ईरान-अमेरिका वार्ता बेनतीजा: ओमान में मीटिंग खत्म होते ही भड़का अमेरिका, ईरानी तेल पर लगाए कड़े प्रतिबंध

मस्कट/वाशिंगटन: पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीदों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। ओमान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच हुई उच्च-स्तरीय परमाणु वार्ता किसी ठोस नतीजे पर पहुंचने के बजाय नए विवादों में घिर गई है। शुक्रवार को मस्कट में बातचीत खत्म होने के कुछ ही देर बाद अमेरिका ने कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान के तेल निर्यात को निशाना बनाकर नए प्रतिबंधों का ऐलान कर दिया। इन प्रतिबंधों में तेल की तस्करी में शामिल 14 जहाजों को ब्लैकलिस्ट किया गया है।

वार्ता की मेज पर टकराव: एजेंडे को लेकर अड़े दोनों देश

ओमान में शुरू हुई इस परोक्ष (Indirect) वार्ता का मुख्य उद्देश्य तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर जारी वर्षों पुराने गतिरोध को खत्म करना था। हालांकि, शुरुआत में ही दोनों देशों के बीच एजेंडे को लेकर तलवारें खिंच गईं।

  • अमेरिका की मांग: वाशिंगटन चाहता है कि परमाणु मुद्दे के साथ-साथ ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, क्षेत्रीय सशस्त्र समूहों (प्रोक्सी) को मिलने वाले समर्थन और मानवाधिकारों के मुद्दे पर भी चर्चा हो।

  • ईरान का रुख: ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपनी मिसाइल ताकत पर कोई समझौता या बातचीत नहीं करेंगे। वे केवल यूरेनियम संवर्धन के अपने अधिकार को अंतरराष्ट्रीय मान्यता दिलाना चाहते हैं।

ट्रंप की चेतावनी और युद्धपोतों की तैनाती से बढ़ा तनाव

यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की आहट सुनाई दे रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में बेहद सख्त लहजे में चेतावनी दी थी कि अगर समझौता नहीं हुआ तो “बुरी चीजें” होंगी। इस बयान के बाद क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति बढ़ा दी गई है और कई जंगी जहाजों को ईरान की ओर रवाना किया गया है। दूसरी ओर, ईरान ने भी साफ कर दिया है कि वह किसी भी दुस्साहस का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

राजनयिक प्रयासों पर अनिश्चितता के बादल

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिकी दूत स्टीव विटकाफ के बीच होने वाली इस बातचीत को ओमान के विदेश मंत्री पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन वार्ता शुरू होने से पहले ही अमेरिकी मध्य कमान (CENTCOM) के अधिकारियों की मौजूदगी पर ईरान ने आपत्ति जताई, जिससे प्रक्रिया और जटिल हो गई। ईरान का कहना है कि सैन्य अधिकारियों की मौजूदगी परमाणु कूटनीति को खतरे में डाल सकती है।

ईरान के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को अपनी संप्रभुता की रक्षा की शपथ दोहराते हुए कहा कि वे किसी भी “अनुचित मांग” के आगे नहीं झुकेंगे। अमेरिका के नए तेल प्रतिबंधों ने अब स्पष्ट कर दिया है कि निकट भविष्य में दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के आसार कम ही हैं।

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