
ईरान के साथ जारी भीषण सैन्य संघर्ष और मध्य पूर्व के रणनीतिक समुद्री मार्गों पर तैनात अमेरिकी नौसेना के सबसे बड़े परमाणु-संचालित विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन (USS Abraham Lincoln) के भीतर से एक खौफनाक और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। लगातार 250 से अधिक दिनों से बिना किसी ठोस किनारे के ठहराव के समंदर में गश्त लगा रहे अमेरिकी नौसैनिकों और मरीन कमांडोज की मानसिक स्थिति खतरनाक स्तर तक बिगड़ चुकी है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के प्रमुख प्रकाशनों ‘नेवी टाइम्स’ और ‘स्टार्स एंड स्ट्राइप्स’ के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में खुलासा हुआ है कि इस एयरक्राफ्ट कैरियर पर तैनात कई सैनिकों ने अत्यधिक मानसिक तनाव, डिप्रेशन और हताशा के चलते उफनते समंदर में छलांग लगाकर आत्महत्या करने की कोशिश की है। पोत पर मौजूद अन्य सतर्क सहयोगियों ने ऐन वक्त पर अपने साथी सैनिकों को पकड़कर डेक पर वापस खींचकर उनकी जान बचाई।
यह घटना अमेरिकी सैन्य इतिहास के आधुनिक दौर की सबसे गंभीर मानवीय और मनोवैज्ञानिक त्रासदियों में से एक बनकर उभरी है। हॉरमुज जलडमरूमध्य और अरब सागर में ईरान के खिलाफ जारी युद्ध अभियानों में जुटे इस पोत पर सवार लगभग 5,000 नौसैनिकों का मनोबल पूरी तरह टूट चुका है। सैन डिएगो से नवंबर 2025 में रवाना हुए इस युद्धपोत को शुरुआत में प्रशांत महासागर में तैनात किया जाना था, लेकिन ईरान-अमेरिका युद्ध छिड़ने के बाद इसे आपातकालीन स्थिति में मध्य पूर्व की ओर मोड़ दिया गया। मई 2026 में अपने स्वदेश लौटने की समय-सीमा समाप्त होने के बावजूद पेंटागन द्वारा इनकी तैनाती को बार-बार अनिश्चित काल के लिए बढ़ाया जा रहा है, जिसने सैनिकों और उनके परिवारों के सब्र का बांध पूरी तरह तोड़ दिया है।
250 दिनों का अंतहीन समंदर का सफर और टूटता अमेरिकी सैनिकों का सब्र
तकरीबन नौ महीनों के लंबे सफर में USS अब्राहम लिंकन के चालक दल को केवल दो बार ही जमीन पर कदम रखने का मौका मिला है—पहली बार दिसंबर में गुआम में और दूसरी बार जुलाई में ओमान के तट पर सिर्फ री-स्टॉकिंग के दौरान। आधुनिक नौसैनिक इतिहास में किसी भी विमानवाहक पोत के लिए लगातार 250 दिनों तक बिना किसी तट पर विश्राम (Port Visit) के समंदर में मुस्तैद रहना एक अप्रत्याशित और शारीरिक रूप से तोड़ने वाला अनुभव साबित हो रहा है। सैनिकों की पत्नियों और परिजनों ने अमेरिकी नौसेना कमान से सीधी बातचीत के दौरान दिल दहला देने वाली दास्तानें साझा की हैं। एक सैनिक की पत्नी ऐनाबेले लोमा ने बताया कि उनके पति ने तैनाती के बार-बार विस्तार से तंग आकर समंदर में कूदने का प्रयास किया था, जिन्हें बाद में ‘मेडिकल होल्ड’ के तहत चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।
एक अन्य सैनिक की पत्नी मारिया रोड्रिगेज ने बताया कि उनके पति ने अपने ही साथी सैनिक को डेक के किनारे से समंदर में कूदते समय हाथों से लपककर बचाया। सैन डिएगो में नौसेना नेतृत्व के साथ हुई टाउन हॉल बैठक में रोने-बिलखते परिजनों ने अधिकारियों पर सीधा आरोप लगाया कि उन्होंने सैनिकों और उनके परिवारों का भरोसा पूरी तरह से तोड़ दिया है। कई परिजनों ने दिखाया कि उनके पति और बच्चे फोन पर मैसेज भेजकर कह रहे हैं कि वे इतने थक चुके हैं और मानसिक रूप से टूट चुके हैं कि अब वे अगली सुबह जिंदा न उठने की दुआ कर रहे हैं।
सड़े हुए खाने से लेकर टूटे टॉयलेट तक: USS अब्राहम लिंकन पर घोर बदहाली का आलम
