नई दिल्ली: हाल ही में संपन्न हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजों के विस्तृत विश्लेषण से एक बड़ा और दिलचस्प ट्रेंड उभर कर सामने आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक अब सिमटकर मुस्लिम बहुल क्षेत्रों और अल्पसंख्यक समुदायों तक केंद्रित होता जा रहा है। आंकड़ों की मानें तो असम, केरल और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में कांग्रेस की साख बचाने में ‘मुस्लिम फैक्टर’ ने सबसे अहम भूमिका निभाई है।
असम: 19 में से 18 विधायक एक ही समुदाय से
असम के चुनावी नतीजों ने राजनीतिक पंडितों को सबसे ज्यादा हैरान किया है। यहां कांग्रेस के प्रदर्शन का आधार पूरी तरह से अल्पसंख्यक बहुल इलाकों पर टिका नजर आया:
-
हैरान करने वाले आंकड़े: असम में कांग्रेस के कुल 19 विधायक चुनाव जीतकर पहुंचे हैं, जिनमें से 18 मुस्लिम समुदाय से हैं।
-
आबादी का गणित: गठबंधन के कुल 22 मुस्लिम उम्मीदवारों को जीत मिली है। इनमें से 5 सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम आबादी 90 फीसदी से अधिक है, जबकि 6 सीटों पर यह आंकड़ा 80 फीसदी के पार है। स्पष्ट है कि जहां मुस्लिम आबादी सघन है, वहां कांग्रेस को एकतरफा वोट मिले हैं।
केरल: यूडीएफ की जीत का मुख्य आधार
केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (UDF) की सफलता की कहानी भी कुछ ऐसी ही रही। राज्य की सत्ता के समीकरणों में मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व निर्णायक साबित हुआ:
-
UDF का दबदबा: केरल विधानसभा में कुल 35 मुस्लिम विधायक पहुंचे हैं, जिनमें से 30 अकेले UDF खेमे से हैं।
-
सहयोगियों का साथ: इन 30 विधायकों में से 8 कांग्रेस के हैं, जबकि 22 उसकी प्रमुख सहयोगी पार्टी ‘इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग’ (IUML) के टिकट पर जीते हैं। नीलांबुर, पोन्नानी और कलपेट्टा जैसी मुस्लिम बहुल सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवारों ने अपनी पैठ मजबूत बनाए रखी।
बंगाल और तमिलनाडु: जहां आबादी ज्यादा, वहीं मिली जीत
पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में भी कांग्रेस का प्रदर्शन इसी पैटर्न की तस्दीक करता है:
-
पश्चिम बंगाल: ममता बनर्जी की लहर के बीच कांग्रेस केवल दो सीटें—फरक्का और रानीनगर—जीतने में सफल रही। दिलचस्प बात यह है कि फरक्का में 67 फीसदी और रानीनगर में 80 फीसदी मुस्लिम आबादी है। दोनों ही सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवारों ने ही परचम लहराया।
-
तमिलनाडु: यहां भी कांग्रेस के विजयी उम्मीदवारों की सूची में मुस्लिम चेहरा शामिल है, जो यह दर्शाता है कि गठबंधन के बावजूद पार्टी का कोर वोट बैंक विशिष्ट क्षेत्रों में ही सिमटा हुआ है।
The News 11 – ताज़ा हिंदी समाचार, ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, देश-दुनिया