मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच पाकिस्तान की कूटनीतिक सक्रियता अचानक बढ़ गई है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर, शुक्रवार को तेहरान पहुंचे हैं। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए चल रही मध्यस्थता प्रयासों को गति देना है। तेहरान हवाई अड्डे पर ईरान के गृह मंत्री एस्कंदर मोमेनी और पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने उनका स्वागत किया।
वार्ता का मुख्य एजेंडा: क्षेत्रीय शांति और स्थिरता
फील्ड मार्शल मुनीर का तेहरान दौरा ऐसे समय में हुआ है जब मिडिल ईस्ट में युद्ध के भविष्य को लेकर वैश्विक चिंताएं बढ़ गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, मुनीर अपनी यात्रा के दौरान ईरान के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। चर्चा के मुख्य केंद्र में निम्नलिखित बिंदु रहने की संभावना है:
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ईरान-अमेरिका वार्ता: युद्ध को समाप्त करने के लिए चल रही बातचीत को फिर से पटरी पर लाना।
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क्षेत्रीय शांति: युद्ध के कारण अस्थिर हुए पूरे मिडिल ईस्ट क्षेत्र में स्थिरता बहाल करना।
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आपसी हित: पाकिस्तान, ईरान और अन्य संबंधित पक्षों के बीच द्विपक्षीय सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा।
पाकिस्तान की ‘शटल डिप्लोमेसी’ का प्रयास
पाकिस्तान पिछले कुछ समय से अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान की भूमिका को लेकर कुछ प्रमुख तथ्य इस प्रकार हैं:
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युद्धविराम की मध्यस्थता: पाकिस्तान के प्रयासों से ही 8 अप्रैल को ईरान और अमेरिका-इजरायल गठबंधन के बीच युद्धविराम प्रभावी हुआ था।
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इस्लामाबाद वार्ता: अप्रैल के मध्य में इस्लामाबाद में पहली प्रत्यक्ष अमेरिका-ईरान वार्ता आयोजित हुई थी, हालांकि वह किसी ठोस परिणाम तक नहीं पहुंच सकी।
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वार्ता को पुनर्जीवित करने की कोशिश: ट्रंप प्रशासन द्वारा दूसरे दौर की वार्ता रद्द किए जाने के बावजूद, पाकिस्तान ने मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के माध्यम से युद्धविराम को अनिश्चित काल के लिए बढ़ाने का अनुरोध किया था। अब नकवी और मुनीर के दौरे के जरिए पाकिस्तान वार्ता को फिर से पुनर्जीवित (revive) करने की कोशिश में है।
क्या निकलेगा कोई ठोस समाधान?
ईरान-अमेरिका के बीच दशकों से चला आ रहा तनाव और हालिया सैन्य संघर्ष ने समाधान को बेहद जटिल बना दिया है। जहां नकवी और मुनीर की सक्रियता कूटनीतिक प्रगति के संकेत दे रही है, वहीं अभी तक किसी बड़ी सफलता की घोषणा नहीं हुई है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि फील्ड मार्शल मुनीर की यह हाई-प्रोफाइल यात्रा तेहरान और वॉशिंगटन के बीच जमी बर्फ को पिघला पाती है या नहीं।
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