राय ने कहा कि पिछले कुछ समय में पूर्व मुख्यमंत्री के इर्द-गिर्द एक ऐसा घेरा तैयार हो गया है, जिसने पुराने नेताओं को दूर धकेल दिया है। उन्होंने कहा कि पहले दीदी से मिलना और अपनी बात रखना बेहद आसान था, हमारा एक भावनात्मक रिश्ता था। लेकिन अब परिस्थितियां बहुत अजीब और दमघोंटू हो चुकी हैं। अब कुछ चुनिंदा लोग ही तय करते हैं कि दीदी किससे मिलेंगी और किससे नहीं। उनके लिए राजनीति में जनता का काम करना सबसे महत्वपूर्ण है, और जब पार्टी में रहकर काम करना ही नामुमकिन हो गया, तो उन्होंने यह कड़ा फैसला लिया।
अभी और भी कई सांसद छोड़ेंगे टीएमसी का साथ
तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव के इस्तीफे का जिक्र करते हुए शताब्दी राय ने कहा कि पार्टी के भीतर असंतोष केवल कुछ चेहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़े स्तर पर लोग इससे प्रभावित हैं। विधानसभा चुनाव के खराब नतीजों ने इस आंतरिक कलह को और भी ज्यादा हवा दे दी है। सभी सांसद बैठकर चर्चा करना चाहते थे कि आखिर जमीन पर इतनी बड़ी हार कैसे हुई, लेकिन हमारी बात ही नहीं सुनी गई। अब सभी का एक ही मत है कि इस अपमानजनक स्थिति को और ज्यादा जारी नहीं रखा जा सकता।
काकोली घोष के बागी गुट में नंबर-2 बनीं शताब्दी, NDA को समर्थन का एलान
आपको बता दें कि टीएमसी में इस समय सांसदों का एक बहुत बड़ा गुट ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद कर चुका है। लोकसभा में इस बागी गुट की कमान कद्दावर नेता काकोली घोष दस्तीदार संभाल रही हैं। काकोली घोष ने अब शताब्दी राय को इस बागी गुट का आधिकारिक ‘उप-नेता’ (Deputy Leader) नियुक्त कर दिया है।
अपनी अगली राजनीतिक चाल का खुलासा करते हुए शताब्दी राय ने साफ किया कि इस समय उनका पूरा ध्यान संसद में अपने इस बागी समूह को लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) से एक अलग और औपचारिक गुट के रूप में मान्यता दिलाने पर है। उन्होंने साफ लफ्जों में एलान किया कि जैसे ही संसद से उनके इस गुट को कानूनी और तकनीकी तौर पर हरी झंडी मिल जाती है, उनका यह पूरा धड़ा केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार को अपना बिना शर्त समर्थन सौंप देगा।
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