पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह कोई राजनीतिक रैली नहीं बल्कि उनका ‘कानूनी अवतार’ है। गुरुवार (14 मई, 2026) को ममता बनर्जी जब कलकत्ता हाईकोर्ट में काले कोट और बैंड (वकील की पोशाक) में नजर आईं, तो वहां मौजूद हर शख्स दंग रह गया। इस घटना के कुछ ही घंटों बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने कड़ा रुख अपनाते हुए उनके ‘एडवोकेट’ स्टेटस की जांच शुरू कर दी है।
चुनावी हिंसा पर दलील देने पहुंची थीं ‘दीदी’
ममता बनर्जी बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद हुई कथित हिंसा से जुड़े एक मामले (PIL) में पैरवी करने पहुंची थीं। उन्होंने चीफ जस्टिस सुजॉय पाल और जस्टिस पार्थ सारथी सेन की बेंच के सामने दलीलें दीं और राज्य के लोगों की सुरक्षा की गुहार लगाई। हालांकि, एक पूर्व मुख्यमंत्री का अचानक वकील के चोगे में कोर्ट रूम पहुंचना कानूनी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या 15 साल तक संवैधानिक पद पर रहने के बाद वे बिना अनुमति दोबारा प्रैक्टिस शुरू कर सकती हैं?
BCI ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से पूछे तीखे सवाल
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने इस मामले में दखल देते हुए पश्चिम बंगाल बार काउंसिल को पत्र लिखकर 16 मई तक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। BCI ने मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है:
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नामांकन की स्थिति: क्या ममता बनर्जी का नाम अभी भी राज्य के वकीलों की लिस्ट (State Roll) में शामिल है?
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प्रैक्टिस का निलंबन: क्या 2011 से 2026 तक मुख्यमंत्री रहने के दौरान उन्होंने अपनी प्रैक्टिस को ‘सस्पेंड’ करने की जानकारी दी थी?
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दोबारा बहाली: क्या पद छोड़ने के बाद उन्होंने फिर से प्रैक्टिस शुरू करने के लिए कोई आधिकारिक आवेदन दिया था?
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वैध प्रमाण पत्र: क्या उनके पास वर्तमान में कानूनी रूप से प्रैक्टिस करने का ‘Certificate of Practice’ उपलब्ध है?
क्या कहता है बार काउंसिल का नियम?
भारतीय कानून (Advocates Act, 1961) के अनुसार, यदि कोई वकील किसी संवैधानिक पद या लाभ के पद पर आसीन होता है, तो उसे अपनी प्रैक्टिस स्वैच्छिक रूप से निलंबित करनी पड़ती है। पद से हटने के बाद प्रैक्टिस दोबारा शुरू करने के लिए बार काउंसिल को सूचित करना और नियमों का पालन करना अनिवार्य है। BCI ने साफ किया है कि वकील की पोशाक और बैंड केवल एक प्रोफेशनल पहचान नहीं, बल्कि कानूनी प्रोटोकॉल का हिस्सा हैं, जिसका उल्लंघन पेशेवर कदाचार की श्रेणी में आ सकता है।
48 घंटे में जमा करने होंगे सारे रिकॉर्ड
BCI के प्रधान सचिव श्रीमंतो सेन द्वारा जारी पत्र में निर्देश दिया गया है कि अगले दो दिनों के भीतर नामांकन रजिस्टर, फाइल नोटिंग और बहाली से जुड़े सभी दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां भेजी जाएं। काउंसिल ने यह भी चेतावनी दी है कि जांच पूरी होने तक मूल दस्तावेजों में कोई भी बदलाव या सुधार नहीं किया जाना चाहिए। अगर ममता बनर्जी के प्रैक्टिस सर्टिफिकेट में कोई तकनीकी कमी पाई जाती है, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
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