युद्धपोत के भीतर केवल मानसिक दबाव ही नहीं, बल्कि बुनियादी सुविधाओं का पूरी तरह ध्वस्त हो जाना भी इस बगावत और डिप्रेशन की सबसे बड़ी वजह बनकर सामने आया है। अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के प्रतिनिधियों और सीनेटरों ने पोत की दयनीय स्थिति का खाका खींचते हुए पेंटागन को घेरा है। कैलिफोर्निया के सांसद माइक लेविन ने उजागर किया कि 5,000 सैनिकों के लिए शिप पर फफूंद (मिल्ड्यू और मोल्ड) से भरे शावर, हफ्तों से बंद पड़े लॉन्ड्री के कपड़े धोने के टब, और खराब पड़े टॉयलेट सबसे बड़ी समस्या बने हुए हैं। इसके अलावा भीषण गर्मी के बीच हफ्तों से गर्म पानी और एसी की उचित सुविधा न मिलने के कारण बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
जहाज पर भोजन और जरूरी सैनिटरी सामानों का भारी संकट पैदा हो गया है। अमेरिकी सांसदों के अनुसार, युद्धपोत पर तैनात देश के रक्षकों को भोजन के नाम पर आधा कप चावल और दो टॉर्टिला (रोटियां) तक सीमित कर दिया गया है। साबुन, टूथपेस्ट और डियोड्रेंट जैसे बुनियादी स्वच्छता उत्पाद खत्म हो चुके हैं। इसके ऊपर, 24 घंटे अलर्ट मोड पर चल रहे इस युद्धपोत पर सैनिकों को बिना किसी वीक-ऑफ या छुट्टी के रोजाना 12 से 16 घंटे की थका देने वाली ड्यूटी करनी पड़ रही है। ईरान की मिसाइलों और ड्रोन हमलों के लगातार खतरे के बीच इस तरह की परिस्थितियों में जीना सैनिकों की सहनशक्ति की अंतिम सीमा पार कर चुका है।
अमेरिकी राजनीति में भूचाल: पेंटागन और रक्षा मंत्री पर उठे गंभीर सवाल
इस सनसनीखेज खुलासे के बाद वॉशिंगटन डीसी के राजनीतिक गलियारों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। इससे पहले जब अप्रैल में USS अब्राहम लिंकन पर पानी की किल्लत और बदहाली की खबरें आई थीं, तब अमेरिकी रक्षा मंत्री (Defense Secretary) पीट हेगसेथ ने इन्हें सिरे से खारिज करते हुए ‘फेक न्यूज’ करार दिया था। लेकिन अब सैनिकों द्वारा समंदर में छलांग लगाने की खबरों के बाद डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंटल, जेसन क्रो और रूबेन गैलेगो ने रक्षा मंत्रालय से कड़े जवाब मांगे हैं। सांसदों ने रक्षा मंत्री की खिंचाई करते हुए कहा कि देश सेवा के लिए सीमा पर तैनात जवानों को कम से कम साफ पानी, काम करता टॉयलेट और दो वक्त का सही खाना मिलना चाहिए, और रक्षा मंत्रालय उनके परिवारों की आंखों में देखकर झूठ बोलना बंद करे।
नौसेना के कार्यवाहक सचिव और शीर्ष कमांडरों को बैकफुट पर आना पड़ा है। हालांकि, अमेरिकी नौसेना के प्रवक्ता ने एक आधिकारिक बयान जारी कर यह दावा करने की कोशिश की है कि जहाज पर आत्महत्या के मामलों में कोई अप्रत्याशित उछाल नहीं आया है और वहां काउंसलर्स तथा पादरियों (Chaplains) की व्यवस्था की गई है। लेकिन दूसरी तरफ नौसेना ने यह स्वीकार किया कि लंबे समय तक चलने वाले युद्ध अभियानों का सैनिकों के स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है। सीनेटरों की एक द्विदलीय समिति ने अब USS अब्राहम लिंकन पर आपातकालीन निरीक्षण (Oversight Visit) की मांग की है ताकि सैनिकों को तुरंत राहत दी जा सके और उनकी सुरक्षित वापसी की समय-सीमा तय की जा सके।
विदेशी सरजमीं पर युद्ध का भारी मानवीय मूल्य
USS अब्राहम लिंकन पर मची यह खलबली यह दर्शाती है कि आधुनिक युद्ध केवल तकनीक, मिसाइलों और विमानों से नहीं लड़े जाते, बल्कि उन्हें संचालित करने वाले इंसानों का मनोबल सबसे अहम होता है। ईरान के साथ बढ़ते तनाव और मध्य पूर्व के युद्ध में अमेरिका की लंबी मौजूदगी ने उसके सैनिकों को शारीरिक और मानसिक पतन के कगार पर ला खड़ा किया है। जब तक वॉशिंगटन में बैठी सरकार इन सैनिकों की बदहाली और उनकी वापसी पर कोई ठोस फैसला नहीं लेती, तब तक समंदर के बीचों-बीच खड़े इस सबसे बड़े सुपरकैरियर पर गहराता मानसिक स्वास्थ्य संकट अमेरिकी नौसेना के लिए एक बड़ा नासूर बना रहेगा।
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