आज 25 जून 2026, गुरुवार को साल की सबसे बड़ी और फलदायी मानी जाने वाली निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi) मनाई जा रही है। इस पावन दिन पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए जितना महत्व दिन के व्रत और उपवास का है, उतना ही महत्व शाम के समय तुलसी पूजन (Tulsi Puja) का भी माना गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी की संध्या पर यदि सही नियमों और मंत्रोच्चार के साथ तुलसी जी की पूजा की जाए, तो घर से दरिद्रता दूर होती है और सुख-समृद्धि का वास होता है। आइए जानते हैं आज शाम तुलसी पूजा के 3 आसान स्टेप्स, विशेष मंत्र और बरती जाने वाली सावधानियां:
आज शाम तुलसी पूजा के 3 आसान स्टेप्स (3-Step Tulsi Puja Vidhi):
स्टेप 1: हल्दी वाले घी का दीपक जलाएं
आज शाम को सूर्यास्त के बाद स्नान करके या हाथ-पैर धोकर साफ कपड़े पहनें। इसके बाद तुलसी के पौधे के पास जाएं और गाय के शुद्ध देसी घी का एक दीपक जलाएं।
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विशेष उपाय: इस दीपक के घी में एक चुटकी हल्दी जरूर डाल लें। हल्दी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है, इससे दीपक की शुभता बढ़ जाती है। इसके बाद हाथ जोड़कर श्रीहरि और तुलसी माता के स्वरूप का ध्यान करें और अपनी मनोकामना कहें।
स्टेप 2: महामंत्र का जाप और परिक्रमा (Mantra & Parikrama)
तुलसी जी के सामने आसन पर बैठकर या खड़े होकर भगवान विष्णु के सबसे शक्तिशाली मंत्र का 108 बार जाप करें:
मंत्र: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
अर्थ: “मैं सर्वव्यापी भगवान विष्णु को सादर प्रणाम करता हूँ और उनकी शरण में आता हूँ।” इस मंत्र के श्रद्धापूर्वक जाप से मानसिक शांति मिलती है और अटके हुए कार्य बनने लगते हैं।
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परिक्रमा नियम: मंत्र जाप करने के तुरंत बाद तुलसी जी के पौधे की 11 या 21 बार परिक्रमा करें। परिक्रमा करते समय भी मन ही मन ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का उच्चारण करते रहें। इससे विष्णु जी के साथ माता लक्ष्मी की भी विशेष कृपा मिलती है।
स्टेप 3: श्रृंगार और अक्षत अर्पित करें
परिक्रमा पूर्ण करने के बाद तुलसी माता को हल्दी से रंगे हुए चावल (पीले अक्षत) अर्पित करें। इसके साथ ही उन्हें एक छोटी लाल या पीले रंग की चुनरी ओढ़ाएं और सुहाग/श्रृंगार की सामग्री (जैसे सिंदूर, चूड़ियां) अर्पित करें। पूजा के अंत में पूरे परिवार की खुशहाली और आर्थिक तंगी दूर करने की प्रार्थना करें।
आज शाम की पूजा में भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां:
शास्त्रों के अनुसार, एकादशी के दिन तुलसी से जुड़े कुछ कड़े नियम होते हैं, जिनका पालन न करने पर पूजा का फल निष्फल हो जाता है:
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जल न चढ़ाएं: निर्जला एकादशी के दिन तुलसी माता भी भगवान विष्णु के लिए निर्जल व्रत रखती हैं। इसलिए आज शाम को या दिन में कभी भी तुलसी के पौधे में जल (Watering) अर्पित न करें। ऐसा करने से उनका व्रत खंडित होता है और दोष लगता है।
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पत्ते न तोड़ें: एकादशी तिथि पर तुलसी के पत्तों को तोड़ना सख्त मना है। यदि पूजा के लिए पत्तों की आवश्यकता हो, तो केवल नीचे गिरे हुए पत्तों का ही उपयोग करें।
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दीपक का ध्यान रखें: इस बात का विशेष ख्याल रखें कि हवा या किसी अन्य वजह से दीया पूजा के बीच में ही न बुझ जाए।
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साफ-सफाई और सुरक्षा: तुलसी चौरे के आसपास पूरी स्वच्छता होनी चाहिए। साथ ही, दीपक को पौधे की पत्तियों से थोड़ी सुरक्षित दूरी पर रखें ताकि पत्तियां आंच से झुलसें नहीं।
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जल्दबाजी से बचें: शाम की पूजा पूरी श्रद्धा, शांत मन और एकाग्रता के साथ करें। हड़बड़ी में की गई पूजा का पूर्ण लाभ नहीं मिलता।
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