आजकल के समय में बच्चों के दांतों में सड़न और कैविटी (कीड़े लगना) एक बहुत ही आम और गंभीर समस्या बन चुकी है। अक्सर माता-पिता इसे यह सोचकर नजरअंदाज कर देते हैं कि ये तो ‘दूध के दांत’ हैं, जो एक दिन टूट ही जाएंगे। लेकिन डेंटिस्ट्स के अनुसार, शुरुआत में की गई यह लापरवाही आगे चलकर बच्चों में असहनीय दर्द, मसूड़ों में इन्फेक्शन और भविष्य में आने वाले पक्के (स्थायी) दांतों को भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।
बच्चों द्वारा खाई जाने वाली चॉकलेट, टॉफी, बिस्कुट, पैक्ड जूस और कोल्ड ड्रिंक्स दांतों के कोनों में चिपक जाते हैं। मुंह में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया इस चिपकी हुई चीनी को एसिड में बदल देते हैं, जो दांतों के सुरक्षा कवच ‘इनेमल’ को गला देता है। यदि आप चाहते हैं कि आपके बच्चे के दांत हमेशा फौलाद जैसे मजबूत और चमकदार रहें, तो डेंटिस्ट द्वारा सुझाए गए इन 7 ओरल केयर नियमों को आज ही से अपने घर में लागू करें।
1. दिन में दो बार ब्रश कराना है अनिवार्य
बच्चों को सुबह सोकर उठने के बाद और रात को सोने से ठीक पहले ब्रश करने की आदत डालें। बच्चों के लिए फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट का इस्तेमाल करना अच्छा माना जाता है, लेकिन इसकी मात्रा उम्र के हिसाब से तय होनी चाहिए:
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3 साल से कम उम्र के बच्चे: सिर्फ एक चावल के दाने के बराबर टूथपेस्ट का इस्तेमाल करें।
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3 से 6 साल तक की उम्र: मटर के दाने के बराबर (Pea-sized) पेस्ट लें।
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अभिभावक रखें नजर: जब तक बच्चा 7-8 साल का न हो जाए, तब तक खुद खड़े होकर अपनी देखरेख में ही उससे ब्रश करवाएं ताकि वह पेस्ट निगले नहीं।
2. सही समय पर शुरू करें फ्लॉसिंग (Flossing)
सिर्फ ब्रश करने से दांतों के बीच फंसा भोजन बाहर नहीं निकल पाता। जैसे ही बच्चे के दो दांत बड़े होने लगें और आपस में छूने (Touch) लगें, तो उनके बीच फ्लॉसिंग करना शुरू कर देना चाहिए। हालांकि, बच्चे के मसूड़े बेहद नाजुक होते हैं, इसलिए फ्लॉस करने का सही तरीका जानने के लिए एक बार अपने डेंटिस्ट से सलाह जरूर ले लें।
3. मीठे और चिपचिपे फूड्स पर लगाएं लगाम
बच्चों को बार-बार टॉफी, कैंडी या मीठी चीजें खाने की आजादी न दें, क्योंकि मुंह में जितनी ज्यादा देर तक मीठा रहेगा, कैविटी का खतरा उतना ही बड़ा होगा। विशेष रूप से रात को सोने से पहले बच्चों को पैकेज्ड जूस, सोडा, स्पोर्ट्स ड्रिंक या चीनी वाला मीठा दूध देने से पूरी तरह परहेज करें।
4. हर बार खाने के बाद कुल्ला करने की आदत
बच्चा जब भी कुछ खाए—चाहे वह दोपहर का खाना हो या कोई छोटा सा स्नैक—उसे सादे पानी से अच्छी तरह कुल्ला (Rinse) करने की आदत सिखाएं। फ्लोराइड युक्त पानी से इनेमल मजबूत होता है। कुल्ला करने से दांतों के बीच फंसे खाने के कण और बैक्टीरिया तुरंत मुंह से बाहर निकल जाते हैं।
5. रात को सोते समय बोतल से दूध पिलाने की गलती न करें
यह बच्चों में कैविटी होने की सबसे बड़ी वजहों में से एक है, जिसे मेडिकल साइंस में ‘नरसिंग बॉटल कैविटी’ कहा जाता है। सोते समय बच्चे के मुंह में दूध की बोतल छोड़ देने से दूध या फॉर्मूला मिल्क रातभर उसके दांतों के संपर्क में रहता है। इससे पूरी रात मुंह में एसिड बनता है और दांत अंदर से खोखले हो जाते हैं। रात को बिस्तर पर जाने के बाद बच्चे को सिर्फ सादा पानी ही पिलाएं।
6. हर 6 महीने में डेंटिस्ट से रूटीन चेकअप
जिस तरह बच्चों के शारीरिक विकास के लिए आप डॉक्टर के पास जाते हैं, ठीक उसी तरह हर 6 महीने में बच्चे को डेंटिस्ट के पास रूटीन चेकअप के लिए जरूर ले जाएं। डेंटिस्ट की सलाह पर आप बच्चों के दांतों को सड़न से बचाने के लिए ‘फ्लोराइड ट्रीटमेंट’ करवा सकते हैं और ‘डेंटल सीलेंट’ की जांच भी करवाते रहें।
7. दांतों के लिए चुनें हेल्दी स्नैक्स (Healthy Snacking)
बच्चों की छोटी भूख या स्नैक्स टाइम के लिए चिपचिपे पोटैटो चिप्स, क्रैकर्स या कैंडी के बजाय दांतों को मजबूत बनाने वाले फूड्स चुनें:
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पनीर और कम चीनी वाला दही: इनमें मौजूद कैल्शियम और फास्फोरस दांतों के इनेमल को दोबारा रिपेयर (Remineralize) करने में मदद करते हैं।
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ताजे फल और कच्ची सब्जियां: सेब, गाजर और खीरा जैसी चीजें चबाने से मुंह में लार (Saliva) अधिक बनती है, जो नेचुरल तरीके से दांतों को साफ करती है।
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नट्स (मेवे): बच्चे की उम्र और चबाने की क्षमता के हिसाब से उन्हें बादाम या अखरोट दें, जो ओरल हेल्थ के लिए बेहतरीन हैं।
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