2029 तक पूर्वोत्तर से उग्रवाद खत्म करने का टारगेट, मणिपुर से नई मुहिम की शुरुआत

नई दिल्ली: देश में वामपंथी उग्रवाद (LWE) पर काबू पाने के बाद अब केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर भारत में सक्रिय उग्रवादी नेटवर्क के सफाए के लिए बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। इस नई रणनीति के तहत वर्ष 2029 तक पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र को उग्रवाद मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। इस अभियान की शुरुआत मणिपुर से की जा रही है, जिसे मौजूदा हालात के कारण सबसे अहम माना जा रहा है।

मणिपुर बना अभियान का पहला केंद्र

सरकार ने सुरक्षा एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मणिपुर में सक्रिय उग्रवादी संगठनों और उनके नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जाए। हाल के महीनों में राज्य में हिंसा और अस्थिरता ने स्थिति को संवेदनशील बना दिया है, जिसके चलते यहां से ऑपरेशन शुरू करने का फैसला लिया गया है।सूत्रों के अनुसार, मणिपुर में शांति बहाली के साथ-साथ खुफिया तंत्र को और मजबूत किया जा रहा है, ताकि उग्रवादियों की गतिविधियों पर सटीक निगरानी रखी जा सके।

LWE के बाद अब पूर्वोत्तर पर फोकस

देश के कई हिस्सों में फैले वामपंथी उग्रवाद (Left Wing Extremism) को काफी हद तक नियंत्रित करने के बाद अब सरकार का पूरा ध्यान पूर्वोत्तर भारत की ओर है। पिछले कुछ वर्षों में LWE प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई और विकास योजनाओं के चलते बड़ा बदलाव देखने को मिला है।इसी मॉडल को पूर्वोत्तर राज्यों में भी लागू करने की योजना बनाई जा रही है, जिसमें सुरक्षा के साथ-साथ विकास को भी बराबर प्राथमिकता दी जाएगी।

सुरक्षा के साथ विकास पर भी जोर

सरकार की रणनीति केवल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं है। उग्रवाद प्रभावित इलाकों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी योजनाओं को तेजी से लागू किया जाएगा। माना जा रहा है कि विकास की कमी भी उग्रवाद को बढ़ावा देने वाला एक बड़ा कारण रही है।केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय के जरिए जमीनी स्तर पर बदलाव लाने की कोशिश की जा रही है।

एजेंसियों को मिला स्पष्ट रोडमैप

सुरक्षा एजेंसियों को 2029 तक का स्पष्ट रोडमैप दिया गया है, जिसमें चरणबद्ध तरीके से उग्रवादी संगठनों को कमजोर करने, उनके वित्तीय स्रोतों पर रोक लगाने और स्थानीय स्तर पर विश्वास बहाली जैसे कदम शामिल हैं।इसके साथ ही सीमावर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के जरिए होने वाली घुसपैठ को रोकने पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है।

क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में बड़ा कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह अभियान तय समयसीमा के भीतर सफल होता है, तो पूर्वोत्तर भारत में स्थायी शांति और विकास का रास्ता खुल सकता है। इससे न केवल स्थानीय लोगों की जिंदगी बेहतर होगी, बल्कि पूरे देश की आंतरिक सुरक्षा भी मजबूत होगी।

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