
मॉस्को/नई दिल्ली। भारत की हवाई सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठने जा रहा है। रूस से मिलने वाला अत्याधुनिक S-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम अब अंतिम चरण में है और जल्द ही इसकी चौथी यूनिट भारत पहुंचने वाली है। लंबे इंतजार और वैश्विक परिस्थितियों के चलते हुई देरी के बाद अब इस डील में तेजी देखने को मिल रही है।
मई-जून में पहुंचेगा चौथा S-400 सिस्टम
सूत्रों के मुताबिक, भारत को मिलने वाला चौथा S-400 सिस्टम अब मई या जून तक डिलीवर कर दिया जाएगा। पहले इसकी डिलीवरी मार्च में प्रस्तावित थी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण इसमें देरी हुई। इसके साथ ही पांचवीं यूनिट भी इसी साल के अंत तक भारत पहुंचने की उम्मीद है।
रूस-यूक्रेन युद्ध से प्रभावित हुई डिलीवरी
दरअसल, रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध का असर भारत को मिलने वाले रक्षा उपकरणों पर भी पड़ा। इसी कारण S-400 की सप्लाई बार-बार टलती रही। हालांकि अब रूस ने डिलीवरी प्रक्रिया को तेज कर दिया है और दोनों लंबित सिस्टम इसी साल भारत को सौंपे जाने की तैयारी में हैं।
सीमा सुरक्षा में निभाएगा अहम रोल
भारत द्वारा खरीदे गए कुल पांच S-400 सिस्टम में से तीन को पाकिस्तान सीमा के पास तैनात किए जाने की योजना है। इससे पश्चिमी सीमा पर हवाई खतरों के खिलाफ भारत की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। ड्रोन और मिसाइल हमलों के बढ़ते खतरे के बीच यह सिस्टम एक मजबूत सुरक्षा कवच साबित होगा।
2018 में हुई थी 5 अरब डॉलर की डील
भारत ने साल 2018 में रूस के साथ करीब 5 अरब डॉलर की बड़ी रक्षा डील के तहत पांच S-400 सिस्टम खरीदने का फैसला किया था। अब तक तीन सिस्टम भारत को मिल चुके हैं, जबकि बाकी दो की डिलीवरी इस साल पूरी हो जाएगी।
‘प्रोजेक्ट सुदर्शन चक्र’ के तहत और खरीद की तैयारी
भारत केवल इन पांच सिस्टम तक सीमित नहीं रहना चाहता। सरकार पांच और S-400 सिस्टम खरीदने की योजना बना रही है। ये सभी सिस्टम ‘प्रोजेक्ट सुदर्शन चक्र’ के तहत देश की बहुस्तरीय हवाई सुरक्षा को और मजबूत करेंगे। प्रधानमंत्री द्वारा घोषित इस योजना का उद्देश्य देश को आधुनिक एयर डिफेंस नेटवर्क से लैस करना है।
दुनिया की सबसे ताकतवर एयर डिफेंस सिस्टम में शामिल
रूस का S-400 ट्रायम्फ सिस्टम दुनिया के सबसे उन्नत और घातक एयर डिफेंस सिस्टम में गिना जाता है। इसे अल्माज सेंट्रल डिजाइन ब्यूरो ने विकसित किया है। यह आधुनिक रडार और टारगेटिंग तकनीक से लैस है, जो दुश्मन के विमानों, क्रूज मिसाइलों और बैलिस्टिक मिसाइलों को पहचानकर उन्हें नष्ट करने में सक्षम है।
एक साथ 300 टारगेट पर नजर, 400 किमी तक मार
S-400 सिस्टम की सबसे बड़ी ताकत इसकी लंबी दूरी और मल्टी-टारगेट क्षमता है। यह एक साथ करीब 300 लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है और 400 किलोमीटर तक की दूरी पर दुश्मन को मार गिराने की क्षमता रखता है। इसकी ट्रैकिंग रेंज लगभग 600 किमी तक बताई जाती है।
चार तरह की मिसाइलों से लैस
इस सिस्टम में चार अलग-अलग रेंज की मिसाइलें लगाई जा सकती हैं, जिनकी मारक क्षमता 400 किमी, 250 किमी, 120 किमी और 40 किमी तक होती है। यही वजह है कि यह अलग-अलग दूरी और ऊंचाई पर मौजूद लक्ष्यों को एक साथ निशाना बना सकता है।
पुराने सिस्टम से कहीं ज्यादा तेज
S-400 अपने पुराने वर्जन S-300 के मुकाबले करीब 2.5 गुना ज्यादा तेज फायरिंग क्षमता रखता है। यह हाइपरसोनिक और बैलिस्टिक मिसाइलों जैसे आधुनिक खतरों को भी रोकने में सक्षम है, जिससे यह भारत की सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा बन चुका है।
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