
विश्व क्रिकेट में अपनी तूफानी गति और खौफनाक बाउंसरों से दुनिया भर के बल्लेबाजों के मन में दहशत पैदा करने वाले इंग्लैंड के स्टार तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर (Jofra Archer) की फिटनेस और वर्कलोड मैनेजमेंट हमेशा से चर्चा का विषय रहा है। 2019 के एशेज सीरीज और वनडे विश्व कप में अपनी गति से तहलका मचाने वाले आर्चर पिछले कुछ सालों से कोहनी में स्ट्रेस फ्रैक्चर और गंभीर चोटों के कारण लंबे समय तक रेड-बॉल (टेस्ट) क्रिकेट से दूर रहे हैं।
अब इंग्लैंड क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज जो रूट (Joe Root) ने जोफ्रा आर्चर के करियर की शुरुआती दौर की चोटों को लेकर बड़ा खुलासा किया है। जो रूट ने बेहद ईमानदारी से स्वीकार किया है कि जब वे इंग्लैंड के टेस्ट कप्तान थे, तब उन्होंने जोफ्रा आर्चर से जरूरत से ज्यादा ओवर गेंदबाजी कराई थी, जो कि उनकी एक बड़ी प्रशासनिक और कप्तानी भूल थी। रूट ने कहा कि उन्हें अपनी उस पुरानी गलती का गहरा पछतावा और अहसास है और अब वे यह सुनिश्चित करेंगे कि जोफ्रा का वर्कलोड सही तरीके से मैनेज हो।
2019 का न्यूजीलैंड दौरा और 42 ओवरों का वो कड़वा सच
जो रूट ने जिस कड़वे सच का जिक्र किया, वह घटना साल 2019 में न्यूजीलैंड दौरे के दौरान माउंट माउंगानुई (Mount Maunganui) टेस्ट मैच की है। उस टेस्ट मैच की पहली पारी में जो रूट ने युवा और नए-नवेले तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर से अकेले ही 42 ओवर गेंदबाजी करा दी थी। 90 मील प्रति घंटे (145+ किमी/घंटा) से अधिक की रफ्तार से लगातार 42 ओवर फेंकना किसी भी तेज गेंदबाज के शरीर के लिए विनाशकारी साबित हुआ।
इसी मैच के कुछ समय बाद जोफ्रा आर्चर के दाहिने हाथ की कोहनी में गंभीर स्ट्रेस फ्रैक्चर हो गया। इसके बाद आर्चर को कई बार सर्जरी करानी पड़ी, दो साल से ज्यादा समय तक पेशेवर क्रिकेट से बाहर रहना पड़ा और वे टेस्ट क्रिकेट से लगभग गायब से हो गए थे। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना था कि जो रूट द्वारा उनसे अत्यधिक लंबे स्पेल (Spells) फिंकवाना ही उनकी इस गंभीर चोट की मुख्य वजह बना था।
‘मैं उस समय कप्तानी में नया था…’: जो रूट ने मानी अपनी गलती और वर्कलोड पर कही बड़ी बात
हाल ही में मीडिया से बातचीत करते हुए जो रूट ने अपने उस फैसले पर दुख व्यक्त किया। जो रूट ने कहा, “जब जोफ्रा टीम में आए थे, तो उनके पास वह एक्स-फैक्टर (X-Factor) था जिसे हर कप्तान अपनी टीम में देखना चाहता है। जब भी टीम को विकेट की जरूरत होती थी, मैं गेंद उनके हाथ में थमा देता था। लेकिन एक युवा कप्तान के रूप में मुझसे गलती हुई। मुझे समझ नहीं आया कि 150 किमी/घंटा की रफ्तार से फेंकने वाले गेंदबाज का शरीर कितना दबाव झेल सकता है। मैंने उनसे बहुत ज्यादा ओवर फिंकवाए, जिसका असर उनके शरीर पर पड़ा।”
रूट ने आगे कहा, “अब जब जोफ्रा धीरे-धीरे अपनी पूरी लय में वापस आ रहे हैं और टेस्ट क्रिकेट में वापसी के मुहाने पर हैं, तो हमें उनकी फिटनेस का बहुत बारीक ध्यान रखना होगा। हमें उनसे 5 या 6 ओवरों के छोटे लेकिन अत्यधिक प्रभावशाली (High-Impact) स्पेल कराने की जरूरत है, न कि उनसे लगातार 20-25 ओवर फिंकवाने की। मैं और मौजूदा टीम प्रबंधन इस बात को लेकर पूरी तरह सतर्क हैं कि इस बार जोफ्रा के वर्कलोड में कोई कोताही न बरती जाए।”
बेन स्टोक्स और ब्रेंडन मैकुलम का नया ‘मास्टरप्लान’
इंग्लैंड के मौजूदा टेस्ट कप्तान बेन स्टोक्स (Ben Stokes) और हेड कोच ब्रेंडन मैकुलम भी जोफ्रा आर्चर को लेकर बेहद सतर्क रुख अपना रहे हैं। इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) के मेडिकल स्टाफ ने जोफ्रा आर्चर के लिए एक विशेष ‘रेड-बॉल रिटर्न प्रोटोकॉल’ तैयार किया है।
इस प्लान के तहत:
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जोफ्रा आर्चर को काउंटी क्रिकेट या अभ्यास मैचों में सीमित ओवरों की स्पेल डालने की अनुमति दी जा रही है।
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टेस्ट मैचों में उन्हें केवल तभी मैदान में उतारा जाएगा जब उनका शरीर लगातार चार-पांच दिनों तक गेंदबाजी के भार को सहने के लिए 100% फिट हो जाएगा।
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बैक-टू-बैक टेस्ट मैचों में खेलने के बजाय उन्हें रोटेशन पॉलिसी के तहत आराम दिया जाएगा ताकि वे आगामी महत्वपूर्ण सीरीज और एशेज (Ashes) के लिए पूरी तरह तरोताजा रह सकें।
इंग्लैंड की गेंदबाजी आक्रमण में जोफ्रा आर्चर, मार्क वुड और गस एटकिंसन जैसे गेंदबाजों की मौजूदगी उन्हें दुनिया की सबसे खतरनाक बॉलिंग यूनिट बनाती है। जो रूट के इस हालिया बयान से साफ है कि इंग्लैंड क्रिकेट ने अतीत की गलतियों से बड़ा सबक लिया है और वे अब अपने सबसे अनमोल तेज गेंदबाज के करियर को लंबा खींचने के लिए हर संभव एहतियात बरत रहे हैं।
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